पटना में ‘जल प्रलय’ से मानव जीवन तहस-नहस, आपदा की बागडोर संभाले इस अधिकारी का टशन तो देखिए

ये होनहार अधिकारी का नाम है प्रत्यय अमृत. जोकि बिहार के ऊर्जा विभाग के चीफ हैं. इन पर बिहार के आपदा प्रबंधन की भी ज़िम्मेदारी है और ये अधिकारी इतनी आसानी से कह रहा है कि बाढ़ घोषित नहीं होती है.
पटना में जल प्रलय, पटना में ‘जल प्रलय’ से मानव जीवन तहस-नहस, आपदा की बागडोर संभाले इस अधिकारी का टशन तो देखिए

पटना: बिहार के सीएम नीतीश कुमार का उपनाम है सुशासन बाबू. इन्हीं के प्रदेशवासी बाढ़ से त्राहिमाम-त्राहिमाम कर रहे हैं. लेकिन इनके अधिकारियों के पास क्षेत्र के विधायक का फोन अटेंड करने का वक्त नहीं है. फोन तो दूर की बात ये अधिकारी विधायक को शाम 4 बजे से दफ्तर में बैठाए रखा और जब आए तो इनका रुतबा देखने लायक था.

ये होनहार अधिकारी का नाम है प्रत्यय अमृत. जोकि बिहार के ऊर्जा विभाग के चीफ हैं. इन पर बिहार के आपदा प्रबंधन की भी ज़िम्मेदारी है और ये अधिकारी इतनी आसानी से कह रहा है कि बाढ़ घोषित नहीं होती है. प्रत्यय अमृत की बात बिल्कुल सही है लेकिन ऐसी ही आपदाओं ने आम आदमियों को बचाने की जिम्मेदारी सरकार इन्हीं के कंधों पर देती है और इसके लिए मोटी तनख्वाह और सुख सुविधाएं भी दी जाती है, लेकिन इनकी भाषा जब एक विधायक के लिए ऐसी हो सकती है तो सोचने वाली बात है कि आम आदमी के साथ उनका व्यवहार कैसा हो सकता है.

शाम चार बजे से इंतजार करते-करते ये अधिकारी शाम के मिले. मिलने पर जब विधायक ने इनको बाढ़ की जानकारी दी तो इन्होंने बोला कि ये घोषित नहीं होता है, बाढ़ का कोई रूल नहीं होता है. इसके बाद विधायक ने कहा कि एमएलए लोगों का फोन या मैसेज आप रिसीव नहीं करते. इस पर अधिकारी ने जवाब दिया, ‘मान लीजिए हम आपसे नहीं मिले आगे बताइये. आपके लिए केवल एक मैसेज है मेरे पास बहुत काम है. फिर अधिकारी बोलते हुए नजर आ रहें कि आप हमसे समय लिए थे. इस पर विधायक ने कहा कि जब आप हमारा फोन ही नहीं उठाते तो हम कैसे टाइम लेते. इस पर अधिकारी बिफर गए. फिर कहते हैं कि आपको पता है नॉर्थ बिहार में बाढ़ आ रहा है. रेड अलर्ट जारी हो गया है.

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