बिहार में कोसी नदी का कहर, मधुबनी जिले के आधा दर्जन गांव हुए पानी-पानी

कोसी नदी ने इस बार की बारिश में ऐसी तबाही मचाई की पिछले कई सालों के बाढ़ के रिकॉर्ड टूट गया. बीती 10 जुलाई को नेपाल कोसी डैम से 350 क्यूसेक से ज़्यादा पानी छोड़ा गया था जिससे कोसी नदी का जलस्तर 8 फ़ीट तक बढ़ गया.
bihar flood kosi river, बिहार में कोसी नदी का कहर, मधुबनी जिले के आधा दर्जन गांव हुए पानी-पानी

पटना से 230 किमी दूर कोसी नदी (Kosi River) का इलाक़ा कहे जाने वाला मधुबनी जिले के मधेपुर ब्लाक का मेनाह ग्राम समेत आधा दर्जन गांव कोसी के क़हर का शिकार हो गए.

नेपाल (Nepal) के द्वारा छोड़े गए पानी के चलते 400 घरों वाले इस गांव में गिनती के 6 घर बचे है. दो किमी इलाके में बने स्कूल, शौचालय, 3-3 सरकारी सोलर प्लाट समेत बिजली के टावर को कोसी का पानी अपने साथ बहा ले गया है.

टीवी9 भारतवर्ष की टीम ने मौके पर पहुंचकर हालात की जानकारी ली.  दरअसल बीती 10 जुलाई को नेपाल कोसी डैम से 350 क्यूसेक से ज़्यादा पानी छोड़ा गया था जिससे कोसी नदी का जलस्तर 8 फ़ीट तक बढ़ गया.

बाढ़ (Flood) भी इतनी भयावह थी कि तक़रीबन 10-10 किमी दोनों तरफ़ चौड़ाई में जो भी चीज़ उसके रास्ते में आई वो कोसी में समा गई. ऐसा नहीं है कि कोसी में पहली बार बाढ़ आई हो. कोसी में बाढ़ का इतिहास न सिर्फ पुराना है बल्कि हर साल कोसी की बाढ़ एक नई इतिहास को बनाता है. 1987, 2002, 2004, 2008, 2012 की बाढ के प्रलय को लोग अब भी नही भूल पाए है. बिहार के जो दस जिले बाढ़ प्रभावित हैं उनमें सबसे ज़्यादा बाढ़ ग्रस्त कोसी का ये इलाक़ा है.

देखिये #अड़ी सोमवार से शुक्रवार टीवी 9 भारतवर्ष पर शाम 6 बजे

कोसी ने इस बार की बारिश में ऐसी तबाही मचाई की पिछले कई सालों के बाढ़ के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए पानी उस मेनाह गांव तक जा पहुंचा. जहां इससे पहले के सालों में आई बाढ़ के दौरान नहीं पहुंचा था. आलम ये रहा है कि 10 जुलाई की रात आई बाढ़ इतनी त्रासद थी कि इस गांव के लोगों को संभलने तक का मौक़ा नहीं मिला.

दो किमी में बसा पूरा गांव कोसी की कटाव का शिकार हो गया और लोग बमुश्किल अपनी अपने बच्चों की जान बचा पाए. बाक़ी इनके घर, स्कूल, बिजली प्लाट, राशन मवेशी सब कुछ कोसी में विलीन हो गया. अब जब जलस्तर कम हुआ है तो सिर्फ झोंपड़ियों का मलबा बचा है.

जिसमें से अब ये लोग बांस-बल्लियां अलग कर रहे हैं ताकि फिर से ऑशियाना बसाया जा सके. लेकिन मुश्किल ये है कि इस बार की बाढ़ ने सिर्फ आशियाने तबाह नहीं किए हैं बल्कि अपने साथ वो ज़मीन भी बहा ले गई है जिस पर इनके मकान बने थे.

कोसी के बाढ़ वाले जिले मधुबनी की ख़ास बात ये है कि बिहार की डबल इंजन वाली सरकार के चार चार मंत्री इस जिले से आते हैं. जिनके पास भारी भरकम मंत्रलाय है जिसमें जल संसाधन मंत्री, आपदा एवं राहत मंत्री, पंचायती राज मंत्री और खाद एवं आपूर्ति मंत्री शामिल है.

लेकिन विडंबना देखिए कोसी के हर साल क़हर को झेल रहे इस इलाके में सरकार तो दूर उन चार मंत्रियों ने भी अपने विभाग से रत्ती भर का काम नहीं कराया जिस मंत्रालय के वो मालिक थे. आपदा की इस घड़ी में आपदा एवं राहत मंत्री ने राहत देना तो दूर बल्कि दौरा की भी ज़हमत नहीं उठाई. ख़बर तो ये है कि मंत्री जी जिले में नहीं आ रहे हैं.

खा्दय मंत्रालय जिसकी ज़िम्मेदारी थी कि जिनके घर बह गए, जिनके पास राशन नहीं बचा, कम से कम उन तक राशन पहुंचे लेकिन यहां भी कोई काम नहीं हुआ.

देखिये फिक्र आपकी सोमवार से शुक्रवार टीवी 9 भारतवर्ष पर हर रात 9 बजे

Related Posts