किरकिरी होने के बाद नीतीश कुमार ने रद्द किया हवाई दौरा, मरने वालों की संख्या बढ़कर हुई 225

बिहार में लू के कहर से 21 जून तक कोई राहत नहीं मिलने वाली है. पार ज्यों का त्यों बना रहेगा. 22 जून से मौसम के बदलने की उम्‍मीद है.

पटना. एक पखवाड़े से अधिक समय से बिहार के मुजफ्फरपुर और पड़ोसी जिलों में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के कारण बच्चे मर रहे हैं, वहीं लू के चलते भी बिहार में  75 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. इसी सिलसिले में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुरुवार को भीषण गर्मी झेल रहे नवादा, गया और औरंगाबाद जिलों का हवाई सर्वेक्षण करने वाले थे लेकिन बताया जा रहा है कि किरकिरी होने के बाद उन्होंने यह दौरा रद्द कर दिया है.

बता दें कि, एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के कारण मुजफ्फरपुर और पड़ोसी जिलों में अबतक 150 बच्चों की मौत हो चुकी है. राज्य और केंद्र सरकारों के पास बीमारी के संबंध में कोई जानकारी नहीं है. इस साल राज्य में अब तक 501 एईएस के मामले सामने आए हैं.

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नहीं पता चल सका है बिमारी का कारण

डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों के एईएस महामारी के पीछे के कारकों और मौतों के कारण पर अलग-अलग विचार हैं. इस भ्रम ने एईएस के मौसमी प्रकोप से निपटने या नियंत्रित करने की प्रक्रिया को और जटिल कर दिया है, जो हर साल आता है. एईएस के शिकार ज्यादातर बच्चे गरीब तबके के होते हैं, जिनमें दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (ईबीसी) और मुस्लिम शामिल हैं.

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नीतीश कुमार ने मुजफ्फरपुर का किया था दौरा

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा मंगलवार को मुजफ्फरपुर का दौरा करने के बाद, सरकार ने उन ब्लॉकों और गांवों में एक सर्वेक्षण शुरू किया है. उन्होंने प्रभावित परिवारों के सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइल और उनके रहने की स्थिति का अध्ययन करने के लिए कहा है, जहां सबसे अधिक संख्या में मौतें हुई हैं. केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए विशेषज्ञों की एक टीम ने कमजोर स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और खराब अस्पताल सुविधाओं पर असंतोष व्यक्त किया है.