युद्ध में अयोध्या: राजीव गांधी और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के बीच जन्मभूमि का ताला खुलवाने की हुई थी डील

डील के मुताबिक राजीव गांधी शाहबानो मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटते हुए मुस्लिम महिला कानून में संशोधन करने पर राजी हो गए थे.

महज 40 मिनट में लागू हो गया था विवादित इमारत का ताला खोलने का अदालती आदेश

दूरदर्शन की टीम ताला खुलने की पूरी प्रक्रिया कवर करने के लिए वहां पहले से मौजूद थी. तब दूरदर्शन के अलावा देश भर में कोई और समाचार चैनल नहीं था.

बीजेपी के एजेंडे में ऐसे शामिल हुआ था राम जन्मभूमि का मुद्दा

कांग्रेस पर होने वाले चौतरफा हमलों में विश्व हिंदू परिषद यकायक सक्रिय हुई. बीजेपी को भी छींका दिख रहा था, जो जरा सी कारगर पहल से टूट सकता था.

युद्ध में अयोध्या: मन से मंदिर के हक में थे पीवी नरसिम्हा राव

6 दिसंबर की शाम उत्तर प्रदेश सरकार को बर्खास्त करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल की जो बैठक बुलाई गई, उसमें प्रधानमंत्री गुमसुम थे.

शाहबानो मामले का क्या है अयोध्या विवाद से कनेक्शन

शाहबानो से हुए नुकसान को धोने और बीजेपी की योजना को नाकाम बनाने के लिए कांग्रेस अयोध्या में ताला खुलवाने की योजना में जुटी थी.

आडवाणी की रथयात्रा ने बदली राममंदिर आंदोलन की दिशा, देश भर में पैदा हुआ राम लहर का उन्माद

रथ से एक रोज में 20 से ज्यादा सभाएं होती थीं. माहौल इस कदर बदला कि लोग आडवाणी को नहीं, रथ को भी पूज रहे थे.

92 के हुए लाल कृष्ण आडवाणी, पढ़ें रथयात्रा के दौरान कारसेवा को लेकर क्या बोले थे…

अपने वातानुकूलित रथ में बैठने से पहले आडवाणी ने कहा था कि 'मैं चाहता हूं कि अयोध्या में होने वाली कारसेवा में देश के मुस्लिम भी हिस्सा लें.'

अफसरों की बीवियों ने चिल्ला-चिल्लाकर पूछा था- निहत्थे कारसेवकों पर गोलियां क्यों चलीं?

ए.डी.एम. की बीवी ने कहा, “आप मजिस्ट्रेटों पर दबाव डालकर गोली चलाने के आदेश पर दस्तख्त क्यों करवाते हैं?"

200 किमी पैदल चल विवादित इमारत पर कोठारी बंधुओं ने फहराया था भगवा झंडा, पढ़ें पूरा किस्सा

चिता पर इन दो सगे कोठारी भाइयों की देह रखी थी और आकाश में ‘अमर हो’ की गूंज थी.

बाबरी मस्जिद विध्वंस से पहले तोड़े गए गए थे कई मंदिर, आखिर क्या थी वजह

जमीन के अधिग्रहण, समतलीकरण और उन मंदिरों की तोड़-फोड़ को लेकर पूरे देश में माहौल गरम होने लगा.

मीनाक्षीपुरम् में 400 परिवारों के इस्लाम कबूलने की घटना ने अयोध्या मसले में किया खाद-पानी का काम

हिंदू नेताओं ने मीनाक्षीपुरम् के धर्म-परिवर्तन की घटना को देश में बढ़ते इस्लामिक खतरे के रूप में देखा. हिंदू नेताओं में इसकी जवाबी प्रतिक्रिया हुई.

रथयात्रा ने बदल दी थी राममंदिर आंदोलन की दिशा, जिस रास्ते गुजरता वहां की मिट्टी सिर पर लगा लेते थे लोग

रथ से एक रोज में 20 से ज्यादा सभाएं होती थीं. माहौल इस कदर बदला कि लोग आडवाणी को नहीं, रथ को भी पूज रहे थे.

Diwali:एक नन्‍हा सा दीया और अधंकार के समूचे सागर को पीने की चुनौती

दीपावली भी एक ललित तत्व ही है. ललित प्रस्तुति. ललित संसर्ग. यह लालित्य अपने शास्त्रीय अंदाज में दीपावली पर्व के साथ आता है.

Ayodhya Case: वो भयावह मंजर, जब कारसेवकों पर चली थीं गोलियां

अंधाधुंध फायरिंग बिना मजिस्ट्रेट के आदेश के हुई. फायरिंग के बाद सी.आर.पी.एफ. ने जिला मजिस्ट्रेट राम शरण श्रीवास्तव से गोली चलाने के आदेश पर दस्तखत करवाए.

वो काला बंदर, जिसे देखकर जज ने सुनाया था रामजन्मभूमि का ताला खुलवाने का फैसला

आप यह सुन चौंक जाएंगे कि इस फैसले के पीछे भावना, आस्था और ईश्वर के रूप में एक बंदर भी था.

अयोध्या में रामजन्मभूमि का ताला खुलवाने के पीछे कांग्रेस थी या भाजपा? पढ़ें इनसाइड स्टोरी

उस वक्त फैजाबाद में दूरदर्शन का केंद्र नहीं था. कैमरा टीम लखनऊ से गई थी. लखनऊ से फैजाबाद जाने में तीन घंटे लगते हैं. यानी कैमरा टीम पहले से भेजी गई थी.

देवरहा बाबा के कहने पर राजीव गांधी ने करवाया था विवादित भूमि पर शिलान्यास

देवरहा बाबा अवतारी पुरुष थे. उनकी उम्र के बारे में कोई आकलन नहीं था. वे धरती पर नहीं रहते थे, हमेशा पानी में 12 फुट ऊंचे मचान में रहते थे.

विवादित ढांचा ढहाने के बाद किसने गायब कर दी रामलला की मूर्ति?

जो मूर्ति ध्वंस के दौरान गायब हुई वह रामलला की मूल मूर्ति नहीं थी. इस इमारत के बार-बार टूटते बनते यहां मूर्तियां भी बदलती रहीं.

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश से अयोध्या में बना था भीड़ का माहौल!

ढांचा गंवाने के बाद हाईकोर्ट भी सक्रिय हुआ. जिस फैसले का सबको इंतजार था, वह 11 दिसंबर, 1992 को हाईकोर्ट ने सुनाया. अगर यह फैसला 5 रोज पहले आ जाता तो ढांचा बचाया जा सकता था.

हाईकोर्ट का यह फैसला 5 दिन पहले आ जाता तो नहीं गिरती बाबरी मस्जिद!

राज्य सरकार और विहिप, दोनों अदालत से जल्दी फैसला चाह रहे थे. केंद्र सरकार की आरएसएस और बीजेपी से जो बातचीत चल रही थी, उसमें सबसे बड़ा मुद्दा यही था कि केंद्र सरकार अदालत से निवेदन करे कि वह 6 दिसंबर से पहले फैसला दे.

बाबरी ध्वंस की कहानी सुन रोने लगे थे दिवंगत प्रभाष जोशी

प्रभाष जोशी कारसेवा के लिए केंद्र सरकार और संघ के बीच जो लोग मध्यस्थता कर रहे थे, उनमें से एक थे.

जब आडवाणी-मुरली मनोहर जोशी के साथ हुई धक्का-मुक्की

ध्वंस की धूल और उसके गुबार ने हमारी गंगा-जमुनी तहजीब को ढक लिया था. छह दिसंबर नफरत और धार्मिक हिंसा के इतिहास से जुड़ गया.

बाबरी मस्जिद की टूटी ईंटों को प्रसाद के रूप में बांटा गया

विहिप के साधु-संत, विनय कटियार, उमा भारती, ऋतंभरा और आचार्य धर्मेंद्र मंच से लगातार कारसेवकों को ललकार रहे थे.