बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने सोमवार को आरजेडी सहित विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोगों को चुनाव के समय तरह-तरह के वादे करने और ठगने की आदत होती है, लेकिन उन्हें काम से कोई मतलब नहीं होता है, जबकि उन्होंने जो कहा, वह करके दिखाया है और वह आगे भी काम करेंगे. नीतीश कुमार ने यह बयान वैशाली के महुआ क्षेत्र में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए दिया.

साल 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में RJD प्रमुख लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने महुआ सीट से चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी. हालांकि, इस बार तेज प्रताप यादव अपनी पुरानी महुआ सीट छोड़कर समस्तीपुर की हसनपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. महुआ सीट से राज्य के पूर्व मंत्री इलियास हुसैन की बेटी आसमां परवीन जेडीयू उम्मीदवार हैं.

नीतीश ने महुआ में रैली को संबोधित करते हुए तेज प्रताप यादव का नाम लिये बगैर कहा कि कुछ लोगों की आदत कुछ न कुछ बोलते रहने, लोगों को ठगने और भ्रमित करने की होती है. उन्होंने कहा, “ऐसे लोग चुनाव के समय भ्रम फैलाने और समाज में विवाद पैदा करने का काम करते हैं.”

“हमने जो कहा, वो कर के दिखाया”

उन्होंने आगे कहा, “लेकिन हमने सभी क्षेत्र और समाज के हर तबके के लोगों के विकास के लिये काम किया है. कोई ऐसा नहीं कह सकता कि मेरे समाज के लोगों का खयाल नहीं रखा गया. हमने जो कहा, वह कर के दिखाया है, आगे और भी काम करेंगे.”

नीतीश ने बताया कि वैशाली में 315 करोड़ रुपये की लागत से बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय की स्थापना हो रही है. उन्होंने कहा, “हमारी रुचि सिर्फ काम करने में है, लोग देख लें कि पहले क्या हुआ और आज क्या स्थिति है.” उन्होंने कहा, “हम सिर्फ चुनाव के समय ही नहीं आते बल्कि लगातार क्षेत्र में आते रहे हैं, चारों तरफ आते रहे हैं. हम इस बात पर ध्यान देते हैं कि क्या काम हुआ है और क्या दिक्कत है.”

“हमारे जीवन में काम के अलावा और कुछ नहीं”

मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारे जीवन में काम के अलावा और कुछ नहीं है.” लालू प्रसाद पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के लिये पति, पत्नी, बेटा-बेटी ही परिवार है, जबकि उनके लिये पूरा बिहार परिवार है.

राजद के शासनकाल का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले न पढ़ाई की व्यवस्था थी, न इलाज का इंतजाम था और न लोगों के आने-जाने की सुविधा थी और शाम के बाद लोगों की घर से निकलने की हिम्मत नहीं होती थी. उन्होंने कहा कि पहले कितनी अपराध की घटनाएं होती थीं, कितने नरसंहार, हत्या की घटनाएं होती थीं, डाक्टरों एवं व्यापारियों को भागना पड़ा था.

“हमने कानून का राज कायम किया”

बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा, “हमने अपराध की घटनाओं को नियंत्रित करने का काम किया है. हमने कानून का राज कायम किया.” नीतीश ने अपनी सरकार के कामों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार आने पर स्कूलों की स्थापना की गई, महिलाओं को पंचायतों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण दिया गया.

नीतीश ने कहा कि उन्होंने न्याय के साथ विकास सुनिश्चित किया और अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े, अति पिछड़े, महादलितों समेत सभी को आगे बढ़ाने का काम किया, जिन्हें पहले कोई पूछता नहीं था. उन्होंने कहा कि अगर उन्हें आगे काम करने का मौका मिला तो वह हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचा देंगे, नई प्रौद्योगिकी को गांव-गांव तक पहुंचाएंगे और सभी युवक-युवतियों को इसका प्रशिक्षण दिलाएंगे. मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने हर घर तक बिजली पहुंचा दी है और साल 2005 में बिजली की खपत मात्र 500 मेगावाट थी, जो आज 6000 मेगावाट हो गई है.

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बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) में महागठबंधन के 150 से अधिक सीटें जीतने की उम्मीद जताते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला ने सोमवार को कहा कि सरकार बनने के बाद प्रदेश में हुए सभी ‘घोटालों’ की जांच कराकर न्याय सुनिश्चित किया जाएगा और विकास को बिहार की पहचान बनाया जाएगा. इसके साथ ही सुरजेवाला ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी के नेतृत्व पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता ‘ टायर्ड एवं रिटायर्ड ’ नेतृत्व को बदलना चाहती है. बिहार से संबंधित कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति के प्रमुख ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में यह भी कहा कि उनकी पार्टी का लक्ष्य बिहार में व्यवस्था परिवर्तन करना, राज्य के पहले मुख्यमंत्री श्री कृष्ण सिन्हा के दौर वाला शासन फिर वापस लाना और विकास को बिहार की पहचान बनाना है.

उन्होंने कहा, ‘‘बिहार, अब नीतीश कुमार एवं सुशील मोदी के ‘टायर्ड और रिटायर्ड’ नेतृत्व को बदलकर नयी ऊर्जा, नयी स्फूर्ति और नयी उमंग के साथ आगे बढ़ना चाहता है. बिहार चीख-चीखकर कह रहा है कि 15 साल के जुमलों और झूठे वादों से लोग थक चुके हैं. इसलिए महागठबंधन 150 से अधिक सीटें लेकर सरकार बनाएगा.’’

गठबंधन को मिलेगा बहुमत

चुनाव बाद महागठबंधन का स्वरूप बदलने और जरूरत पड़ने पर छोटे दलों की मदद लेने की संभावना से जुड़े सवाल पर सुरजेवाला ने कहा, ‘‘हमें 12 करोड़ बिहारवासियों पर विश्वास है, महागठबंधन दो तिहाई बहुमत की तरफ बढ़ रहा है और ऐसे में किसी और साथी की जरूरत नहीं होगी.’’ उन्होंने यह भी कहा कि सरकार बनने के बाद बिहार के विकास में सभी जनप्रतिनिधियों का सहयोग लिया जाएगा. यह पूछे जाने पर क्या महागठबंधन की सरकार कथित ‘सृजन घोटाले’ और भ्रष्टाचार के अन्य आरोपों की जांच कराएगी तो सुरजेवाला ने कहा, ‘‘घोटालों की जांच भी होगी और न्याय मिलेगा.’’

तेजस्वी के नेतृत्व पर भरोसा

यह पूछे जाने पर कि क्या मतदाता नीतीश के विकल्प के तौर पर तेजस्वी यादव में भरोसा जताएगा, कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘‘बिल्कुल! तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले कांग्रेस, RJD और वाम दलों के महागठबंधन की, जनता ने जाति और धर्म के बंधनों को तोड़कर मदद की है.’’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ‘‘हमारा वादा है कि जाति और धर्म की राजनीति खत्म कर विकास की राजनीति लाएंगे. जो जाति और धर्म के आधार पर बिहार को बांटते थे, वो सफल नहीं होंगे. अब बिहार की पहचान विकास से होगी.’’

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चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में सत्ता की दौड़ में राजग के आगे होने संबंधी सवाल पर सुरजेवाला ने कटाक्ष करते हुए दावा किया, ‘‘मोदी जी कभी भी टेलीविजन और चुनावी सर्वेक्षणों में पीछे नहीं दिखाई देते. याद कीजिए, छत्तीसगढ़ के चुनाव को, जब इन्हीं सर्वेक्षणों में कांग्रेस को 17 सीटें दिखाई जा रही थीं, लेकिन कांग्रेस को दो तिहाई सीटें मिलीं और भाजपा को 17-18 सीटें मिलीं. पिछले बिहार चुनाव में भी हमारे गठबंधन को पीछे दिखाया जा रहा था, लेकिन हमारे गठबंधन की बड़ी जीत हुई. इस बार भी बिहार, भाजपा को नकारेगा.’’

उन्होंने यह दावा भी किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सभाओं का जमीन पर कोई असर नहीं हो रहा है, और उनके पास बिहार को विशेष पैकेज एवं विशेष राज्य का दर्जा देने से जुड़े सवालों का जवाब नहीं है. सहयोगी RJD के मुकाबले जमीन पर कांग्रेस के कमजोर होने से जुड़ी धारणा को ‘भाजपाई आरोप’ करार देते हुए कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘‘RJD, कांग्रेस और वाम दल, हम सभी गठबंधन के महत्वपूर्ण हिस्से हैं. तेजस्वी की तरुणाई, कांग्रेस का तजुर्बा और वाम दलों की गरीबों-मजदूरों के लिए भावना- यह सब मिलकर यह गठबंधन बनता है. यह गठबंधन राज्य को श्री बाबू (श्री कृष्ण सिन्हा) के बिहार की तरह सर्वश्रेष्ठ शासित प्रदेश के लक्ष्य तक पहुंचाएगा.’’

क्या कांग्रेस का होगा उपमुख्यमंत्री

RJD के नेतृत्व में सरकार बनने की स्थिति में कांग्रेस की भूमिका और उप मुख्यमंत्री पद से संबंधित सवाल पर सुरजेवाला ने कहा, ‘‘ महागठबंधन की सरकार में कांग्रेस की भूमिका निर्णायक होगी. हमारा काम है कि युवाओं को 10 लाख नौकरियां मिलें, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिले, बच्चियों को मुफ्त शिक्षा मिले. हमारा लक्ष्य है कि सरकार बनने पर सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि व्यापक व्यवस्था परिवर्तन हो.’’

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गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव में RJD और वाम दलों के साथ तालमेल करके मैदान में उतरी कांग्रेस 70 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. RJD 144 और वाम दल 29 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं. विधानसभा की 243 सीटों के लिए तीन चरणों में 28 अक्टूबर, तीन नवंबर और सात नवंबर को मतदान होगा और मतगणना 10 नवंबर को होगी.

बिहार विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण की 94 सीटों के लिए उम्मीदवार मैदान में हैं. इन 94 सीटों में पारू सीट भी एक है जहां सीधी टक्कर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस के बीच में है. बीजेपी ने पारू से एक बार फिर अशोक कुमार सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है जबकि कांग्रेस ने अनुनय सिन्हा को मैदान में उतारा है. अनुनय सिन्हा बिहार चुनाव के दूसरे फेज में तीसरे सबसे अमीर उम्मीदवार हैं. सिन्हा के पास 46.1 करोड़ रुपये की संपत्ति है.

पिछले विधानसभा चुनाव में पारू सीट पर बीजेपी प्रत्याशी अशोक कुमार सिंह ने जीत दर्ज की थी. अशोक सिंह को 80445 वोट मिले थे और उन्होंने आरजेडी प्रत्याशी शंकर प्रसाद को 13539 वोटों से हराया था. शंकर प्रसाद को कुल 66906 वोट मिले थे. 2015 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर कुल 13 प्रत्याशी मैदान में थे. इस बार पारू सीट से महागठबंधन उम्मीदवार के तौर पर कांग्रेस प्रत्याशी अनुनय सिन्हा चुनाव लड़ रहे हैं.

पारू विधानसभा क्षेत्र से महागठबंधन के प्रत्याशी अनुनय सिन्हा ने प्रचार अभियान तेज कर दिया है. उन्हें अपने इलाके में लोगों का समर्थन मिल रहा है. अनुनय सिन्हा का परिवार पूर्व में राजनीति में रहा है. उनके पिता स्व. वीरेंद्र कुमार सिंह और मां पूर्व केंद्रीय मंत्री उषा सिन्हा लंबे समय से इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. वे विधानसभा इलाके में कांग्रेस को जिताने की अपील करते देखे जा रहे हैं.

पारू सीट पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधा टक्कर है. इस सीट पर पिछले तीन बार से बीजेपी के विधायक अशोक सिंह हैं जिनका सामना कांग्रेस प्रत्याशी अनुनय सिन्हा से होने जा रहा है. अनुनय सिन्हा का कहना है कि कई पुश्तों से उनका परिवार पारू के लोगों की सेवा की है, इसलिए उन्हें भी विधानसभा क्षेत्र के लोगों का आशीर्वाद जरूर मिलेगा. अनुनय सिन्हा के पिता वीरेंद्र सिंह 1969 और 1972 में कांग्रेस के टिकट पर जबकि 1990 में निर्दलीय विधायक चुने गए थे. 1985 में उनकी मां उषा सिन्हा लोकदल के टिकट पर विधायक चुनी गई थीं. बाद में वे मंत्री भी बनीं.

इस चुनाव में यह देखने वाली बात होगी कि अशोक सिंह चौथी बार विधायक बनते हैं या अनुनय सिन्हा को विधानसभा पहुंचने का मौका मिलेगा. पिछले चुनाव में आरजेडी के उम्मीदवार रहे शंकर यादव इस बार निर्दलीय मैदान में हैं. यादव का यह दूसरा चुनाव है. पिछली बार वे कांटे की लड़ाई में बीजेपी के अशोक सिंह से चुनाव हार गए थे. कांग्रेस दस साल बाद पारू के चुनाव मैदान में लौटी है. इस बार कांग्रेस के उम्मीदवार जैतपुर एस्टेट के अनुनय सिन्हा हैं. अनुनय सिन्हा राजनीतिक परिवार से आते हैं. (फोटो-https://www.facebook.com/anunaysinhacongress)

 

बिहार में दूसरे चरण के उम्मीदवारों के नाम का ऐलान हो गया है. दूसरे चरण के चुनाव में कांग्रेस के संजीव सिंह अगर सबसे अमीर उम्मीदवार हैं तो दूसरे स्थान पर आरजेडी के प्रत्याशी देव कुमार चौरसिया हैं जो हाजीपुर से चुनाव मैदान में हैं. उनके पास 49.3 करोड़ रुपये की संपत्ति है. चुनाव से ठीक पहले चौरसिया ने जेडीयू छोड़कर आरजेडी का दामन थाम लिया और आरजेडी ने उन्हें हाजीपुर से चुनाव लड़ाने का फैसला किया.

देव कुमार चौरसिया कभी नीतीश कुमार और जनता दल यूनाइटेड (जेएनयू) के खास थे, लेकिन चुनाव से ठीक पहले आरजेडी में चले गए. देव कुमार चौरसिया समता पार्टी के जमाने से नीतीश कुमार के साथ थे. बाद में उन्होंने नीतीश कुमार की नीतियों को लेकर विरोध जताया और जेडीयू छोड़ दी. हाजीपुर के दिग्गज नेता देव कुमार चौरसिया जेडीयू के पूर्व प्रदेश महासचिव भी रह चुके हैं. चौरसिया इस बार तीर छाप नहीं बल्कि लालटेन निशान पर चुनाव लड़ेंगे.

हाजीपुर विधानसभा सीट बीजेपी का गढ़ कही जाती है. इस बार भी बीजेपी के सीटिंग विधायक अवधेश सिंह चुनाव मैदान में हैं. वहीं आरजेडी ने उनके सामने देव कुमार चौरसिया को उतारा है. बीजेपी प्रत्याशी को इस विधानसभा से अपनी राजनीतिक विरासत बचानी है, तो वहीं आरजेडी प्रत्याशी किसी भी कीमत पर ये सीट बीजेपी से छीनना चाहते हैं. दोनों नेताओं ने चुनाव प्रचार तेज रखा है और वोटर्स तक ज्यादा से ज्यादा पहुंच बना रहे हैं.

देव कुमार चौरसिया ने 14 अक्टूबर 2020 को हाजीपुर विधानसभा क्षेत्र से अपना नामांकन दाखिल किया जिसे चुनाव आयोग ने स्वीकार कर लिया. देव कुमार चौरसिया की ओर से चुनाव आयोग को दिए गए शपथ पत्र के अनुसार उन पर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है और उनकी कुल संपत्ति लगभग 49 करोड़ है. वहीं देव चौरसिया पर 50 लाख से ज़्यादा का कर्ज है. देव कुमार चौरसिया हाजीपुर शहर और हाजीपुर विधानसभा क्षेत्र के जाने माने नेता और उद्योगपति हैं.

देव कुमार चौरसिया अभी हाल में जेडीयू छोड़कर आरजेडी में आए जिन्हें पार्टी नेता और गठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने पार्टी की सदस्यता दिलाई. तेजस्वी यादव वैशाली जिले के राघोपुर से चुनाव लड़ रहे हैं और देव चौरसिया हाजीपुर सीट से. जेडीयू छोड़ने से पहले चौरसिया ने जेडीयू अध्यक्ष को भेजे अपने इस्तीफे में कहा था कि वे समता पार्टी और उसके बाद पार्टी के जेडीयू के विलय के समय से ही वे जिलाध्यक्ष और प्रदेश महासचिव के पद पर अपनी जिम्मेवारी का निर्वहन करते आ रहे हैं, लेकिन पार्टी उन्हें लगातार उपेक्षित करती रही.

 

बिहार का चुनाव हो और जाति का कार्ड न खेला जाए यह नामुमकिन है. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) के पहले चरण के मतदान से पहले राज्य में जातिगत कार्ड उछालनी शुरु हो गया है. तेजस्वी यादव ने रोहतास में चुनावी सभा में राजपूतों पर टिप्पणी की जिसके बाद बिहार की राजनीति गरमा गई है. डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने आरजेडी पर निशाना साधा. सुशील मोदी कोरोना पॉजिटिव हैं और अस्पताल में भर्ती है. मोदी ने अस्पताल से ही एक वीडियो ट्वीट कर आरजेडी का विरोध किया.

रोहतास की सभा में तेजस्वी यादव ने कहा कि जब लालू यादव का राज था तो गरीब सीना तान कर राजपूतों के सामने चलते थे. तेजस्वी के इस बयान के बाद राजनीतिक समीकरण बदलने के आसार हैं. सुशील मोदी ने तेजस्वी के इस बयान पर कहा कि आरजेडी की राजनीति हमेशा से एक जाति विशेष के लिए रही है. जब मोदी सरकार ने गरीब सवर्णों को आरक्षण दिया उस वक्त आरजेडी ने इसका विरोध किया.

क्या बोले मोदी

सुशील मोदी ने वीडियो जारी कर कहा, ”बिहार के रोहतास में आज नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राजपूत लोगों को लेकर जो आपत्तिजनक टिप्पणी की है मैं उसकी निंदा करता हूं. यह वही RJD हे जिसने रघुवंश बाबू को अपमानित करने का काम किया. यह वहीं आरजेडी है जिसने, जब नरेंद्र मोदी सरकार ने गरीब सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला किया तो सबसे पहले उसका विरोध किया. इनकी राजनीति भूमिहार कायस्थ और सवर्णों के खिलाफ रही है.”

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उन्होंने आगे कहा ”आज जिस तरह उन्होंने राजपूतों का अपमान किया है उसे बिहार की जनता माफ नहीं करेगी. आरजेडी ने वो काम किया जिसके कारण रघुवंश बाबू ने पार्टी छोड़ी. आज उनके बेटे आरजेडी नहीं बल्कि जेडीयू में हैं. राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश जी को भी इन्होंने अपमानित किया. आरजेडी की पूरी राजनीति बैकवर्ड-फॉरवर्ड की रही है. ये लोग हमेशा ऊंची जातियों को गाली देकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकते रहे हैं.”

‘भूरा बाल साफ करो’ का नारा

बता दें कि तेजस्वी यादव के इस बयान को लालू यादव के ‘भूरा बाल साफ करो’ वाले अभियान से जोड़ा जा रहा है. लालू के इस नारे का मतलब था, भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण और लाला को खत्म करो. उस वक्त उनके इस बयान के बाद पूरा सवर्ण समाज लालू के खिलाफ हो गया था. हालांकि तेजस्वी जल्द ही समझ गए कि उनके इस बयान से नुकसान हो सकता है. इसीलिए उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि अगर हमारी सरकार आएगी तो हम सभी को साथ लेकर चलेंगे.

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बिहार में सभी राजनीतिक दलों ने दूसरे चरण की सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं. दूसरे चरण में 94 विधानसभा क्षेत्रों में तीन नवंबर को मतदान है. राज्य की वैशाली विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर संजीव सिंह महागठबंधन के प्रत्याशी हैं. संजीव सिंह दूसरे चरण के सबसे अमीर उम्मीदवार हैं जिनके पास 56.6 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी है.

वैशाली से वीणा शाही का नाम अंतिम समय में कट गया और ई. पहले उनके नाम की चर्चा थी लेकिन संजीव सिंह के नाम पर फैसला हुआ. वीणा शाही का नाम कटने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में रोष देखा गया. कार्यकर्ताओं की मांग थी कि किसी लोकल प्रत्याशी को टिकट दिया जाए. संजीव सिंह मुजफ्फरपुर के रहने वाले हैं और उन्हें ही पार्टी ने इस बार वैशाली से उम्मीदवार बनाया है.

कांग्रेस प्रत्याशी संजीव सिंह पर कई धाराओं में केस दर्ज है. अभी मामला कोर्ट में है. वैशाली के कांग्रेस प्रत्याशी संजीव सिंह ने नामांकन के समय दिए हलफनामें में भी इस केस का जिक्र किया है. वैशाली से कांग्रेस के टिकट पर महागठबंधन के प्रत्याशी संजीव सिंह हैं जो दूसरे चरण के सबसे अमीर उम्मीदवारों में एक हैं. वैशाली सीट पर कुल वोटर 3.11 लाख हैं जिसमे पुरुष वोटर 1.68 लाख हैं, वहीं महिला वोटर्स की संख्या 1.43 लाख है. यादव, मुस्लिम और कुर्मी वोटर भी यहां निर्णायक भूमिका में हैं.

विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण की 94 सीटों पर बाहुबल के साथ-साथ धनबल का भी बोलबाला देखा जा रहा है. आंकड़े देखें तो 10 प्रमुख दलों के 59 प्रतिशत उम्मीदवार करोड़पति हैं. इसमें राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) पहले नंबर पर है. इसके 45 प्रत्याशी करोड़पति हैं.

दूसरे चरण की 94 सीटों पर 3 नवंबर को मतदान है. दूसरे चरण के चुनाव में 1464 उम्मीदवार हैं, इनमें 10 प्रमुख दलों के 437 प्रत्याशी हैं. दूसरे चरण के चुनाव में संजीव सिंह अगर सबसे अमीर उम्मीदवार हैं तो दूसरे स्थान पर आरजेडी के प्रत्याशी देव कुमार चौरसिया हैं जो हाजीपुर से चुनाव मैदान में हैं. उनके पास 49.3 करोड़ रुपये की संपत्ति है. चुनाव से ठीक पहले चौरसिया ने जेडीयू छोड़कर आरजेडी का दामन थाम लिया और आरजेडी ने उन्हें हाजीपुर से चुनाव लड़ाने का फैसला किया.

 

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) के पास आते ही नेताओं को देश के मुद्दे याद आने लगे हैं. आरजेडी नेता (RJD Leader) तेजस्वी यादव ने महंगाई (Inflation) , बेरोजगारी के मुद्दे पर केंद्र और बिहार की नीतीश सरकार पर करारा हमला बोला है. तेजस्वी यादव ने बिहार में बेरोजगारी (Unemployment) , अच्छी स्वास्थ्य सुविधा और महंगाई बढ़ने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया.

प्याज (Onion) की बढ़ती कीमतों (Price Hike) को लेकर तेजस्वी यादव ने बीजेपी (BJP) पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग प्याज के दाम 50-60 रुपए होते ही बोलना शुरू कर देते थे, वो आज चुप (Silent) क्यों हैं.

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प्याज की बढ़ती कीमतों पर नेता चुप क्यों-तेजस्वी

तेजस्वी ने कहा कि आज प्याज की कीमतें आसमान छू रही हैं, प्याज 100 रुपए के पास पहुंचने वाला है, लेकिन अब बीजेपी नेता कुछ भी नहीं बोल रहे हैं. दूसरी सरकारों में वह प्याज की माला पहनकर विरोध जताते थे, लेकिन आज वह बिल्कुल चुप हैं.

वहीं तेजस्वी यादव ने कहा कि देश में महंगाई देश में सबसे बड़ा मुद्दा है, किसान तबाह हो रहे हैं, महंगाई की वजह से छोटे व्यापारी खत्म होते जा रहे हैं, गरीबी बढ़ती जा रही है. देश में बेरोजगारी, भुखमरी फैल रही है. बिहार के युवाओं के पास काम नहीं है, जिसकी वजह देश की जीडीपी लगातार गिर रही है, तेजस्वी ने कहा कि आज देश बहुत बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा है.

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‘पलायन करने को मजबूर बिहार की जनता’

तेजस्वी यादव ने मौजूदा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि देश का युवा आज बेरोजगार है, जिसकी वजह से बिहार गिरीबी की गर्त में लगातार गिर रहा है, लोग अच्छी शिक्षा, नौकरी और चिकित्सा सुविधआओं के लिए बिहार से पलायन करने को मजबूर हैं.

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की अध्‍यक्ष और पूर्व मुख्‍यमंत्री मायावती (Mayawati) ने सोमवार को बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) के मद्देनजर मतदाताओं (Voters) से विरोधियों के हथकंडों और षड्यंत्रों से सावधान रहने तथा बसपा, आरएलएसपी (RLSP) के गठबंधन के लिए वोट करने की अपील की.

बसपा अध्‍यक्ष ने सोमवार को ट्वीट किया, ‘बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान की तैयारी आज चुनाव प्रचार की समाप्ति के साथ ही शुरू हो गई है अत: सभी से अपील है कि वे विरोधियों के सभी प्रकार के हथकंडों और षड्यंत्रों के मद्देनजर सावधानी बरतते हुए बसपा और आरएलएसपी आदि के गठबंधन को ही अपना वोट देकर सफल बनाएं’.

उल्‍लेखनीय है कि बिहार विधानसभा चुनाव में बसपा ने राष्‍ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) समेत कई दलों से गठबंधन करके तीसरा मोर्चा बनाया है. पिछले माह रालोसपा अध्‍यक्ष उपेंद्र कुशवाहा समेत कई नेताओं ने इस गठबंधन का ऐलान किया था.

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बिहार में जनअधिकार पार्टी के अध्यक्ष पप्पू यादव का कहना है कि चुनाव प्रचार से जो स्थिति दिख रही है, उससे साफ है कि बिहार में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति होगी. पप्पू यादव ने ‘टीवी9 भारतवर्ष’ से बातचीत में कहा कि बिहार में किसी एक पार्टी की सरकार नहीं बनती दिखती. पप्पू यादव का कहना है कि इस बार बिहार चुनाव में विपक्ष भी गायब है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोई काम नहीं किया है. पप्पू यादव ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर भी निशाना साधा.

पप्पू यादव ने कोरोना वायरस को लेकर अन्य सभी पार्टियों पर हमला बोला और कहा कि खुद मुख्यमंत्री लोगों को राहत देने के नाम पर ट्वीट करते हैं लेकिन उन्होंने बीमारी से जूझते लोगों के बीच सुबह-शाम खाना पहुंचाया. पप्पू यादव ने कहा कि कोरोना के बीच मुख्यमंत्री खुद 14 दिन बाद घर से निकले और डिप्टी सीएम सुशील मोदी पत्नी के साथ घर से भाग गए. बिहार चुनाव में कौन से मुद्दे छाए रहेंगे? इसके जवाब में पप्पू यादव ने कहा कि मजदूरों का पलायन और उन पर लाठीचार्ज ही चुनाव के असली मुद्दे होंगे. मजदूरों को किसने बचाया, बाढ़ में सरकार कहां थी और बिहार में यूथ की स्थिति कैसी है, ये सभी मुद्दे हैं जिन पर चुनाव केंद्रित होगा.

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मुख्यमंत्री के खिलाफ क्या एंटी-इनकंबेंसी है या हो सकती है? ऐसी स्थिति में क्या बीजेपी बिहार में एक मजबूत पार्टी के तौर पर उभरेगी? इसके जवाब में पप्पू यादव ने कहा कि बीजेपी विचित्र पार्टी है और उनसे नीतीश कुमार को ‘मारने’ में कोई कसर बाकी नहीं रखा. बीजेपी का बड़ा साठगांठ एक बड़ी विपक्षी पार्टी के साथ लगभग तय है. चुनाव के बाद बीजेपी कहीं और दिखेगी, यह लगभग तय है. नीतीश कुमार को पता है कि बीजेपी उनका ‘इलाज’ कर चुकी है और इसका स्क्रिप्ट दिल्ली में लिखा जा चुका है. पप्पू यादव ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार आए तो उन्होंने रामविलास पासवान और रघुवंश प्रसाद को श्रद्धांजलि दी और उनकी चर्चा की लेकिन एक बार भी चिराग पासवान का नाम नहीं लिया. इससे संकेत साफ है क्योंकि चिराग पासवान के लिए नीतीश कुमार सबसे बुरे हैं. ऐसे में चिराग के लिए नीतीश बुरे हैं तो बीजेपी कैसे अच्छी हो सकती है. पप्पू यादव ने कहा कि बिहार में हंग असेंबली (त्रिशंकु विधानसभा) की स्थिति बनती दिख रही है.

बिहार चुनाव में इस बार असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी भी ताल ठोक रही है. उनका असर बिहार के मुसलमान वोटर्स पर क्या पड़ेगा? इसके जवाब में पप्पू यादव ने कहा, ओवैसी के आने से क्या होगा? एनआरसी में सिर्फ पप्पू यादव दिखे, पूरा लालू परिवार गायब रहा. नीतीश कुमार से लेकर पूरा मुलायम परिवार गायब रहा. एनआरसी के विरोध में ओवैसी भी नहीं आए. न तो बाढ़ के दौरान वे दिखे. ओवैसी बिहार के बाहर से पैठ नहीं बना सकते, इसमें बिहार का ही कोई बेटा आगे आएगा. एनआरसी पर जहां-जहां दंगे हुए वहां पप्पू यादव दिखे, ओवैसी नहीं. पप्पू यादव ने कहा, मुझे तो लगता है कि इसकी भी पटकथा (बिहार में चुनाव लड़ने की) दिल्ली में लिखी गई. ओवैसी का जुमला अच्छा लगता है क्योंकि उनको अपनी मार्केटिंग करनी है. बीजेपी को ओवैसी के जरिये जिंदा रहना है. ये दोनों एक दूसरे के पूरक हैं आरएसएस और ओवैसी.

पप्पू यादव क्या राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेतृत्व में जा सकते हैं? इसके जवाब में पप्पू यादव ने कहा कि ऐसा कोई सवाल नहीं उठता. कांग्रेस यदि सोचे तब कोई बात बन सकती है. महागठबंधन से आरजेडी अपना नेतृत्व हटाए और कांग्रेस नेतृत्व संभाले तब कुछ बात हो. पप्पू यादव ने बिहार के लोगों से अपील की कि जिस तरह अन्य पार्टियों को 30 साल दिया, उन्हें कम से कम 3 वर्ष दिया जाना चाहिए.

 

बेगूसराय का रचियाही गांव जहां बूथ लूटने की घटना आजाद भारत में सबसे पहले घटी थी. यहां पर साल 1957 में कम्युनिस्ट और कांग्रेस के बीच जोरदार संघर्ष था और इसी कड़ी में रचियाही गांव में बूथ पर कब्जा जमाने की घटना घटी थी. साल 1957 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी से सरजू प्रसाद सिंह खड़े थे, वहीं कम्युनिस्ट पार्टी से इस इलाके के बेहद लोकप्रिय नेता चंद्रशेखर सिंह मैदान में डटे थे. उन दिनों कम्युनिस्ट पार्टी की लोकप्रियता काफी जोरों से बढ़ रही थी. वहीं राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस भी बेहद लोकप्रिय पार्टी थी.

कैसे 1957 में बूथ लूटने की घटना को दिया गया अंजाम
रचियाही गांव के 80 साल के बुजुर्ग अर्जुन राय उन दिनों को याद कर कहते हैं कि बूथ लूटने वालों ने बड़े ही योजनाबद्ध तरीके से बूथ लूटने की घटना को अंजाम दिया था. बूथ से दो किलोमीटर की दूरी पर पास के गांव से मतदान के लिए आ रहे लोगों पर हमला किया गया था. रचियाही गांव के बूथ पर तैनात पुलिस उस हमले को शांत कराने जैसे ही कुछ दूर गई, तभी रचियाही गांव के बूथ पर वोट लूटने के काम को अंजाम दिया गया. दरअसल गांव में गहराई से पड़ताल करने पर मालूम पड़ता है कि बूथ लूटने की घटना को अंजाम कांग्रेस समर्थित लोगों के द्वारा दिया गया था और जिस जगह पर ये घटना घटी थी, उस जगह पर आजादी से पहले मालगुजारी वसूलने का काम किया जाता था. अंग्रेजों के समय में रचियाही गांव का वो जगह कचहरी के रूप में क्रियाशील था.

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अंग्रेजों के देश छोड़ने के बाद रचियाही गांव के उस जगह पर मतदान केंद्र बनाया जाता था जहां आसपास के गांव के लोग मतदान करने बैलगाड़ियों पर सवार होकर आया करते थे. रचियाही गांव का वो जगह अब खंडहर के रूप में इतिहास की गवाही देता है जिसे गांव के लोग एक काले अध्याय के तौर पर देखते हैं.

आधुनिक सुविधा से संपन्न है गांव
रचियाही गांव का ही नहीं बल्कि एक पंचायत का भी नाम है जहां मतदाताओं की संख्या तकरीबन 6500 बताई जाती है. इस गांव की पहचान भले ही एक अजीबोगरीब घटना की वजह से मीडिया की सुर्खियां बना हो लेकिन वर्तमान में यह गांव विकास के मार्ग पर काफी आगे बढ़ चुका है. गांव के आस पास आईओसीएल (INDIAN OIL CORPORATION LIMITED), थर्मल पावर स्टेशन होने की वजह से लोगों को रोजगार भरपूर मात्रा में मिला हुआ है. यहां ब्लॉक के साथ साथ बैंक और प्राथमिक स्वास्थ केंद्र भी हैं जिस वजह से गांव की संपन्नता का अहसास गांव पहुंचते ही हो जाता है. यहां चारों तरफ दो और तीन मंजिला मकान गांव की सुविधा संपन्न स्थिती को बखूबी बयां करता है. ज़ाहिर है ऐसे गांव में संपन्नता है तो अब शिक्षा की भी कोई कमी नहीं है. गांव के रोहित कुमार जो इंजीनियरिंग पास हैं, वे कहते हैं कि रचियाही गांव के लोग अपने इतिहास को झुठला तो नहीं सकते लेकिन उस समय भी बूथ लूटने में गांव के लोगों का हाथ नहीं था. रचियाही गांव के लोग शिक्षित हैं और लोकतंत्र का सम्मान करते हैं, इसलिए यहां अब मतदान पूरी तरह से शांतिप्रिय तरीके से संपन्न होता है.

 

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) के पहले चरण के मतदान से पहले आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है. लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) अध्यक्ष चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने राज्य में शराबबंदी को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है. चिराग ने सवाल किया कि आखिर शराबबंदी की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही है? क्या शराब की स्मगलिंग बंद हो गई है?

चिराग पासवान ने कहा, “राज्य में शराब हर किसी को मिल रही है. सरकार और प्रशासन की इसमें मिलीभगत है. बिहार सरकार में ऐसा कोई भी मंत्री नहीं है जिसे इस बारे में जानकारी न हो. अगर आप इसकी समीक्षा नहीं करना चाहते हैं तो इसका मतलब है कि आप खुद इसमें मिले हुए हैं.”

Bihar Election 2020: आज थमेगा पहले चरण का चुनाव प्रचार, नड्डा-नीतीश-तेजस्वी करेंगे रैलियां

‘मुख्यमंत्री को लड़ना होगा चुनाव’

लोजपा अध्यक्ष ने कहा, “हर किसी को पता है कि धन कहां जा रहा है. मुख्यमंत्री को चुनाव लड़ना होगा और भी कई सारे चीजें करनी होंगी. यह सब जांच का विषय है. हमारी सरकार की ओर से इसकी जांच की जाएगी कि शराब स्मगलिंग का सारा धन कहां पर है.”

‘घोटाले में शामिल हैं नीतीश कुमार’

चिराग पासवान ने कहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी घोटाले में शामिल हैं और अगर वे दोषी साबित हुए तो चुनाव के बाद उन्हें जेल भेजा जाएगा.

पासवान ने कहा कि ये कैसे संभव है कि मुख्यमंत्री को बड़े पैमाने पर घोटालों और भ्रष्टाचार का पता नहीं है? वह भी इसमें शामिल हैं, अगर नहीं हैं तो जांच में साफ हो जाएगा, लेकिन बिहार की जनता और मुझे विश्वास है कि नीतीश कुमार घोटालों में शामिल हैं, वे भ्रष्ट हैं.

‘शराबबंदी के नाम पर बिहारियों को बनाया जा रहा तस्कर’

गौरतलब है कि इससे पहले चिराग ने कहा था कि शराबबंदी के नाम पर बिहारियों को तस्कर बनाया जा रहा है. बिहार की माताएं-बहनें अपनों को तस्कर बनते नहीं देखना चाहतीं.

पासवान ने ट्वीट में करके कहा, “शराबबंदी के नाम पर बिहारियों को तस्कर बनाया जा रहा है. बिहार की माताएं-बहनें अपनों को तस्कर बनते नहीं देखना चाहती. बिहार के मुख्यमंत्री के संग सभी मंत्रियों को पता है कि बिहारी रोजगार के अभाव में शराब तस्करी के तरफ बढ़ रहा है, लेकिन सब के सब को मानो सांप सूंघ लिया है.”

28 अक्टूबर को 71 विधानसभा सीटों पर मतदान

बता दें कि 28 अक्टूबर को 71 विधानसभा सीटों पर मतदान होना है. पहले चरण में 1,066 प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतरे हैं और दो करोड़ 14 लाख छह हजार 96 मतदाता इनकी किस्मत का फैसला करेंगे. पहले चरण में पटना जिले की पांच, भागलपुर की दो, भभुआ, रोहतास, बक्सर, भोजपुर, औरंगाबाद, नवादा, गया, जमुई, बांका, जहानाबाद, अरवल, नवादा व शेखपुरा जिलों में मतदान होगा.

Bihar election 2020: चुनाव प्रचार के दौरान क्रिकेट खेलते नजर आए तेजप्रताप

बिहार विधानसभा (Bihar Assembly Election) के पहले चरण (First Phase) के चुनाव प्रचार का सोमवार को आखिरी दिन है. तमाम राजनीतिक दल आज कई सारी रैलियां करने वाले हैं. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव समेत कई बड़े नेता चुनावी रैलियों को संबोधित करेंगे. ऐसे में बिहार में आज का दिन भी काफी गहमा-गहमी से भरपूर होने वाला है. कहा जा रहा है कि जनता को लुभाने के लिए नेता आज पूरा जोर लगा देंगे.

जेपी नड्डा सोमवार को दो रैलियां करेंगे. दोपहर 12 बजे औरंगाबाद में चुनावी जनसभा संबोधित करने के बाद नड्डा 3 बजकर 33 मिनट पर पूर्णिया में चुनाव प्रचार करेंगे. वहीं, बिहार नीतीश कुमार की आज तीन रैलियां हैं. नीतीश कुमार मुजफ्फरपुर, महुआ और मनहर (वैशाली) में चुनाव प्रचार करेंगे.

Bihar election 2020: चुनाव प्रचार के दौरान क्रिकेट खेलते नजर आए तेजप्रताप

आज कई बीजेपी नेताओं की चुनावी रैली

नड्डा के अलावा बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव और अभिनेता-सांसद रवि किशन की चार चुनावी रैलियां होने वाली हैं. भूपेंद्र यादव और रवि किशन आज राजौली, नवीनगर, दिनारा और बक्सर में चुनावी रैली को संबोधित करेंगे. इनके अलावा केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और संजय जायसवाल की तीन रैलियां होनी हैं. बीजेपी के ये दोनों नेता वरसालीगंज, बोधगया और शाहपुर में चुनावी जनसभा को संबोधित करेंगे.

तेजस्वी करेंगे ताबड़तोड़ रैलियां

राजद नेता तेजस्वी यादव आज भागलपुर, खगडिया, वैशाली और बेगुसराय में रैली करेंगे. केवल भागलपुर में ही तेजस्वी की 5 चुनावी रैलियां हैं. तेजस्वी खगडिया में 4 और 4 अन्य जगहों पर चुनावी रैली करने वाले हैं. साथ ही बिहार चुनाव को लेकर कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला की आज दोपहर 12 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस भी है.

28 अक्टूबर को 71 विधानसभा सीटों पर मतदान

बता दें कि 28 अक्टूबर को 71 विधानसभा सीटों पर मतदान होना है. पहले चरण में 1,066 प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतरे हैं और दो करोड़ 14 लाख छह हजार 96 मतदाता इनकी किस्मत का फैसला करेंगे. पहले चरण में पटना जिले की पांच, भागलपुर की दो, भभुआ, रोहतास, बक्सर, भोजपुर, औरंगाबाद, नवादा, गया, जमुई, बांका, जहानाबाद, अरवल, नवादा व शेखपुरा जिलों में मतदान होगा.

Bihar Election 2020: हमारी सरकार आई, तो नीतीश कुमार सलाखों के पीछे होंगे- चिराग पासवान

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के लिए पहले चरण के मतदान से पहले राजनीतिक दल मतदाताओं को लुभाने के हर संभव प्रयास कर रहे हैं. रविवार को वोटर्स को लुभाने के दौरान प्रत्याशी कुछ अलग करते दिखे. इसी तरह का नजारा समस्तीपुर जिले के हसनपुर विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिला. यहां से RJD के उम्मीदवार तेजप्रताप यादव चुनाव प्रचार करते-करते अचानक क्रिकेट की पिच पर पहुंच गए और चौके-छक्के लगाने लगे. लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे व पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव इस बार हसनपुर विधानसभा क्षेत्र से महागठबंधन के उम्मीदवार हैं.

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2015 में उन्होंने महुआ से चुनाव जीता था. लेकिन इस बार उन्होंने अपनी सीट बदल दी है. रविवार को तेजप्रताप यादव यहां अपने लिए वोट मांगने पहुंचे थे. क्षेत्र के दौरे के समय उन्हें कुछ बच्चे एक जगह क्रिकेट खेलते दिखे.

जिसके बाद तेजस्वी भी मैदान में उतर गए और बल्ला उठा कर अपना हाथ आजमाने लगे. कुछ देर वह क्रिकेट खेलने के बाद फिर से वोट मांगने निकल पड़े.

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इससे पहले भी तेजप्रताप यादव चुनाव प्रचार के दौरान अलग-अलग अंदाज में नजर आ चुके हैं. बीते दिनों प्रचार के दौरान वह खेतों में ट्रैक्टर चलाते हुए दिखे थे. नामांकन दाखिल करने के दौरान जब वे अपने क्षेत्र में पहुंचे तो लोगों के बीच सतुआ खाना हो या चारपाई पर बैठ कर लोगों से बात करना हो. हर बार तेजप्रताप अलग अंदाज में दिखे.

चुनाव से पहले भी चर्चा में रहे हैं तेजप्रताप

चुनाव प्रचार से अलग आम दिनों में भी तेजप्रताप के अलग-अलग अंदाज देखने को मिलते हैं. जिससे मीडिया की नजर उन पर हमेशा बनी रहती है. कभी वे कृष्ण का रूप धारण करते हैं तो कभी भोलेनाथ का नारा लगाते हुए देवघर के बाबा वैद्यनाथ धाम के लिए रवाना हो जाते हैं.

लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के नेता चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने रविवार को एक रैली में दावा किया कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) सलाखों के पीछे होंगे. पासवान ने कहा, “अगर हम सत्ता में आते हैं तो नीतीश कुमार और उनके अधिकारी सलाखों के पीछे होंगे.”

ANI न्यूज एजेंसी के मुताबिक, बिहार विधानसभा चुनाव के लिए बक्सर के डुमरांव में एक रैली को संबोधित करते हुए, चिराग पासवान ने वर्तमान राज्य सरकार के सामने कई सवाल उठाए. पासवान ने कहा, “बिहार में शराब बंदी फेल हो गई है. राज्य में अब भी व्यापक रूप से शराब बेची जा रही है. LJP नेता ने बीजेपी समर्थकों से “नीतीश मुक्त सरकार” के लिए वोट मांगा.

उन्होंने हिंदी में ट्वीट कर कहा, “आप सभी से अनुरोध है की जहां भी LGP के प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे है उन सभी स्थानों पर “बिहार1st बिहारी1st” को लागू करने के लिए लोजपा के प्रत्याशीयो को वोट दें व अन्य स्थानों पर भारतीय जनता पार्टी के साथियों को वोट दें. आने वाली सरकार “नीतीश मुक्त” सरकार बनेगी. “असम्भवनीतीश.

मालूम हो कि एलजेपी प्रमुख पासवान, एनडीए के पूर्व सहयोगी और नीतीश कुमार की आलोचना में मुखर रहे हैं, जो NDA के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं. हालांकि, उन्होंने खुद को “मोदी का हनुमान” बताते हुए प्रधानमंत्री को समर्थन देने का वादा किया है.

चिराग पासवान लगातार ही नीतीश कुमार पर जुबानी हमला करते आ रहे हैं, लेकिन नीतीश कुमार ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. इसी कड़ी में नीतीश कुमार ने शनिवार को एलजेपी संस्थापक रामविलास पासवान के मूल स्थान अलौली विधानसभा सीट पर एक चुनावी रैली को संबोधित किया, लेकिन इसमें खास बात यह रही कि अपने पूरे भाषण में नीतीश ने LJP या उसके अध्यक्ष चिराग पासवान के खिलाफ कुछ भी बोलने से परहेज किया.

Bihar Election 2020: बिहार में बनेगा नया गठबंधन, क्या कोई नया गुल खिलाएगा चुनाव परिणाम?

बिहार चुनाव (Bihar election) में एनडीए से एलजेपी (LJP) के अलग होने की जंग और रोमांचक रूप लेती जा रही है. गठबंधन से अलग होने के बाद एलजेपी को लेकर बीजेपी ( BJP) नेताओं और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के तीखे हमले लगातार जारी हैं. एनडीए के नेताओं ने LJP को वोटकटवा पार्टी कहा. इसपर चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने कहा कि बीजेपी अपना गठबंधन धर्म निभाए और मेरे खिलाफ जितना बोलना है बोलें. प्रधानमंत्री मोदी भी मेरी आलोचना कर सकते हैं. हालांकि उन्होंने खुद को वोटकटवा पार्टी कहे जाने पर विरोध जताया. उनका कहना है कि यह पापा रामविलास पासवान का अपमान है. चिराग का कहना है कि मैं नीतीश के खिलाफ नहीं हूं, मैं उनकी नीतियों की आलोचना करता हूं.

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बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी तापमान अपने चरम पर है. आरोप-प्रत्यारोप का बाजार भी गर्म है. इस बीच आरजेडी (RJD) नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का पहला और आखिर प्यार कुर्सी से चिपके रहना है. उनको बताना चाहिए कि वो बेरोजगारी कैसे दूर करेंगे. वो बेरोजगारी, गरीबी और भूखमरी पर क्यों नहीं बोलते हैं. उन्होंने कहा कि बिहार के नौजवान समझ चुके हैं कि इसबार यहां से एनडीए को नहीं हराया, तो ये निकम्मी सरकार युवाओं के लिए कुछ नहीं करेगी. आरजेडी ने ऐलान किया है कि अगर उनकी सरकार बनती है, तो वो 10 लाख युवाओं को नौकरी देंगे.

 

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बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2020) में लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) एनडीए गठबंधन से अलग होकर चुनाव लड़ रही है. पार्टी प्रमुख चिराग (Chirag Paswan) पासवान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) पर लगातार वार कर रहे हैं. लेकिन चिराग ने खुद को पीएम मोदी (PM Modi) का हनुमान बताया था. अब इस पर AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि चिराग दिल्ली में मोदी के साथ हैं और पटना में नीतीश के खिलाफ. बिहार की जनता सब समझ रही है. वो किसकी लंका जलाएंगे.आरएसएस के लोग LJP में शामिल हो गए हैं, इसका क्या संदेश है. ये किसकी आखों में धूल झोंक रहे हैं. बिहार की जनता सब देख रही है.

 

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बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) को लेकर एक अहम बात सामने आई है. राज्य के 61 फीसदी मतदाताओं (Voters) को लगता है कि चिराग पासवान की एलजेपी और बीजेपी (LJP-BJP) बिहार चुनाव में एक-दूसरे के साथ हैं. बिहार चुनावों को लेकर शनिवार को जारी हुए एबीपी-सीवोटर के जनमत सर्वे (Survey) के मुताबिक 61 प्रतिशत मतदाताओं ने कहा कि वास्तव में एलजेपी और बीजेपी अंदरूनी तौर पर एक-दूसरे के साथ काम कर (Working Together) रही है.

एक तरफ चिराग पासवान ने बिहार चुनाव (Bihar Election) में अकेले आगे बढ़ने का फैसला किया है, वहीं दूसरी तरफ वे लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) की तारीफ कर रहे हैं, और चुनावों के बाद बीजेपी के साथ गठबंधन (Alliance) करने की बात कर रहे हैं, जिसे लेकर वोटर्स (Voters) के अंदर भ्रम (Confusion की स्थिति बनी हुई है. 57.7 फीसदी लोग गठबंधन को लेकर भ्रम में हैं, जबकि 42.2 फीसदी लोग को यह मामला बिल्कुल साफ लग रहा है.

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53.3 फीसदी लोगों के मुताबिक LJP-BJP एक साथ-सर्वे

इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि चिराग पासवान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला कर रहे हैं, और राज्य के चुनावों में बीजेपी का समर्थन कर रहे हैं. सर्वे में 53.3 फीसदी मतदाताओं का मानना है कि चुनाव के बाद एलजेपी आरजेडी से हाथ मिला सकती है,जबकि 46.7 फीसदी लोग इस बात से सहमत नहीं दिखे.

सर्वे के मुताबिक बिहार के 59.3 फीसदी लोगों को लगता है कि एलजेपी और बीजेपी के अलग चुनाव लड़ने से एनडीए को नकसान होगा, वहीं 40.7 फीसदी लोग इस बात से इत्तफाक नहीं रखते हैं.

असली एनडीए पर मतदाताओं में भ्रम-सर्वे

सर्वे के मुताबिक 42.7 फीसदी लोगों को लगता है कि भले ही एलजेपी एनडीए से बाहर है, लेकिन फिर भी असली एनडीए एलजेपी-बीजेपी ही है. वहीं 57.3 फीसदी लोगों का मानना है कि बीजेपी-जेडीयू गठबंधन ही असली एनडीए है.

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एबीपी-सीवोटर सर्वे 1 अक्टूबर से 23 अक्टूबर के बीच बिहार के 30,678 लोगों पर किया गया है. वहीं पिछले 12 हफ्तों में ट्रैकर द्वारा कुल 60 हजार से अधिक लोगों को बतौर सैंपल इसमें शामिल किया गया है. इस सर्वे में 243 विधानसभा क्षेत्रों को भी कवर किया गया है. इस सर्वे में गलती होने का चांस राज्य स्तर पर तीन प्रतिशत और क्षेत्रीय स्तर पर सिर्फ पांच प्रतिशत ही है.

बिहार विधानसभा के तीन चरणों में निर्धारित चुनाव की शुरुआत 28 अक्टूबर से होगी. कोरोना महामारी के दौरान मध्य भारत में यह पहला चुनाव है. चुनाव प्रचार में तेजी आ गई है. आरोप-प्रत्यारोप का बाजार भी गर्म हो चला है. सभी की नजरे 10 नवंबर पर टिकी रहेंगी, जिस दिन मतगणना होगी और नतीजे घोषित किए जाएंगे. पर जो बिहार की राजनीति को जानते हैं और समझते हैं, उनकी निगाहें 10 नवंबर के आगे क्या होगा इसपर टिकी हैं. क्योंकि बिहार में अक्सर चुनाव के आगे जीत होती है. बिहार में चुनाव की परिभाषा बदल गई है. लोग प्रतिनिधि चुनते हैं और सरकार किस की बनेगी इसका फैसला चुनाव के बाद होता है. जनादेश की अगर सरेआम और सबसे ज्यादा धज्जियां कहीं उड़ी हैं तो उन राज्यों में बिहार का दर्जा सबसे ऊपर है.

आया राम, गया राम

आज भी जब राजनीति में आया राम गया राम की बात होती है तो लोग हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल को याद करते हैं. भजन लाल मुख्यमंत्री पद पर 1979 से आसीन थे. लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जनता पार्टी आतंरिक कलह और बड़े नेताओं के बड़े अरमानों के कारण मृत्युशैया पर थी. 1980 में लोकसभा चुनाव हुआ और इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी की सत्ता में वापसी हुई. भजनलाल को एहसास था कि इंदिरा गांधी राज्यों में जनता पार्टी की सरकारों को बर्खास्त करने वाली हैं. इससे पहले कि इंदिरा गांधी कोई कदम उठातीं, 22 जनवरी 1980 को भजनलाल पुरे जनता पार्टी के विधायक दल के साथ कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए. भजनलाल की सरकार निर्विरोध चलती रही, बस हरियाणा में अब जनता पार्टी की जगह कांग्रेस पार्टी की सरकार बन गई थी.

लालू ने बना ली नई पार्टी

ऐसा ही कुछ नजारा बिहार में भी 1997 में देखने को मिला. जब मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव का नाम आरोपी के तौर पर चारा घोटाले में आया और उनकी गिरफ्तारी के लिए सीबीआई को राज्यपाल के अनुमोदन की प्रतीक्षा थी. लालू पर मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए जनता दल केंद्रीय नेतृत्व का दबाब बढ़ता जा रहा था. ऐसे में 5 जुलाई 1997 को लालू जनता दल के विधायक दल और पूरी सरकार के साथ अपनी नवगठित राष्ट्रीय जनता दल में शिफ्ट हो गए. जनादेश भले ही जनता दल को मिला था, पर लालू जनादेश की अनदेखी करते हुए आरजेडी को सत्ताधारी दल बनाने में और अपने स्थान पर अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाने में सफल रहे.

नीतीश बदलते रहे हैं दल

लालू प्रसाद के पुराने और घनिष्ट मित्र नीतीश कुमार तो उनसे भी दो कदम आगे निकलने वाले थे. 2010 में लगातार दूसरी बार बिहार में जनता दल (यूनाइटेड) और भारतीय जनता पार्टी को जनादेश मिला था. एनडीए की सरकार ठीकठाक चल रही थी, पर नीतीश कुमार को नरेंद्र मोदी का भूत सताने लगा था. नीतीश तथाकथित धर्मनिरपेक्ष नेताओं में गिने जाने की इक्षा रखते थे. 2013 में बीजेपी ने नाता तोड़कर नीतीश लालू प्रसाद की शरण में चले गए. आरजेडी और कांग्रेस पार्टी को बिहार की जनता ने भले ही चुनाव में नकार दिया हो, लेकिन नीतीश कुमार को जनता द्वारा नकारे दलों का समर्थन था और अल्पमत की सरकार चलता रहे.

फिर बारी आई 2015 विधानसभा चुनाव की. जेडीयू-आरजेडी-कांग्रेस पार्टी को मिलाकर महागठबंधन बना. चुनाव में महागठबंधन की एकतरफा जीत हुई. बीजेपी नीतीश के बिना 91 से 53 सीटों पर आ गई. जनादेश गठबंधन को मिला था, जिसकी सरकार दो साल चली भी. लालू के बेटों के बढ़ते भ्रष्टाचार और बिहार के एक बार फिर से जंगल राज की ओर बढ़ते कदम से नीतीश घबरा गए. महागठबंधन छोड़ा और बीजेपी का दामन थाम महागठबंधन की जगह गठबंधन की सरकार 2017 में बना ली.

गठबंधन की अहम भूमिका

प्रजातंत्र में गठबंधन की अहम भूमिका होती है. पूरे विश्व में जहां भी बहुदलीय लोकतंत्र है, किसी एक दल को अब बिरले ही बहुमत नसीब होती है. भारत में ही 1984 के बाद 30 वर्षो और 7 आमचुनावों के बाद 2014 के बीजेपी के रूप में किसी एक दल को बहुमत मिला था. जापान, इटली जैसे देशों में तो अब गठबंधन की सरकार ही बनती हैं.
हरियाणा के विधायक गया लाल, जिन्होंने 1967 में एक पखवाड़े में तीन बार दल बदल की थी, और उन्हीं के नाम पर आया राम गया राम राजनीति का नामाकरण हुआ, के बाद दल-बदल की राजनीति पर अंकुश लगाने के लिए दल-बदल कानून भी बना.

विधायक या सांसद अगर चुनाव जीत कर किसी और दल में शामिल हो जाते हैं तो उनकी सदस्यता खत्म हो जाती है और उन्हें फिर से जनता के बीच जाना होता है. पर दल-बदल कानून में शायद फिर से फेरबदल करने का समय आ गया है. अगर किसी विधायक या सांसद की सदस्यता रद्द हो सकती है तो किसी दल पर यह लागू क्यों नहीं होता? अगर 2015 में बिहार की जनता ने महागठबंधन को जनादेश दिया था तो किसने नीतीश कुमार को अधिकार दिया की वह बीजेपी को सत्ता में शामिल कर लें?

परिणाम पर टिकी निगाहें

क्योंकि नीतीश कुमार पिछले दो चुनावों के बाद जनादेश की अवहेलना कर चुके हैं, किसी को उनसे कोई जनतंत्र के आदर्शों की रक्षा की उम्मीद नहीं करनी चाहिए. कोई आश्चर्य भी नहीं होना चाहिए अगर 10 नवंबर को चुनाव परिणाम आने के बाद बिहार में कोई और ही राजनीतिक गुल खिल जाए और चुनाव बाद एक नए गठबंधन की घोषणा हो जाए. ऐसी किसी भी सम्भावना को अभी नजरअंदाज करना खतरे से परे नहीं हो सकता.

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 (Bihar Assembly Election 2020) से पहले राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी (Sushil Modi) ने लालू प्रसाद यादव को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. वहीं महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने सुशील मोदी के आरोपों पर पलटवार भी किया है. महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने कहा कि भाजपा नेता की मारने के लिए तांत्रिक अनुष्ठान की टिप्पणी हैरानी भरी है, उन्होंने कभी भी उनसे इस तरह के बयान की उम्मीद नहीं की थी. वह रोजगार, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा के बारे में बात कर सकते थे. वो 15 वर्षों के कार्यकाल के दौरान की गई उपलब्धियों के बारे में बताते. इस तरह के अंधविश्वासी बयान विचित्र हैं.

इससे पहले सुशील मोदी ने दावा किया था कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने तीन साल पहले उन्हें मारने के लिए तांत्रिक अनुष्ठान किया था. ट्विटर के ज़रिए सुशील मोदी ने लालू यादव की जीवन शैली और काले जादू में उनके विश्वास के बारे में कई गंभीर आरोप लगाए. सुशील मोदी ने ट्वीट किया, लालू प्रसाद इतने अंधविश्वासी हैं कि उन्होंने न केवल तांत्रिक के कहने पर सफेद कुर्ता पहनना बंद कर दिया, बल्कि तांत्रिक शंकर चरण त्रिपाठी को पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बना दिया.

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पशु बलि और आत्माओं की प्रार्थना करते हैं लालू

उन्होंने कहा, उसी तांत्रिक ने विंध्याचल धाम (मिर्जापुर) में लालू प्रसाद के लिए तांत्रिक पूजा की थी. सुशील मोदी ने आरोप लगाया कि लालू प्रसाद यादव को जनता पर भरोसा नहीं है, इसलिए वह काला जादू, पशु बलि और आत्माओं की प्रार्थना जैसे अनुष्ठान करते रहे हैं. इन सबके बावजूद न वो जेल से बच पाए और न ही अपनी ताकत ही बचा पाए. सुशील मोदी ने कहा कि वो अभी 14 साल जेल में बिता सकते हैं.

बकरों की बलि देंगे लालू

सुशील मोदी ने यह भी दावा किया है कि लालू यादव रांची के कैली बंगले में, बिहार विधानसभा चुनाव से पहले, नवमी के दिन तीन बकरों की बलि देने वाले हैं. सुशील मोदी ने ट्वीट कर कहा, 26 मई 2014 को, जब भाजपा के शीर्ष नेता नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली तो लालू यादव ने शपथ ग्रहण समारोह को अशुभ बताया और कहा कि सरकार पांच साल तक नहीं चलेगी.

2005 में लालू ने किया था ये दावा

2005 में जब जनता ने लालू-राबड़ी के कुशासन को खारिज कर दिया, तो लालू प्रसाद ने मुख्यमंत्री आवास छोड़ने में डेढ़ महीने का समय बिताया था, और बाद में उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसी चीज़ें (काले जादू से संबंधित) उस आवास की दीवार में डाल दी हैं कि वहां अब कोई नहीं रह सकेगा. सुशील मोदी ने कहा कि उसी आवास में रहकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 15 सालों से बिहार की सेवा कर रहे हैं और राज्य विकास की ओर बढ़ रहा है. इसी के साथ सुशील मोदी ने ये भी कहा कि जब सीएम नीतीश कुमार 2009 में पूर्ण सूर्यग्रहण देखने के लिए तारेगना पहुंचे, और उन्होंने ग्रहण के समय बिस्कुट खाए, तो अंधविश्वासी लालू प्रसाद ने कहा कि इससे अकाल पड़ेगा, हालांकि बिहार में राजग शासन के दौरान कृषि पैदावार में वृद्धि हुई है.

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बिहार का सियासी मुकाबला मुख्य रूप से तो एनडीए और महागठबंधन के ही बीच है, लेकिन एलजेपी (LJP) के अलावा असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) दोनों प्रमुख दलों के समीकरण को बिगाड़ सकती है. एक तरफ जहां चिराग पासवान के नेतृत्व में LJP मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ( JDU) को नुकसान पहुंचा सकती है. वहीं, AIMIM के दखल से महागठबंधन का खेल बिगड़ सकता है. AIMIM इस बार आरएलएसपी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व में बने ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेकुलर फ्रंट में शामिल है. सीमांचल इलाके के चार जिलों में इसका जनाधार बढ़ा है, जिसकी वजह से सभी की निगाहें इस चुनाव में AIMIM पर टिकी हैं.

सीमांचल का गणित बिगड़ सकता है

बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से AIMIM केवल 24 सीटों पर लड़ रही है. मगर सीमांचल बेल्ट में यह पार्टी अपनी पकड़ बनाने में काफी हद तक सफल रही है. पिछले वर्ष हुए उपचुनाव में किशनगंज विधानसभा सीट को जीतकर AIMIM ने इस इलाके में अपनी मजबूती का सबूत दे दिया था. इसलिए इस चुनाव में माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल से सटे किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार और अररिया जिले में पार्टी महागठबंधन के प्रत्याशियों का खेल खराब कर सकती है.

इन चारों जिलों में मुस्लिम वोटरों की बड़ी आबादी है और ये परंपरागत रूप से आरजेडी और कांग्रेस के मतदाता माने जाते रहे हैं, लेकिन AIMIM के दखल से इस बार इसमें सेंध लग सकती है, जिसका खामियाजा आरजेडी और कांग्रेस को भुगतना पड़ सकता है. आंकड़े देखें तो, पूर्णिया में 35 फीसदी, कटिहार में 45, अररिया में 51 तो किशनगंज में 70 फीसदी मतदाता मुसलमान हैं. हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव में AIMIM को महज 0.2 प्रतिशत वोट मिले थे.

आरजेडी को होगा बड़ा नुकसान

इस विधानसभा चुनाव में जितना अधिक वोट AIMIM के खाते में जाएगा, उतना ही ज्यादा नुकसान आरजेडी को उठाना पड़ेगा. हालांकि मुस्लिम वोटरों के बीच दोनों दलों को लेकर संशय की स्थिति दिख रही है. वहीं, LJP को मिलने वाला वोट जेडीयू को कमजोर करेगा. क्योंकि चिराग ने जेडीयू के खिलाफ ही सबसे अधिक प्रत्याशी उतारे हैं.

किशनगंज बिहार का एकमात्र जिला है, जहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं. चुनाव के जातीय गणित के हिसाब से सीमांचल सेक्युलर का नारा लगाने वाली पार्टियों के लिए अहम है, लेकिन कई मामलों में राज्य के दूसरे इलाकों से पिछड़ा है. किशनगंज की 70 प्रतिशत मुस्लिम आबादी में से 50 फीसदी मुसलमान गरीबी रेखा से नीचे हैं.

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2020) में वैसे लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) एनडीए गठबंधन से अलग होकर चुनाव लड़ रही है. लेकिन क्या चुनाव के बाद समीकरण बदलनेवाले हैं. एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान (Chirag Paswan) के ताजा ट्वीट ने ऐसा होने की संभावनाओं को फिर हवा दी है. चिराग पासवान ने अब सीधा-सीधा भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों के लिए वोटों की अपील कर दी है.

अपने ट्वीट में चिराग पासवान ने लिखा है कि जिन सीटों पर लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के उम्मीदवार नहीं खड़े हैं. वहां वोटर्स को बीजेपी प्रत्याशी को वोट देना चाहिए. चिराग ने आगे लिखा कि नई सरकार नीतीश कुमार के बिना बनेगी.

चिराग पासवान ने लिखा, ‘आप सभी से अनुरोध है की जहां भी LJP के प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे है उन सभी स्थानो पर #बिहार1stबिहारी1st को लागू करने के लिए लोजपा (LJP) के प्रत्याशीयों को वोट दें व अन्य स्थानों पर भारतीय जनता पार्टी के साथीयों को दें. आने वाली सरकार #नीतीशमुक्त सरकार बनेगी। #असम्भवनीतीश’

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पहले श्रेयसी सिंह के लिए मांगे थे वोट

चिराग पासवान इससे पहले बीजेपी प्रत्याशी श्रेयसी सिंह के लिए भी वोट मांग चुके हैं. जमुई विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी श्रेयसी सिंह के लिए भी चिराग ने ट्विट किया था. उन्होंने एलजेपी के कार्यकर्ताओं से श्रेयसी सिंह की चुनाव में मदद करने की अपील की थी. तब उन्होंने लिखा था, ‘भाजपा प्रत्याशी और लोजपा प्रत्याशी ही मिलकर युवा बिहार नया बिहार बनाएंगे. जेडीयू को दिया गया एक भी वोट शिक्षकों को लाठी खाने पर मजबूर करेगा’

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बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य का सियासी तापमान गर्म है. राजनीतिक दलों के नेता एक-दूसरे पर जमकर हमला बोल रहे हैं. महागठबंधन की घटक कांग्रेस (Congress) के प्रवक्ता ने प्रेमचंद्र मिश्रा ने नीतीश सरकार पर बरोजगारी को लेकर निशान साधा है. साथ ही उन्होंने कहा कि बिहार में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के मुद्दे पर बीजेपी (BJP) और जेडीयू (JDU) की सरकार फेल हो गई. मालूम हो कि कांग्रेस की सहयोगी आरजेडी (RJD) ने युवाओं को 10 लाख नौकरियां देने का वादा किया है. ऐसे में एनडीए के नेता आरजेडी (RJD) से पूछ रहे हैं कि वो कहां से इतनी नौकरियां दे पाएंगे. इसपर प्रेमचंद्र मिश्रा ने कहा कि बिहार में लाखों पद खाली हैं. 15 साल बिहार में सिर्फ भ्रष्टाचार हुआ है. काम नहीं.

 

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लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) बिहार विधानसभा चुनाव का एनडीए से अलग हो कर लड़ रही है, लेकिन ज्यदातर सीटों पर उसने जेडीयू (JDU) के खिलाफ ही अपने प्रत्याशी उतारे हैं.  LJP प्रवक्ता अजय कुमार ने कहा कि बिहार की जनता को डबल इंजन की सरकार चाहिए. उन्होंने कहा कि हमारा एक ही निश्चय है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की वापसी नहीं है. चिराग पासवान (Chirag Paswan) की लोकप्रियता बढ़ रही है. परिणाम आते-आते बीजेपी (BJP)  को हामरे साथ हाथ मिलाने के लिए सोचना पड़ेगा. BJP खुद ही अपने-आप को नीतीश कुमार से अलग करने की कोशिश में है. दूसरी ओर चिराग लगातार नीतीश कुमार पर निशाना साध रहे हैं. वहीं,  BJP एलजेपी को वोटकटवा पार्टी बता रही है.

 

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विधानसभा चुनाव को लेकर बिहार का सियासी पारा अपने चरम पर है. पहले चरण के मतदान में अब कुछ ही दिनों का समय बचा है. ऐसे में राजनीतिक दल के नेताओं के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई. कांग्रेस (Congress) प्रवक्ता आनंद माधव ने केंद्रीय सरकार के काम पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले 6 वर्ष में केंद्रीय सरकार ने झूठ परोसा है. काम सिर्फ कागजों पर हुआ. उन्होंने बिहार में शराबबंदी को असफल बताया और मोदी सरकार पर वार करते हुए कहा कि इन्होंने हर साल दो करोड़ रोजगार देने का वादा किया था. लेकिन नहीं मिला. आज लाखों लोग बेरोजगार हैं. बिहार में 28 अक्टूबर को पहले चरण के लिए वोट डाले जाएंगे.

 

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केंद्रीय मंत्री और बीजेपी की वरिष्ठ नेता स्मृति ईरानी ने कांग्रेस और RJD पर तंज करते हुए शनिवार को कहा कि लक्ष्मी हाथ पकड़कर या लालटेन के संग नहीं आतीं, बल्कि कमल पर सवार होकर आती हैं, इसलिये लोग बीजेपी के पक्ष में मतदान करें.

बिहार में चुनावी रैलियों को संबोधित करते हुए स्मृति ईरानी ने कहा, “जब मनुष्य भगवान की आराधना करता है, मां भगवती से आशीर्वाद मांगता है, तो बिहार का स्वाभिमानी नागरिक कहता है कि मां, बाजुओं में इतना बल दे कि मैं दो हाथों से दो जून की इज्जत की रोटी कमा सकूं.”

आरजेडी पर चुटकी लेते हुए बीजेपी नेता ने कहा, “बिहार का स्वाभिमानी नागरिक कभी भगवान से यह नहीं कहता है कि भगवान मुझे भी मौका दे कि मैं चारा घोटाले में पैसा कमा सकूं.” स्मृति ने कहा, “बिहार का नागरिक जब मां लक्ष्मी से आशीर्वाद मांगता है, तो कहता है कि मां, बस मेरे बाजुओं में इतना दम दे कि भरण-पोषण अपने परिवार का इज्जत से कर सकूं.”

“लक्ष्मी को घर लाना है तो कमल का बटन दबाना है”

बीजेपी उम्मीदवार को जिताने की अपील करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, “जब लोग लक्ष्मी के सामने शीश झुकाते हैं तो पाते हैं कि जब लक्ष्मी घर आती हैं, तो कांग्रेस का हाथ पकड़कर नहीं आतीं. लक्ष्मी जब घर आती हैं, तो लालटेन संग नहीं लातीं, बल्कि लक्ष्मी आती हैं तो कमल पर बैठकर आती हैं. इसलिए लक्ष्मी को घर लाना है तो कमल का बटन दबाना है.”

मालूम हो कि हाथ का निशान कांग्रेस का चुनाव चिन्ह है, जबकि लालटेन RJD का और कमल बीजेपी का चुनाव निशान है. स्मृति ने कहा कि बिहार को नया और विकसित देखना है, तो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को जिताएं. उन्होंने अपने संबोधन के दौरान विपक्षी आरजेडी पर निशाना साधा और राजग सरकार की उपलब्धियां गिनाईं.

जहानाबाद लोकसभा क्षेत्र की अरवल विधानसभा सीट पर किसी खास पार्टी का कभी भी दबदबा नहीं रहा. बारी-बारी सभी दलों को जनता मौका देती रही है. नरसंहारों की इस धरती पर इस बार महागठबंधन की ओर भाकपा माले को यह सीट मिल गई है. दूसरी ओर एनडीए की ओर बीजेपी ही चुनाव लड़ रही है. बीजेपी ने भी अपने पुराने प्रत्य़ाशी चितरंजन कुमार को टिकट न देकर दीपक शर्मा पर दांव लगाया है. चितरंजन की छवि ठीक न होने के चलते बीजेपी ने एक नए प्रत्य़ाशी पर दांव लगाया है जो उसके लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है.

फिलहाल अभी अरवल विधानसभा क्षेत्र पर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) का कब्जा है. पर इसके पहले इस सीट पर बीजेपी का ही कब्जा था. पिछले चुनाव में जेडीयू और आरजेडी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के चलते बीजेपी यह चुनाव हार गई थी. पर इस बार बीजेपी इस सीट को हर हाल में जीतने का मन बनाए हुए है. इसलिए पार्टी ने अपने पिछले 2 बार प्रत्य़ाशी रहे चितरंजन कुमार को टिकट नही दिया.

दरअसल चितरंजन को टिकट न देकर बीजेपी ये संदेश भी देना चाहती है कि पार्टी दागी उम्मीदवारों से अपनी दूरी बना रही है. अरवल विधानसभा सीट पर इस बार मुख्य टक्कर भाकपा माले के महानंद प्रसाद ( पिछली बार तीसरे स्थान पर थे) और बीजेपी के दीपक शर्मा के बीच बताई जा रही है। इसके अलावा आरएलएसपी के सुभाष चंद यादव और जाप के अभिषेक रंजन भी चुनालव मैदान में हैं.

2010 के चुनावों में बीजेपी के चितरंजन कुमार को क्षेत्र की जनता ने चुनकर विधानसभा भेजा था. इस चुनाव में चितरंजन कुमार ने 25.3% मत पाकर ही जीत दर्ज कर ली थी. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (एमएल) के महानंदन प्रसाद 20.9% वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे. लोक जनशक्ति पार्टी के दुलार चंद सिंह 16.4% मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे. इस तरह यहां पर 2010 के चुनाव में बहुकोणीय मुकाबला हुआ था. इसी तरह 2015 के चुनावों में आरजेडी के रविंद्र सिंह ने 42.6% मतों के साथ जीत हासिल की थी. चितरंजन कुमार को 28.9% मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहना पड़ा था. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (एमएल) के महानंदन प्रसाद 16.5% वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे. इस तरह महानंदन प्रसाद लगातार यहां फाइट कर रहे हैं इसलिए इस बार उनकी मजबूत स्थित बताई जा रही है. पर बीजेपी ने प्रत्याशी बदलकर अपनी इमेज साफ करने की कोशिश की है. अब देखना है बीजेपी के प्रत्य़ाशी को लेकर जनता का क्या रुख होता है.

बिहार के शिवहर विधानसभा क्षेत्र के जनता दल (राष्ट्रवादी) के प्रत्याशी नारायण सिंह की शनिवार की शाम अपराधियों ने उस समय गोली मारकर हत्या कर दी, जब वे जनसंपर्क अभियान में हथसार गांव पहुंचे थे. प्रत्याशी की हत्या से आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने भाग रहे एक आरोपी को धर दबोचा और उसकी भी पीट-पीटकर हत्या कर दी.

पुरनहिया के थाना प्रभारी मुन्ना कुमार गुप्ता ने आईएएनएस को बताया कि नया गांव के रहने वाले प्रत्याशी सिंह शनिवार को हथसार गांव में प्रचार करने पहुंचे थे. उनके साथ 25 से 30 उनके समर्थक भी साथ थे. गांव में जनसंपर्क के दौरान एक बाइक पर सवार होकर आए अपराधियों ने प्रत्याशी पर अंधाधुंध गोलीबारी कर दी, जिससे वे बुरी तरह घायल हो गए.

आनन-फानन में उन्हें स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां से चिकित्सकों ने इन्हें अन्यत्र रेफर कर दिया गया. इसी क्रम में सिंह को सीतामढ़ी ले जाया जा रहा था कि रास्ते में उनकी मौत हो गई.

थाना प्रभारी गुप्ता ने आगे बताया कि घटना को अंजाम देकर भाग रहे अपराधियों में से एक अपराधी को सिंह के कार्यकर्ताओं ने पकड़ लिया और उसकी जमकर पिटाई कर दी, जिससे उसकी भी घटनास्थल पर ही मौत हो गई. मृतक की अब तक पहचान नहीं हो पाई है.

पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचकर पूरे मामले की छानबीन शुरू कर दी है. पुलिस अभी घटना के कारणों को लेकर कुछ भी बोलने से परहेज कर रही है. इधर, सूत्रों का कहना है कि मृतक पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. सूत्र इसे आपसी विवाद में हत्या बता रहे हैं.

बिहार में चुनाव का माहौल अपन चरम पर है. हर नेता एक अपनी-अपनी चुनावी रैलियों में दूसरे नेता पर जमकर छींटाकशी करने में लगा है. इसी कड़ी में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को एलजेपी संस्थापक रामविलास पासवान के मूल स्थान अलौली विधानसभा सीट पर एक चुनावी रैली को संबोधित किया, लेकिन इसमें खास बात यह रही कि अपने पूरे भाषण में नीतीश ने LJP या उसके अध्यक्ष चिराग पासवान के खिलाफ कुछ भी बोलने से परहेज किया, जो कि लगातार उन पर जुबानी हमला करते रहे हैं.

बिहार में सत्तारूढ़ एनडीए से अपनी पार्टी को अलग करने के बाद, चिराग अपनी चुनावी सभाओं के साथ-साथ सोशल मीडिया में भी लगभग रोजाना मुख्यमंत्री पर जुबानी हमला कर रहे हैं, लेकिन नीतीश कुमार ने उन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. मुख्यमंत्री ने अपने इसी दृष्टिकोण को बनाए रखा और अलौली में अपनी रैली के दौरान चिराग या उनकी पार्टी के बारे में कुछ भी बोलने से परहेज किया.

अलौली एक आरक्षित सीट है, जिसमें रामविलास पासवान का जन्म स्थान खगड़िया जिले का सहारबानी गांव भी शामिल है. रामविलास पासवान ने 1969 में संयुक्ता सोशलिस्ट पार्टी (SSY) पर अलौली निर्वाचन क्षेत्र से जीतकर ही अपनी राजनीतिक पारी शुरू की थी.

इस सीट पर LJP, JDU और RJD के बीच कड़ा मुकाबला 

वर्तमान चुनावों में, इस सीट पर जनता दल यूनाइटेड (JDU), राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) तीनों के बीच कड़ा मुकाबला चल रहा है. नीतीश की पार्टी ने साधना सदा को मैदान में उतारा है. RJD ने रामबृक्ष सादा को टिकट दिया है, जबकि चिराग की LJP ने यहां से रामचंद्र सदा को अपना उम्मीदवार बनाया है, इस सीट पर 3 नवंबर को दूसरे चरण में मतदान होगा.

इतना ही नहीं नीतीश कुमार ने क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों पर प्रकाश डाला और अपने संबोधन में राष्ट्रीय जनता दल पर तीखा हमला भी किया, लेकन उन्होंने एलजेपी पर कुछ भी नहीं बोला.

“जंगल राज को बढ़ावा देने वाले कर रहे हैं विकास की बात”

नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव की पार्टी के दावों पर जोर देते हुए कहा, “शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क निर्माण की उपेक्षा करने वाले और जंगल राज को बढ़ावा देने में समय व्यतीत करने वाले, आज विकास की बात कर रहे हैं… मजाक नहीं तो और क्या है?”

नीतीश कुमार ने आगे कहा, “हमने जंगल राज को खत्म कर दिया और कानून का राज स्थापित कर दिया.” नीतीश ने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की ताजा रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें बिहार को अपराध के मामले में 23वें स्थान पर रखा गया है.

Bihar election 2020: नीतीश का RJD पर तंज ‘जंगलराज कायम करने वालों का नौकरी और विकास की बात करना मजाक’

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने RJD सहित विपक्षी महागठबंधन के घोषणापत्र के वादों पर परोक्ष निशाना साधते हुए शनिवार को कहा कि 15 साल के शासन में बिहार में शिक्षा, इलाज, आवागमन का इंतजाम करने की बजाए जंगलराज कायम करने वालों का नौकरी और विकास की बात करना मजाक है. खगड़िया के अलौली और बेगुसराय के तेघड़ा में चुनावी रैलियों को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने सवाल किया, ‘‘ हमारी सरकार से पहले जो सत्ता में थे, उन्होंने क्या कोई काम किया. समाज में टकराव और विवाद पैदा करके वोट लेते रहे और काम करने का मौका मिलने पर सिर्फ अपने और अपने परिवार के लिये सोचा.’’

लोगों की घर से निकलने की नहीं थी हिम्मत

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजद के शासनकाल में न पढ़ाई की व्यवस्था थी, न इलाज का इंतजाम था और न लोगों के आने जाने की सुविधा थी और शाम के बाद लोगों की घर से निकलने की हिम्मत नहीं होती थी. उन्होंने कहा कि पहले कितनी अपराध की घटनाएं होती थी, कितनी नरसंहार, हत्या की घटनाएं होती थी जिसके कारण डाक्टरों एवं व्यापारियों को भागना पड़ा था.

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उन्होंने कहा, ‘‘ जंगलराज था पहले. हमने अपराध की घटनाओं को नियंत्रित करने का काम किया है. हमने जंगलराज से बाहर निकालकर कानून का राज कायम किया.’’ नीतीश कुमार ने लोगों से कहा, ‘‘ जो पूरी स्थिति को देखे हुए हैं, वे नई पीढ़ी को पहले की स्थिति और आज की स्थिति के बारे में बताएं, उस दौर की तस्वीर खाएं.’’

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RJD नेतृत्व पर प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ लोगों को मौका मिला तो क्या किया ? अपने पिता से पूछो, अपनी माता से पूछो कि क्या कोई स्कूल बना ? क्या कोई कॉलेज बना?’’ उन्होंने लालू प्रसाद का नाम लिये बिना कहा कि जब राज करने का मौका मिला तब राज करके ग्रहण करते रहे और जेल चले गए तब पत्नी को गद्दी पर बैठा दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि अब कोई गड़बड़ करने वाला नहीं बचेगा और उसे अंदर (जेल) जाना होगा. तेघड़ा में मुख्यमंत्री की रैली के दौरान कुछ लोगों ने शोर शराबा किया. इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जिनके लिये ऐसा कर रहे हो, उसके बारे में सभी को पता है.

RJD नहीं चाहती शिक्षित करना

विपक्षी राजद को आड़े हाथों लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ हम चाहते हैं कि सभी को पढ़ाया जाए लेकिन कुछ लोग बिना पढ़े ही काम करना चाहते हैं. ’’ उन्होंने कहा कि हमारी सरकार आने पर स्कूलों की स्थापना की गई, महिलाओं को पंचायतों एवं सरकारी नौकरियों में आरक्षण दिया गया. उन्होंने कहा कि हमने न्याय के साथ विकास सुनिश्चित किया और अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े, अतिपिछड़े, महादलितों सभी को आगे बढ़ाने का काम किया जिन्हें पहले कोई पूछता नहीं था. उन्होंने कहा कि हमें आगे काम करने का मौका मिला तो हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचा देंगे.

नई टेक्नोलॉजी गांव-गांव पहुंचाएंगे

नई टेक्नोलॉजी को गांव-गांव तक पहुंचाएंगे, सभी युवक-युवतियों को इसका प्रशिक्षण दिलवाएंगे. अपनी सरकार के विकास कार्यों का जिक्र करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि उनके (राजद की पूर्ववर्ती सरकार) अंतिम वर्ष का उनका बजट 24 हजार करोड़ रुपये से भी कम था लेकिन जब हमें मौका मिला तो यही बजट आज 2 लाख 11 हजार करोड़ से ज्यादा का हो गया है. उन्होंने कहा कि अब हर घर तक बिजली पहुंचा दी गई है और साल 2005 में बिजली की खपत मात्र 500 मेगावाट थी, वह आज 6000 मेगावाट हो गई है.