टीवी9 भारतवर्ष इम्‍पैक्‍ट: एक्‍शन में आए बिहार के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री, रातों-रात बदल गए अस्‍पताल के हालात

TV9भारतवर्ष की कवरेज से पहले जमीन पर बच्चों का इलाज चल रहा था जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने सभी बच्चों को पलंग उपलब्ध कराए. डॉक्टर, नर्स अस्पताल स्टॉफ की संख्या को बढ़ाया गया है.

पटना: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में इस साल भी सैकड़ों बच्चे इंसेफेलाइटिस (चमकी बुखार) की चपेट में हैं. इलाज के लिए इन बच्चों को मुजफ्फरपुर के सरकारी अस्पताल SKMCH में भर्ती करवाया गया है. अभी तक 60 बच्चों की मौत हो गई. टीवी9 भारतवर्ष ने गुरुवार को अस्पताल में अव्यवस्थाओं और सरकार के इंतजाम को लोकर स्पेशल कवरेज की जिसमें बदइंतजामी का अंबार मिला. टीवी9 भारतवर्ष ने अपनी स्पेशल कवरेज को जारी रखा और बदलाव न हो जाने तक मुहिम चलाई.

टीवी9 भारतवर्ष की मुहिम रंग लाई

शुक्रवार को टीवी9 भारतवर्ष की मुहिम रंग लाई. बिहार सरकार के स्वास्थ मंत्री मंगल पांडेय ने SKMCH अस्पताल पहुंचे. वह स्वास्थ विभाग से संबधित लोगों के साथ बैठक भी कर रहे हैं. शुक्रवार को टीवी9 भारतवर्ष के संवाददाता ने फिर से अस्पताल के प्रबंधन पर कवरेज की जिसमें हालात बदले नजर आए.

कवरेज से पहले जमीन पर बच्चों का इलाज चल रहा था जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने सभी बच्चों को पलंग उपलब्ध कराए. पुराने चादरों को बदला गया उनकी जगह पर साफ चादरों का इंतजाम किया गया. डॉक्टर, नर्स अस्पताल स्टॉफ की संख्या को बढ़ाया गया. कवरेज से पहले बीमार बच्चों के परिजनों को दवाई की बॉटल हाथ में थमा दी थी. लेकिन शुक्रवार को हुई कवरेज में माहौल बदल गया.

अब तक हुईं 400 मौतें

बता दें कि बिहार में यह कोई पहला मौका नहीं है जब बच्चे इंसेफेलाइटिस जैसे अन्य जानलेवा बुखार की चपेट में आए हैं. पिछले दस साल से ही राज्य के मुजफ्फरपुर और अन्य जिलों में इंसेफेलाइटिस अपना कहर ढ़ाता रहा है. आंकड़ों की बात करें तो इन दस सालों में अब तक राज्य में इंसेफेलाइटिस से करीब 400 बच्चों की मौत हो चुकी है. साल 2012 में सबसे ज्यादा 120 मौते हुई थीं.

केंद्र तक पहुंची गूंज

इस साल भी SKMCH अस्पताल में अब तक इलाज के दौरान 60 बच्चों की मौत हो चुकी हैं. इन मौतों को लेकर अलग-अलग दावे भी किए जा रहे हैं. जो भी हो, अस्पताल का जो आलम है उसे देखकर हकीकत का अंदाजा लगाया जा सकता है. इन मौतों की गूंज अब बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश में सुनाई देने लगी है. इससे प्रशासन के कान भी खड़े हो गए हैं.

सरकार पर उठ रहे सवाल

पीड़ित बच्चों के परिजनों का भी अस्पताल में काफी बुरा हाल है. परिजन काफी दुखी हैं और अपने मासूम बच्चे की हालत देखकर रो रहे हैं. बिहार में इंसेफेलाइटिस से जो मौतें हो रही हैं उनकी पूरी देश में चर्चा चल रही है. इसे लेकर सरकार पर सवाल उठ रहे हैं कि बढ़ती मौतों को क्यों नहीं रोका जा रहा है? सरकार ने इतने सालों से इंसेफेलाइटिस को रोकने के लिए क्या प्रयास किए हैं?

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