अस्पताल की अलमारी में दवाओं के साथ रखे गए कफन, संवेदनहीनता देख कांप जाएगी रूह

अस्पताल में हर रोज बच्चे दम तोड़ रहे हैं. वार्ड में कहीं डॉक्टर नहीं हैं तो कहीं जमीन पर बच्चों का इलाज चल रहा है.

पटना: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में इस साल भी सैकड़ों बच्चे इंसेफेलाइटिस की चपेट में हैं. इलाज के लिए इन बच्चों को मुजफ्फरपुर के सरकारी अस्पताल एसकेएमसीएच में भर्ती करवाया गया है. एसकेएमसीएच अस्पताल का आलम ये है कि दवाओं की अलमारी में कफन रख दिया गया है. मासूमों के इलाज के प्रति इससे ज्यादा संवेदनहीनता और क्या हो सकती है.

परिजनों का भी बुरा हाल
अस्पताल में हर रोज बच्चे दम तोड़ रहे हैं. वार्ड में कहीं डॉक्टर नहीं हैं तो कहीं जमीन पर बच्चों का इलाज चल रहा है. मासूमों के परिजनों का भी काफी बुरा हाल है. परिजनों को कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि किया क्या जाए? मासूम जो जिंदगी और मौत से जूझ रहा है उनका बेहतर इलाज कहां से करवाया जाए? सरकारी अस्पताल के भरोसे कैसे छोड़ दिया जाए?

अब तक हुईं 400 मौतें
बता दें कि बिहार में यह कोई पहला मौका नहीं है जब बच्चे इंसेफेलाइटिस जैसे अन्य जानलेवा बुखार की चपेट में आए हैं. पिछले दस साल से ही राज्य के मुजफ्फरपुर और अन्य जिलों में इंसेफेलाइटिस अपना कहर ठाता रहा है. आंकड़ों की बात करें तो इन दस सालों में अब तक राज्य में इंसेफेलाइटिस से करीब 400 बच्चों की मौत हो चुकी है. साल 2012 में सबसे ज्यादा 120 मौते हुई थीं.

केंद्र तक पहुंची गूंज
इस साल भी एसकेएमसीएच अस्पताल में अब तक इलाज के दौरान 38 बच्चों की मौत हो चुकी हैं. इन मौतों को लेकर अलग-अलग दावे भी किए जा रहे हैं. जो भी हो, अस्पताल का जो आलम है उसे देखकर हकीकत का अंदाजा लगाया जा सकता है. इन मौतों की गूंज अब बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश में सुनाई देने लगी है. इससे प्रशासन के कान भी खड़े हो गए हैं.

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