BJP तो बेगानी, अब अपने भी कर रहे सितम; बिहार में नीतीश कुमार की मुश्किलें नहीं हो रही हैं कम

जेडीयू नेता अजय आलोक ने पार्टी को लगभग धमकी भरे अंदाज़ में कहा है कि पार्टी को अगर उनसे परेशानी है तो उन्हें बाहर निकाल दें.
Ajay Alok, BJP तो बेगानी, अब अपने भी कर रहे सितम; बिहार में नीतीश कुमार की मुश्किलें नहीं हो रही हैं कम

बिहार में नीतीश कुमार के लिए कुछ भी ठीक नहीं हो रहा है. पहले सहयोगी दल बीजेपी के सांसदों और नेताओं द्वारा ज़ुबानी वार. फिर पटना के गांधी मैदान में रावण दहन कार्यक्रम में बीजेपी नेताओं की अनुपस्थिति.

पहले मुसीबत सहयोगी पार्टी थी लेकिन अब अपने ही दल के अंदर से उठ रही बग़ावती आवाज़ नीतीश कुमार के लिए नासूर बनता जा रहा है.

जेडीयू (जनता दल यूनाइटेड) नेता अजय आलोक ने पार्टी को लगभग धमकी भरे अंदाज़ में कहा है कि पार्टी को अगर उनसे परेशानी है तो उन्हें बाहर निकाल दें. यह जवाब पार्टी प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद के एक बयान पर आया है.

दरअसल राजीव रंजन ने कहा है कि अजय जेडीयू नेता के तौर पर कोई बयान जारी नहीं कर सकते. इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि अजय आलोक ने प्रवक्ता का पद छोड़ने के बाद जो भी बयान दिया है पार्टी उसे सिरे से ख़ारिज़ करती है.

बता दें कि प्रवक्ता पद से हटने के बाद अजय आलोक द्वारा दिए गए बयान को पार्टी ने अनुशासन का उल्‍लंघन माना है.

जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि अजय आलोक पार्टी लाइन से हटकर बयान देते हैं, उनके बयानों को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

जिसके बाद सार्वजनिक रूप से नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए अजय आलोक ने ट्वीट किया. उन्होंने लिखा, ‘पार्टी के प्रवक्ता पद से इस्तीफ़ा दिया था ममता बनर्जी पर मिनी पाकिस्तान बनाने के बयान पर लेकिन पार्टी से इस्तीफ़ा नहीं दिया था. अब अगर पार्टी कहती हैं तो पार्टी से भी इस्तीफ़ा दे दूंगा और मुझसे इतनी असहजता हो गयी हैं तो मुझे निकाल दीजिए. मेरा महिमामंडन पार्टी का नुकसान हैं.’

अजय आलोक के ट्विटर पेज पर जाकर अगर देखें तो पाएंगे कि वो लगातार जेडीयू पर हमलावर रहे हैं. पिछले कुछ दिनों के ट्विटर कमेंट्स को देखने पर इस बात की पुष्टि होती है.
बयान इस प्रकार हैं-
8 अक्टूबर, विजयादश्मी रावण वध कार्यक्रम पर क्या बोला?
क्या हो गया बिहार बीजेपी? कोई गांधी मैदान में रावण वध में नहीं आया ? रावण वध नहीं करना था क्या ?

7 अक्टूबर को जलजमाव पर-
मुझे ये समझ नहीं आ रहा हैं की पटना मेट्रो की feasibility report (संभाव्यता रिपोर्ट) कैसे अप्रूव हुई ? क्या जलजमाव, ड्रेनेज आदी का ख़याल नहीं रखा गया ? प्रस्तावित मेट्रो लाइन का ज़्यादा हिस्सा तो जलमग्न था. I Need to revisit everything नीतीश सर, कोई भी भरोसे के लायक नहीं हैं

7 अक्टूबर को जलजमाव पर-
प्रशासनिक कोशिशों के बावजूद पटना और आस पास के इलाक़े अभी तक वेनिस बने हुए हैं और इस वेनिस में डेंगू और मलेरिया भी फैल रहा है. दुखद है और अब आश्चर्य ये हो रहा हैं की पटना “मेट्रो “की तैयारी कर रहा था ?? अंडरग्राउंड मेट्रो में पानी !! स्थिति का अनुमान लगाइये ज़रा !!

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