पटना में सीएम नीतीश के रावण दहन कार्यक्रम से दूरी क्यों, क्या राज्यों में BJP की बदल रही है रणनीति?

बीजेपी ने हाल के दिनों में अपनी रणनीति बदली है. जिन राज्यों में पहले वो नंबर दो या तीन की पार्टी थी वहां पर मोदी लहर का फ़ायदा उठाते हुए...

बिहार में एनडीए एक बार फिर से टूटने के कगार पर है? मंगलवार को गांधी मैदान में विजयादशमी के मौके पर पुतला दहन कार्यक्रम में बीजेपी के नेताओं की अनुपस्थिति तो यही बता रही है.

दरअसल पटना के गांधी मैदान में प्रत्येक साल रावण दहन कार्यक्रम होता है. आम तौर पर बीजेपी के नेता और सांसद इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं. लेकिन इस बार जाने क्या बात हुई कि कोई भी बड़ा चेहरा ही नहीं दिखा?

स्टेज पर नीतीश कुमार बैठे थे. उनके बगल में उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी की कुर्सी थी लेकिन वो नहीं थे.

बाद में उस कुर्सी पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा बैठे. हालांकि मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से जारी लिस्ट में मदन मोहन झा का नाम नहीं था.

इसलिए कार्यक्रम में नहीं पहुंचे बीजेपी नेता

बीजेपी नेताओं और राज्यपाल की अनुपस्थिति को लेकर मीडिया में कई सारी ख़बरें चल रही हैं. बताया जा रहा है कि राज्यपाल फागू चौहान की तबियत पिछले कुछ दिनों से ठीक नहीं है इसलिए वो कार्यक्रम में भाग लेने नहीं आए.

वहीं उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी को लेकर दो ख़बरें सामने आ रही है. एक ख़बर के मुताबिक वो अपने बेटे से मिलने बेंगलुरू गए हैं. वहीं दूसरी ख़बर में बताया जा रहा है कि वो पटना में ही मौज़ूद हैं.

स्थानीय विधायक नितिन नवीन ने अपनी अनुपस्थिति को लेकर कहा कि वो जल जमाव वाले इलाके का दौरा कर रहे थे. इसके अलावा कुछ पारिवारिक कारणों की वजह से भी वो कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए.

वहीं पटना सिटी इलाके के विधायक नंदकिशोर यादव अपने इलाके के पुतला दहन कार्यक्रम में शामिल हुए.

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद मंगलवार शाम को ही पटना पहुंचे थे. हालांकि उन्होंने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वे जल जमाव के कारण सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग नहीं लेंगे.

कुल मिलाकर देखा जाए तो बीजेपी के सभी बड़े नेताओं ने जलजमाव का बहाना बताकर कार्यक्रम से दूरी बना ली.

हालांकि जेडीयू की तरफ से महासचिव केसी त्यागी ने दोनों दलों के बीच की खाई को यह कहते हुए पाटने की कोशिश की है कि यह सरकारी कार्यक्रम या कैबिनेट मीटिंग नहीं थी. इसलिए लोग आएं या न आएं ये उनका निजी मामला है.

पटना में बाढ़ जैसे हालात के बाद से BJP-JDU में बढ़ रही दूरी

ज़ाहिर है पटना में जलजमाव की ख़बर सामने आने के बाद से एनडीए के दोनों सहयोगियों के बीच की खाई बढ़ती जा रही है. केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बिहर में बाढ़ और पटना में जलभराव के लिए सीधे-सीधे नीतीश कुमार को ज़िम्मेदार ठहरा दिया था.

उसके बाद बीजेपी सांसद रामकृपाल यादव ने भी आरोप लगाया था कि नीतीश कुमार के शासन में अधिकारी फोन तक नहीं उठाते.

इसके बाद जेडीयू (जनता दल यूनाइटेड) नेताओं ने भी पटलवार किया. जेडीयू प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा कि ‘गिरिराज सिंह नीतीश कुमार की पैरों की धूल के बराबर भी नहीं हैं. जब – तब सिर्फ महादेव का नाम जपने भर से कोई नेता नहीं बन जाता है.’

वहीं जेडीयू के एक अन्य प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा, ‘पटना में जल संकट के लिए जेडीयू से कहीं ज़्यादा बीजेपी ज़िम्मेदार है. जेडीयू-बीजेपी गठबंधन की सरकार जब से राज्य में है, तब से शहरी विकास विभाग हमारे गठबंधन सहयोगी बीजेपी के पास है.’

ज़ुबानी जंग अब सार्वजनिक मंच तक पहुंच गई है. तो क्या यह वैचारिक अंतर अगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति दर्शाता है. या यह केवल सीटों के बंटवारे को लेकर दबाव बनाने की नीयत से किया जा रहा है. जिससे बीजेपी नीतीश कुमार पर दबाव बना सकें और महाराष्ट्र की तर्ज पर सहयोगियों के मुक़ाबले अधिक सीटों पर चुनाव लड़े.

महाराष्ट्र में सहयोगी शिवसेना के साथ भी होती रही है तकरार

बीजेपी ने हाल के दिनों में अपनी रणनीति बदली है. जिन राज्यों में पहले वो नंबर दो या तीन की पार्टी थी वहां पर मोदी लहर का फ़ायदा उठाते हुए अपना जनाधार बढ़ा रही है.

बिहार और महाराष्ट्र में लोकसभा नतीजे देखें तो पाएंगे कि बीजेपी का वोट प्रतिशत काफी बढ़ा है.

क्या यही वजह थी कि महाराष्ट्र चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर शिवसेना और बीजेपी के बीच काफी समय तक पेंच फंसी रही. शिवसेना अक्सर सार्वजनिक मंचो से कहती रही है कि केंद्र में बीजेपी और राज्य में शिवसेना बड़े भाई की भूमिका में रहेगी लेकिन दोनों जगहों पर बीजेपी बड़े भाई की भूमिका में ही नजर आई.

शिवसेना लागातार मांग कर रही थी कि दोनों दलों के बीच सीटों का बंटवारा आधा-आधा हो लेकिन ऐसा हुआ नहीं. बीजेपी 164 सीटों पर और शिवसेना 124 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, इस बात पर आख़िरी सहमति बनी.

हालांकि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एक कार्यक्रम में स्पष्ट कर दिया था कि ये गठबंधन सरकार में बने रहने के लिए हैं. वहीं बीजेपी सभी बातों को इग्नोर करते हुए अपना राजनीतिक क़द बढ़ाने में जुटी हुई है.

और पढ़ें- गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं नीतीश कुमार, तेजस्‍वी का तंज

और पढ़ें- राहुल के रास्ते चल आरजेडी की बर्बादी की कहानी लिख रहे हैं तेजस्वी यादव

और पढ़ें- सीएम नीतीश पर गिरिराज सिंह के हमले से आगबबूला जेडीयू, कहा- पटना बाढ़ के लिए बीजेपी जिम्मेदार