छपरा: SIT पर फायरिंग मामले में जिला परिषद अध्यक्ष समेत सात लोगों पर FIR दर्ज

बिहार पुलिस के डीजीपी शहीद पुलिसवालों को खुद श्रद्धांजलि देने पहुंचे हैं, लेकिन अब तक...

बिहार के छपरा के मढ़ौरा में पुलिस पर हुए हमले के दौरान शहीद हुए दरोगा मिथलेश और कांस्टेबल फारुख के मामले में जिला परिषद अध्यक्ष मीना अरुण समेत सात लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है. इन सभी पर हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप है. पुलिस इनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है.

बिहार में बहार वाली सरकार में अपराधियों का मनोबल इतना ऊंचा है कि खाकी वर्दी खुद खून से लथपथ है. छपरा के मढ़ौरा में अपराधियों ने SIT टीम पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई दीं, जिसमें आरा के रहने वाले सब इंस्पेक्टर मिथिलेश कुमार शाह और सहरसा के सिपाही फारूक शहीद हो गए. वहीं, पुलिस के एक और जवान रजनीश कुमार को गोली लगी है.

पुलिस की पिस्तौल-राइफल भी ले गए साथ
अपराधी पुलिस की पिस्तौल, राइफल तक अपने साथ लेते गए. इस हत्याकांड में पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं. छपरा के पुलिस अधीक्षक मीडिया के कैमरों से मुंह छुपाते हुए फिर रहे हैं. बिहार पुलिस के डीजीपी शहीद पुलिसवालों को खुद श्रद्धांजलि देने पहुंचे हैं, लेकिन अब तक अपराधियों की धरपकड़ तो दूर अपराधी गिरोह की पहचान तक नहीं हो पाई है.

हालांकि, पुलिस की जांच तीन बिंदुओं पर चल रही है. दारोगा मिथिलेश कुमार साह ईमानदारी और बहादुरी की मिसाल थे. उन्होंने जनता बाजार, बनियापुर और तरैया जैसे इलाकों में शराब माफियाओं की कमर तोड़ दी थी. वहीं, डकैती से परेशान आम लोगों को नट गिरोह के कई डकैतों को गिरफ्तार कर राहत दी थी.

इन बिंदुओं पर चल रही जांच
इसके अलावा छपरा के जिला परिषद की अध्यक्ष और उनके एक रिश्तेदार की हत्या के इनपुट पुलिस को मिले थे. इसी इनपुट पर एसआईटी की टीम को लगाया गया था. पुलिस फिलहाल इन तीनों बिंदुओं पर आगे बढ़ रही है.

सरकार का इकबाल तब बुलंद होता है जब वर्दी की हनक अपराधियों के बीच होती है. लेकिन क्या वर्दी की हनक और सरकार का इकबाल, दोनों अपराधियों की नजर में समाप्त हो चुका है.

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