7 साल के बच्चे ने निगल लिया था सिक्का, 5 घंटे की सर्जरी के बाद KEM के डॉक्टर्स ने बचाई जान

KEM अस्पताल में बच्‍चे सफल सर्जरी तो हो गई है, लेकिन कोरोनावायरस के खतरे को देखते हुए बच्चे का Covid-19 टेस्ट भी किया गया है, जिसकी रिपोर्ट के आने का इंतजार है.

Lockdown: ठहरी हुई 1000 बसों पर सरपट दौड़ी सियासत

मजदूर पहले भी पैदल चल रहा था, अब भी चल रहा है. वैसे मजदूर और गरीब तो जीवन भर ‘चलने’ और ‘चलाए जाने’ के लिए ही होता है. कभी इस मालिक के इशारे पर, कभी उस मालिक के इशारे पर. तो कभी देश-प्रदेश के मालिकों के इशारे पर.

क्यों ठहर गई ‘चलते’ मजदूरों की जिंदगी?

कल तक यही मजदूर (Workers) वोटर (Voter) होने के नाते मां-बाप थे, आज ये केवल सरकारों के एहसानों की भूखी आबादी हैं. कल तक ये मजदूर अर्थव्यवस्था (Economy) की रीढ़ थे और आज इनकी जिम्मेदारियां उठाने में अर्थव्यवस्था की पीठ पर बोझ बढ़ने लगा.

पश्चिम बंगाल में Pandemic पॉलिटिक्स, न Covid-19 टेस्ट न इलाज… ममता दीदी जो कहें वही पास!

लोकसभा (Loksabha) में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन (AR Chowdhary) ने ममता सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. अधीर रंजन ने कहा है कि राज्य के सरकारी अस्पतालों को निर्देश दिया गया है कि कोरोना (Coronavirus) से होने वाली मौतों के मामलों में इसका जिक्र न करें.

NRC पीड़ितों का चुनाव… महज संयोग है या केजरीवाल का प्रयोग?

असम में NRC की लिस्ट में 19 लाख 6 हजार 657 लोगों का नाम नहीं था. दिल्ली के मुख्यमंत्री ने इन लाखों लोगों में से कुछ नामों को चुना. सही भी है. विधानसभा में चर्चा के दौरान केजरीवाल लाखों लोगों का नाम कैसे ले सकते थे? लेकिन केजरीवाल ने जिन...

Corona से नहीं साहब…डर इसके ‘साइड इफेक्ट्स’ से लगता है!

कोरोनावायरस (Coronavirus) ने पैसे वालों को चिंता में डाल दिया है. खासतौर से भ्रमणकारी भारतीयों को. विदेश भ्रमण के एडिक्ट ऐसे लोगों की तो रातों की नींद ही उड़ गई है.

मुस्लिम आरक्षण को लेकर सियासत गरमाई, BJP ने शिवसेना को दिया सीधा सरकार बनाने का ऑफर!

भाजपा नेता सुधीर मूनगंटिवार ने कहा की अगर शिवसेना का मुस्लिम आरक्षण पर एनसीपी कांग्रेस सरकार छोड़ती है तो इस विषय को लेकर भाजपा शिवसेना सरकार का साथ देगी.

आखिर कब दूर होगी बेसब्री…जस्टिस मुरलीधर पर ‘हिट विकेट’ हो गई कांग्रेस?

राजनीति में विरोध की इजाजत होती है. कांग्रेस को भी इस बात का अधिकार है. लेकिन विरोध के अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए राजनीतिक पार्टियों को संस्थाओं की गरिमा का भी ख्याल रखना होता है.

Delhi Violence: आपको दिल्ली की कसम…!अपने शहर को बदसूरत बनाने वालों का साथ कभी न दें

दिल्ली में आज जिन हाथों में पत्थर हैं, कल उनमें से ज्यादातर लोग सबसे अधिक अपराध बोध में होंगे. ऐसी भूल कर चुके होंगे, जिसकी भरपाई नहीं होगी, जिसे याद कर ग्लानि ही होगी.

काश… मेहमान ट्रंप के लौटने तक सब्र रखती कांग्रेस!

लोकतंत्र में विपक्षी दल को सवाल पूछने का सिर्फ हक ही नहीं है, बल्कि उनकी जिम्मेदारी भी है. लेकिन जब अधीर रंजन अमेरिकी राष्ट्रपति को ‘मोगैंबो’ कहते हैं, तो कांग्रेस के सवाल पूछने की मंशा पर सवाल उठते हैं.

व्यंग्य: ‘राजनीतिक व्यवसाय’ के देसी घराने…लाभ-हानि के अपने-अपने पैमाने !

भारतीय राजनीति के व्यवसाय में निवेश करते हुए (वोट डालते हुए) इससे जुड़े जोखिमों को ध्यानपूर्वक समझ लें. निवेश का लॉक-इन पीरियड 5 साल का है. कोई जरूरी नहीं है कि राजनीतिक कंपनियां ‘रिटर्न’ के जो वादे कर रही हैं, वो सही हो.

OPINION : क्या ये अरविंद केजरीवाल के ‘राष्ट्रीय प्रस्थान’ का वक्त है!

शपथ के बाद केजरीवाल ने अपने संबोधन में तस्वीर बिल्कुल साफ कर दी. दिल्ली से एकदम नई राजनीति की शुरुआत का दम भरा और तिरंगे की शान से लहराने की जो शर्तें बताईं, वो समर्थकों के दिलों में उतर गईं.

व्यंग्य: कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है…भारतीय राजनीति की यही तकदीर है!

कितनी असीम संभावनाएं हैं इस तस्वीर में! अच्छी और स्वस्थ राजनीति की संभावनाएं. मतभेदों को भुलाने की संभावनाएं. आइंदा एक-दूसरे को गालियां न बकने की संभावनाएं. कुल मिलाकर बोलें तो राजनीति के कायाकल्प की संभानाएं इस तस्वीर में कूट-कूटकर भरी हैं, लेकिन जो दिखता है वो होता कहां है?

Opinion: ऐसे तो इनसे 2024 में भी ना हो पाएगा !

बीजेपी 2019 आमचुनाव से पहले भी कई राज्यों में हारी और उसके बाद भी. बावजूद इसके इन तमाम राज्यों में आमचुनाव के नतीजे बीजेपी के पक्ष में एकतरफा रहे.

Opinion : ये जो दिल्ली का चुनाव है… गोली के कद्रदान हैं पर अच्छी बोली के नहीं

प्रधानमंत्री कई-कई बार ‘सबका साथ सबका विकास’ की बात कर चुके हैं. लेकिन कुछ महानुभावों ने इस सीख पर अमल करने की कभी नहीं सोची. उनकी राजनीति इसकी इजाजत भी नहीं देती.

Opinion : क्या कांग्रेस ने अदनान सामी पर सनाउल्लाह से बात की?

बतौर विरोधी दल कांग्रेस को सवाल उठाने का हक है. लेकिन सामी पर उठाए गए सवाल के पीछे के कमजोर तर्कों ने सनाउल्लाह पर किए गए कांग्रेस के गंभीर सवाल को भी कमजोर कर दिया.

व्यंग्य: बजट के ‘हलवे’ से याद आया… #चेंजयोरमाइंडसेट #इंट्रोड्यूसन्यूग्रोथरेट

सरकार बगैर देर किए राष्ट्रवाद, हिंदुत्व और पाकिस्तान सरीखे कुछ नए सूचकांक जेनरेट करे. अगर राहुल बाबा कह सकते हैं कि गरीबी तो बस मन की अवस्था है, तो देशवासियों के दिमाग में उन्नत और उर्वर हो रहे राष्ट्रवाद को मन की एक बड़ी सकारात्मक अवस्था क्यों न माना जाए?

IND vs AUS : बेंगलुरू में बादशाहत का ‘विराट’ अहसास!

टीम इंडिया, ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम को 2-1 से कूटकर सीरीज जीत चुकी है. सवाल उठाने वालों की पलटियों पर नजर रखिए. साथ ही, एंजॉय कीजिए सामने दिख रही बादशाहत के उस अहसास को, जो बेहद सुखद है.

इंदिरा गांधी के अंडरवर्ल्ड डॉन से मिलने पर क्यों चौंक गया मीडिया?

करीम लाला अंरडवर्ल्ड डॉन था. तथ्य है कि एक जमाने में मुंबई और कई दूसरे इलाकों में सरकारी सिस्टम के समानान्तर उसका सिक्का (सत्ता भी कह सकते हैं) चलता था.

ओपिनियन : ‘शाहीन’ की उड़ान को नियंत्रित करने का वक्त!

किसी बात या फैसले के विरोध का अधिकार सबको है. लेकिन दूसरे लोगों की कीमत पर नहीं. शाहीन बाग के लोग विरोध जारी रख सकते हैं लेकिन तरीका बदला जा सकता है.

Opinion : दीवारों से खून के छींटे तो मिट जाएंगे, JNU की साख पर चस्पा दाग कैसे धुलेंगे?

5 जनवरी की शाम और रात को जो कुछ जेएनयू कैंपस में हुआ, उसकी बुनियाद 1 जनवरी को ही रख दी गई थी.