मुजफ्फरपुर में AES से 90 बच्चों की मौत: मासूमों को मिले सही इलाज, जारी है टीवी9 भारतवर्ष की मुहिम

इंसेफेलाइटिस से पीड़ित बच्चों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. मुजफ्फरपुर में अबतक 90 बच्चों की मौत हो चुकी है.

मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक्‍यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) या ‘चमकी बुखार’ से अबतक 90 बच्चों की मौत हो चुकी है. मासूम बच्चों की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. वहीं, राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मृतक बच्चों के परिजनों के लिए चार लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है.

टीवी9 भारतवर्ष की मुहिम इस पर लगातार जारी है. टीवी9 की मुहिम का असर पटना से लेकर दिल्ली तक दिखना शुरू हो गया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय हरकत में आ गया है. स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन सिंह आज मुजफ्फरपुर के SKMCH अस्पताल का दौरा करने वाले हैं.

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श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में हर दिन इंसेफेलाइटिस से पीड़ित बच्चों की मौत हो रही है. पिछले 24 घंटे में यहां पर 8 से 10 बच्चों की मौत होने की खबर है. SKMCH बिहार के मुजफ्फपुर जिले का सबसे बड़ा अस्पताल है. अस्पताल के आईसीयू में बच्चों की जान जोखिम में है. अस्पताल के आईसीयू में डॉक्टर का पता नहीं चल रहा है. बीमार बच्चों के परिजनों का काफी बुरा हाल है. आईसीयू में एक बर्थ पर दो-तीन बच्चों को लिटाया गया है.

अस्पताल में मंत्रियों का दौरा हो रहा है. गृह राज्य मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री भी दौरा कर चुके हैं. मंत्रियों का दौरा होता है, उनके साथ डॉक्टर और मेडिकल सुपरिटेंडेंट होते हैं. लेकिन अस्पताल के आईसीयू में कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा है.

बीमार बच्चे की एक महिला परिजन का कहना है कि डॉक्टर तो आते हैं लेकिन ठीक से नहीं देखते हैं. आईसीयू में इंसेफेलाइटिस से पीड़ित एक बच्चे की कुछ समय पहले ही मौत हुई है. बच्चे की मां का रो-रोकर काफी बुरा हाल है. वो कुछ कहना चाहती हैं लेकिन कह पाने की स्थिति में नहीं हैं.

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अस्पताल में आए बीमार बच्चे के एक परिजन का कहना है कि यहां पर उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है. नर्स से पूछने पर पता चलता है कि डॉक्टर साहेब आ रहे हैं. लेकिन कोई सुनवाई नहीं है.

अस्पताल के सीनियर डॉक्टर का कहना है कि यहां पर में चार आईसीयू हैं. वो आईसीयू नंबर तीन में गए हुए थे. वहां पर एक बच्चे को ठीक करने की कोशिश दो घंटे से कर रहे थे लेकिन उसे नहीं बचाया जा सका. डॉक्टर साहेब ने कहा है कि अस्पताल में इतने बच्चों को देखने के लिए डॉक्टर्स की किल्लत है. उनका यह भी कहना है कि अस्पताल में जरूरी उपकरणों और दवाओं की भी कमी है.

आईसीयू में मौजूद बीमार बच्चे के एक और परिजन का कहना है कि उन्होंने तीन बार डॉक्टर को बुलाया लेकिन उनके बच्चे को देखने कोई नहीं आया. आईसीयू में एक ऐसे भी शख्स मिले जो बीमार बच्चों के परिजनों को डांट रहे थे. जबकि परिजनों का रो-रोकर काफी बुरा हाल है. ये चीज वाकई हैरान करने वाली है कि यहां पर कैसे पत्थर दिल डॉक्टर हैं.

स्वास्थ्य मंत्री के दौरे के बाद अस्पताल के एक आईसीयू की हालत में कुछ सुधार आया है. बीमार बच्चे अब फर्श पर नहीं लिटाए गए हैं. कुछ साफ-सफाई भी दिख रही है. हालांकि डॉक्टर्स के कमी की शिकायत यहां पर भी है.

हॉस्पिटल के सुपरिटेंडेंट सुनील कुमार शाही का कहना है कि ‘किसी डॉक्टर ने हमें दवा की कमी को लेकर रिपोर्ट नहीं किया है. दवा की कमी होने पर हम मिनटों के अंदर खरीदकर देते हैं. जो बच्चे गंभीर हालात में अस्पताल में पहुंच रहे हैं, उन्हें बचा पाना मुश्किल हो रहा है. आईसीयू की बेड्स की कमी है. हमारे पास जो है उसी में बच्चों को ठीक करके भेज रहे हैं.’

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