SKMC अस्पताल में हर घंटे 1 बच्चे की मौत, शव के लिए भी परिजनों को करनी पड़ रही मशक्कत

एसकेएमसी अस्पताल में लापरवाही देखने को मिली, जहां पर मरीजों के लिए बेड और दवाइयों की भी काफी कमी है.

मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक्‍यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) या ‘चमकी बुखार’ से अबतक 91 बच्चों की मौत हो चुकी है. मासूम बच्चों की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. टीवी9 भारतवर्ष की टीम सोए हुए प्रशासन को जगाने की पूरी कोशिश में लगी हुई है. टीवी9 भारतवर्ष की मुहिम इस पर लगातार जारी है.

कंसल्टिंग एडिटर अजीत अंजुम और बिहार ब्यूरो चीफ रुपेश कुमार ने मुजफ्फरपुर के एसकेएमसी अस्पताल का जायजा लिया और दिखाया कि अस्पताल की हालत कितनी खस्ता है. बच्चों की हर एक घंटे में मौत हो रही है और डॉक्टरों की बहुत कमी है. एसकेएमसी अस्पताल में लापरवाही देखने को मिली, जहां पर मरीजों के लिए बेड और दवाइयों की भी काफी कमी है.

3 बार बुलाने पर भी नहीं आए डॉक्टर, बच्ची ने तोड़ा दम

अजीत अंजुम ने एक पिता से बात की जिसने इस चमकी बुखार के कारण अपनी मासूम बच्ची को खो दिया. लाचार पिता की आंखे नम थी. इस पिता का नाम है सुनील राम.

सुनील राम ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, “कल सुबह बच्ची की तबीयत खराब हुई. उसे सुबह 8 बजे अस्पताल में भर्ती कराया. यहां भर्ती कराने के बाद सब बोलते रहे कि वह ठीक हो जाएगी, ठीक हो जाएगी. रात के समय सिर्फ महिला नर्स थी और कोई भी डॉक्टर नहीं था. आज सुबह डॉक्टर को बोला कि बेटी को देख लीजिए. तीन बार उन्हें बोला की चेक कर लीजिए लेकिन उन्होंने नहीं सुनी और जब डॉक्टर्स ने जब बच्ची को देखा तो वह दम तोड़ चुकी थी.”

शव के लिए करनी पड़ रही मशक्कत

अस्पताल की हालत इतनी खराब है कि परिजनों को अपने बच्चे के शव को ले जाने के लिए भी काफी मशक्क्त करनी पड़ रही है. एक व्यक्ति जो कि अपने पड़ोसी की मदद के लिए अस्पताल पहुंचा उसने संवाददाता रुपेश कुमार को बताया कि वे डेढ़ घंटे से बच्चे का शव अस्पताल के बाहर रखा हुआ है, लेकिन अधिकारी आएंगे तो कागजी कार्यवाही पूरी करने के बाद ही शव को उन्हें सौंपा जाएगा.

व्यक्ति ने कहा, “डेढ़ घंटे से बच्ची का शव बाहर रखा हुआ है. उधर बच्चे की मां का रो-रोकर बुरा हाल है.”

परिजन इतने लाचार हैं कि बिना अधिकारी द्वारा की जाने वाली कागजी कार्रवाई के अपने मासूम बच्चे का शव भी अस्पताल से नहीं ले जा सकते. अस्पताल में हर एक घंटे में एक बच्चे की मौत हो रही है. अस्पताल का नजारा बहुत ही दुख देने वाला है और हर तरफ बस मातम पसरा हुआ है.

 

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