वोटर ध्यान दें…वोट में आपका निवेश राजनीतिक जोखिमों के अधीन है!

ध्यान रहे: मौजूदा लोकतंत्र में वोट का निवेश राजनीतिक जोखिमों के अधीन है. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) सिर पर है. लिहाजा अपने वोट के निवेश से पहले देश की सियासत से जुड़े कुछ जोखिमों को ध्यानपूर्वक पढ़ लें.

सुनो मिडिल क्लास वालों सुनो…दीपिका पादुकोण भी ‘माल’ मांगती है!

कमाल की बात है. सुना नहीं आपने? दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) भी ‘माल’ बोलती है. ‘माल’ की डिमांड करती है. अब से आपको ‘माल’ बोलते हुए झेंपने की जरूरत नहीं. खुलकर बोलिए. धड़ल्ले से बोलिए. ‘माल’ अब बेमिसाल है.

ब्लॉग: शुक्र है आईपीएल आया…कुछ तो ओरिजनल लाया

एनसीबी, ईडी, सीबीआई अपनी जगह सही, लेकिन इन सबसे आगे वही कहानी सही, जो मैंने कही. यही तो हो रहा था, यही तो हो रहा है. ये सब होगा तो आगे भी, लेकिन साथ में कुछ और होगा. अपना IPL होगा, कुछ तो ओरिजनल होगा.

कंगना का 100 प्रतिशत सच, रिया का 100 प्रतिशत झूठ…चलो भूल जाएं शहादत !

सुशांत की मौत के बाद मुंबई (Mumbai) की सड़कों पर जिस जंग का प्रपंच रचा गया, उसका हर फ्रेम कैमरे में कैद हो रहा है. हर किरदार बहुत ऊंची आवाज में बोलता है. देश कंगना के लिए आहत है…सीमा पर शहादत किसने देखी है !

डूबती जान को तलाशते कैमरे… बाढ़ के रियलिटी शो और बाढ़ के रीयल हालात में कितना फर्क जानिए

चंद आंकड़ों पर गौर करते हैं. 2019 में देश के 17 राज्यों ने बाढ़ की तबाही झेली. 1600 से ज्यादा लोग मारे गए. 2018 की बाढ़ से देश (Flood in India) को 95,736 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ.

सुशांत सिंह केस: एजेंडे अन्य हैं…तभी मुद्दे नगण्य, लंगड़ी खबरों से न्याय की उम्मीद!

आज CBI के साथ खड़ा होना मुफीद है. ये नए एजेंडे की कामयाबी की तरकीब है. दाभोलकर, आरुषि, व्यापमं आदि-आदि को भूल जाने में ही भलाई है. फिलहाल तो बस सुशांत (Sushant Singh) को न्याय दिलाने की लड़ाई है.

Coronavirus: महाराष्ट्र में एक दिन में 8493 नए मामले, 24 घंटों के अंदर मुंबई में 40 मौत

महाराष्ट्र (Maharashtra) में पिछले 24 घंटों में 11,391 मरीज ठीक हुए हैं. राज्य में अब तक 4,28,514 मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज किए जा चुके हैं. स्वास्थ्य विभाग (Health Department) की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र में रिकवरी रेट 70.9 प्रतिशत हो गया है.

7 गुण संपन्न धोनी: कल और आएंगे सुनने वाले…आपसे बेहतर नहीं ‘कहने वाले’

दिल को बिठा देने और धमनियों में रक्त प्रवाह को तेज करने वाले ऐसे न जाने कितने लम्हे क्रिकेट के ‘माही काल’ में हमने देखे. न जाने कितने ही मैचों में भारतीय फैंस की धड़कनें चढ़ती-उतरती रहीं. दिमाग आंकड़ों का कैलकुलेशन करता रहा. लेकिन दिल माही पर भरोसे के साथ...

Coronavirus: महाराष्ट्र में एक दिन में 11,813 नए मामले, पिछले 24 घंटों में मुंबई में 48 मौत

महाराष्ट्र (Maharashtra) में संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित शहरों में शामिल मुंबई (Mumbai) में 24 घंटों के अंदर 1,200 नए मामले सामने आए हैं और 48 मरीजों की मौत हुई है. कुल मरीजों की संख्या 1,27,556 तक पहुंच गई है.

राजस्थान की सियासत: ना निकम्मा, ना गद्दार…ये 3 तो मजबूरी के यार !

पायलट (Pilot) की वापसी से फौरी तौर पर अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) की सरकार सुरक्षित हो गई है. राजनीति के जादूगर होने की उनकी छवि और मजबूत हुई है.

सुशांत केस: रिया चक्रवर्ती-महाराष्ट्र सरकार की ‘संदिग्ध सुर साधना’, कैच करने लायक है बहुत कुछ

ऐसा लगता है कि पूरी पटकथा कहीं और लिखी जा रही है, शायद बहुत उच्च स्तर पर लिखी जा रही है. सामने दिखने वाले किरदार बस उसे जुबां दे रहे हैं, तभी सुर इतने मिल रहे हैं, लेकिन सुशांत केस में ये ‘सुर साधना’ चीजों को बेहद संदिग्ध बना रही...

सुशांत राजपूत केस: पर्दे के पीछे चल रहे पूरे खेल को काफी हद तक बेपर्दा कर सकते हैं ये चौंकाने वाले खुलासे

सुशांत-रिया केस से जुड़ी जो सबसे बड़ी और सनसनीखेज बात सामने आई है. वह है दिशा सालियान की मौत के बाद की पोस्टमार्टम रिपोर्ट. इसमें लिखे दो शब्दों ने अब तक की पूरी थ्योरी को बदल कर रख दिया.

Coronavirus: महाराष्ट्र में 24 घंटों में 10483 नए मामले, मुंबई में 45 की मौत

महाराष्ट्र (Maharashtra) में पिछले 24 घंटों में 10,906 मरीज ठीक हुए हैं. राज्य में कोरोनावायरस संक्रमण (Coronavirus) से सबसे ज्यादा प्रभावित शहरों में शामिल मुंबई (Mumbai) में 24 घंटों के अंदर 862 नए मामले सामने आए हैं.

Sushant Singh Suicide Case: जिसकी सत्ता, उसका ‘क्वारंटीन’… फिर तो CBI ही बचा रास्ता

जून के पहले ही पखवाड़े में तीन घटनाएं घटती हैं. 8 जून को रिया सुशांत का घर छोड़कर चली जाती है. 9 जून को दिशा सालियान कथित तौर पर खुदकुशी कर लेती है. फिर 14 जून को सुशांत कथित तौर पर सुसाइड कर लेते हैं.

पुणे: झाड़-फूंक के नाम पर मौलवी ने 50-55 वार कर उतारा मौत के घाट, ऐसे हुआ खुलासा

पप्पू पडवल के ऊपर भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं और पिछले कुछ सालों से उसने अपराध की दुनिया को छोड़ अपने पास मौजूद पैसे को ब्याज के रूप में देने की शुरुआत की थी. लेकिन उसके इसी ब्याज के धंधे के चलते उसकी हत्या हो गई.

मैं सरकार का ना प्रिंसिपल-ना रिमोट कंट्रोल, उन्हें भुगतना पड़ा मैं ही वापस आऊंगा…का खामियाजा- शरद पवार

शरद पवार (Sharad Pawar) ने कहा कि पिछले 5 साल में महाराष्ट्र (Maharashtra) में भी अगर देखा जाए तो लोग सरकार से खुश नहीं थे. जो शिवसेना (Shiv Sena) का वोटर है वह भी राज्य की बीजेपी सरकार से खुश नहीं था.

7 साल के बच्चे ने निगल लिया था सिक्का, 5 घंटे की सर्जरी के बाद KEM के डॉक्टर्स ने बचाई जान

KEM अस्पताल में बच्‍चे सफल सर्जरी तो हो गई है, लेकिन कोरोनावायरस के खतरे को देखते हुए बच्चे का Covid-19 टेस्ट भी किया गया है, जिसकी रिपोर्ट के आने का इंतजार है.

Lockdown: ठहरी हुई 1000 बसों पर सरपट दौड़ी सियासत

मजदूर पहले भी पैदल चल रहा था, अब भी चल रहा है. वैसे मजदूर और गरीब तो जीवन भर ‘चलने’ और ‘चलाए जाने’ के लिए ही होता है. कभी इस मालिक के इशारे पर, कभी उस मालिक के इशारे पर. तो कभी देश-प्रदेश के मालिकों के इशारे पर.

क्यों ठहर गई ‘चलते’ मजदूरों की जिंदगी?

कल तक यही मजदूर (Workers) वोटर (Voter) होने के नाते मां-बाप थे, आज ये केवल सरकारों के एहसानों की भूखी आबादी हैं. कल तक ये मजदूर अर्थव्यवस्था (Economy) की रीढ़ थे और आज इनकी जिम्मेदारियां उठाने में अर्थव्यवस्था की पीठ पर बोझ बढ़ने लगा.

पश्चिम बंगाल में Pandemic पॉलिटिक्स, न Covid-19 टेस्ट न इलाज… ममता दीदी जो कहें वही पास!

लोकसभा (Loksabha) में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन (AR Chowdhary) ने ममता सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. अधीर रंजन ने कहा है कि राज्य के सरकारी अस्पतालों को निर्देश दिया गया है कि कोरोना (Coronavirus) से होने वाली मौतों के मामलों में इसका जिक्र न करें.

NRC पीड़ितों का चुनाव… महज संयोग है या केजरीवाल का प्रयोग?

असम में NRC की लिस्ट में 19 लाख 6 हजार 657 लोगों का नाम नहीं था. दिल्ली के मुख्यमंत्री ने इन लाखों लोगों में से कुछ नामों को चुना. सही भी है. विधानसभा में चर्चा के दौरान केजरीवाल लाखों लोगों का नाम कैसे ले सकते थे? लेकिन केजरीवाल ने जिन...

Corona से नहीं साहब…डर इसके ‘साइड इफेक्ट्स’ से लगता है!

कोरोनावायरस (Coronavirus) ने पैसे वालों को चिंता में डाल दिया है. खासतौर से भ्रमणकारी भारतीयों को. विदेश भ्रमण के एडिक्ट ऐसे लोगों की तो रातों की नींद ही उड़ गई है.

मुस्लिम आरक्षण को लेकर सियासत गरमाई, BJP ने शिवसेना को दिया सीधा सरकार बनाने का ऑफर!

भाजपा नेता सुधीर मूनगंटिवार ने कहा की अगर शिवसेना का मुस्लिम आरक्षण पर एनसीपी कांग्रेस सरकार छोड़ती है तो इस विषय को लेकर भाजपा शिवसेना सरकार का साथ देगी.

आखिर कब दूर होगी बेसब्री…जस्टिस मुरलीधर पर ‘हिट विकेट’ हो गई कांग्रेस?

राजनीति में विरोध की इजाजत होती है. कांग्रेस को भी इस बात का अधिकार है. लेकिन विरोध के अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए राजनीतिक पार्टियों को संस्थाओं की गरिमा का भी ख्याल रखना होता है.

Delhi Violence: आपको दिल्ली की कसम…!अपने शहर को बदसूरत बनाने वालों का साथ कभी न दें

दिल्ली में आज जिन हाथों में पत्थर हैं, कल उनमें से ज्यादातर लोग सबसे अधिक अपराध बोध में होंगे. ऐसी भूल कर चुके होंगे, जिसकी भरपाई नहीं होगी, जिसे याद कर ग्लानि ही होगी.

काश… मेहमान ट्रंप के लौटने तक सब्र रखती कांग्रेस!

लोकतंत्र में विपक्षी दल को सवाल पूछने का सिर्फ हक ही नहीं है, बल्कि उनकी जिम्मेदारी भी है. लेकिन जब अधीर रंजन अमेरिकी राष्ट्रपति को ‘मोगैंबो’ कहते हैं, तो कांग्रेस के सवाल पूछने की मंशा पर सवाल उठते हैं.

व्यंग्य: ‘राजनीतिक व्यवसाय’ के देसी घराने…लाभ-हानि के अपने-अपने पैमाने !

भारतीय राजनीति के व्यवसाय में निवेश करते हुए (वोट डालते हुए) इससे जुड़े जोखिमों को ध्यानपूर्वक समझ लें. निवेश का लॉक-इन पीरियड 5 साल का है. कोई जरूरी नहीं है कि राजनीतिक कंपनियां ‘रिटर्न’ के जो वादे कर रही हैं, वो सही हो.

OPINION : क्या ये अरविंद केजरीवाल के ‘राष्ट्रीय प्रस्थान’ का वक्त है!

शपथ के बाद केजरीवाल ने अपने संबोधन में तस्वीर बिल्कुल साफ कर दी. दिल्ली से एकदम नई राजनीति की शुरुआत का दम भरा और तिरंगे की शान से लहराने की जो शर्तें बताईं, वो समर्थकों के दिलों में उतर गईं.

व्यंग्य: कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है…भारतीय राजनीति की यही तकदीर है!

कितनी असीम संभावनाएं हैं इस तस्वीर में! अच्छी और स्वस्थ राजनीति की संभावनाएं. मतभेदों को भुलाने की संभावनाएं. आइंदा एक-दूसरे को गालियां न बकने की संभावनाएं. कुल मिलाकर बोलें तो राजनीति के कायाकल्प की संभानाएं इस तस्वीर में कूट-कूटकर भरी हैं, लेकिन जो दिखता है वो होता कहां है?

Opinion: ऐसे तो इनसे 2024 में भी ना हो पाएगा !

बीजेपी 2019 आमचुनाव से पहले भी कई राज्यों में हारी और उसके बाद भी. बावजूद इसके इन तमाम राज्यों में आमचुनाव के नतीजे बीजेपी के पक्ष में एकतरफा रहे.