नीतीश सरकार का बड़ा फैसला, बिहार में अब 60 साल के बुजुर्गों को मिलेगी पेंशन

यह योजना 1 अप्रैल, 2019 से प्रभावी होगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के लिए राज्य सरकार अपनी ओर से प्रति वर्ष 1800 करोड़ रुपए का खर्च करेगी.

नई दिल्ली: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्य के बुज़ुर्गों पर पिछले कुछ दिनों से काफी मेहरबान दिख रहे हैं. बुजुर्गों की सेवा नहीं किए जाने पर जेल की फरमान के बाद अब पेंशन को लेकर बड़ी घोषणा की है.

नीतीश सरकार की नई घोषणा के मुताबिक 60-79 साल के बुज़ुर्गों को 400 रुपये और 80 साल या उससे ज़्यादा उम्र की लोगों को 500 रुपये का मासिक पेंशन दिया जाएगा. इस योजना की अच्छी बात यह है कि इसमें APL और BPL जैसी कोई बंदिश नहीं है.

इस तरह बिहार बुज़ुर्गों को पेंशन देने वाला पहला राज्य बन गया है.

नीतीश कुमार ने शुक्रवार को यूनिवर्सल ओल्ड एज पेंशन स्कीम को हरी झंडी दी. मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना के दायरे में लगभग 36 लाख़ बुज़ुर्ग कवर होंगे. ये वो बुज़ुर्ग होंगे जिन्हें वर्तमान में किसी तरह का कोई सरकारी पेंशन नहीं मिल रहा हो.

यह योजना 1 अप्रैल, 2019 से प्रभावी होगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के लिए राज्य सरकार अपनी ओर से प्रति वर्ष 1800 करोड़ रुपए का खर्च करेगी.

अभी तक पेंशन के लिए दो लाख से ज्यादा लोगों ने ऑनलाइन आवेदन किया है.

इससे पहले बिहार मंत्रिमंडल की मंगलवार को हुई बैठक में नीतीश सरकार ने फैसला लिया कि राज्य में रहने वाली संतानें अगर अब अपने माता-पिता की सेवा नहीं करेंगी तो उन्हें जेल की सजा हो सकती है.

माता-पिता की शिकायत मिलते ही बिहार सरकार द्वारा उनके बच्चों पर कार्रवाई की जाएगी. सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बैठक में कुल 15 प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई.

बैठक की अगुवाई के दौरान नीतीश कुमार ने कहा कि सामाजिक परिवेश में अपने बच्चों का पालन-पोषण करने वाले माता-पिता को कानूनी संरक्षण देना सरकार की जिम्मेदारी है. यह फैसला उस सर्वे के सामने आने के बाद लिया गया, जिसमें यह बात सामने आई थी कि संतान होने के बावजूद बूढ़े माता-पिता की हालत बहुत ही खराब है.

बता दें कि 2011 की जनगणना के मुताबिक बिहार में वृद्धों की आबादी कुल आबादी का 7.2 प्रतिशत है.

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