बिहार में बाढ़ का कहर, निगली 24 जानें; मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया हवाई दौरा

मुख्यमंत्री ने सोमवार को अररिया जिले के फारबिसगंज, सिकटी, पलासी, जोकीहाट, किशनगंज जिले के ठाकुरगंज, कोचाधामन, टेढ़ागाछ और कटिहार जिले के बलरामपुर में बाढ़ प्रभावित इलाकों का विस्तृत हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया.

पटना. बिहार के उत्तरी हिस्सों के लगभग सभी जिलों में शहर से गांव तक बाढ़ का पानी कहर ढा रहा है. लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लिए हुए हैं. बाढ़ से राज्य में अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया. बिहार के जिन इलाकों में बाढ़ का सबसे ज्यादा असर है, उनमें अररिया, किशनगंज, सुपौल, दरभंगा, शिवहर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया और सहरसा जिला शामिल हैं.

आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के 77 प्रखंडों की 546 पंचायतों के 25 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. बाढ़ से अब तक 24 लोगों की मौत हो गई है. मुख्यमंत्री ने लगातार दूसरे दिन बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया.

मुख्यमंत्री ने सोमवार को अररिया जिले के फारबिसगंज, सिकटी, पलासी, जोकीहाट, किशनगंज जिले के ठाकुरगंज, कोचाधामन, टेढ़ागाछ और कटिहार जिले के बलरामपुर में बाढ़ प्रभावित इलाकों का विस्तृत हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया. इसके बाद पूर्णिया के चूनापुर हवाईअड्डे पर पूर्णिया, अररिया, कटिहार एवं किशनगंज जिले के जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर बाढ़ एवं बचाव व राहत कार्य के बारे में विस्तृत समीक्षा की.

मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित सभी क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य तेज करने का निर्देश दिया है. ग्रामीण कार्य विभाग एवं पथ निर्माण विभाग के अधिकरियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लेने और संपर्क से कटे हुए स्थानों की संपर्कता तुरंत बहाल करने का निर्देश दिया है.

हवाई सर्वेक्षण के दौरान मुख्य सचिव दीपक कुमार, जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार, आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार भी साथ थे.

इस बीच नेपाल से आने वाली नदियों का जलस्तर बढ़ता देखा जा रहा है. बिहार जल संसाधन विभाग के प्रवक्ता अरविंद कुमार सिंह ने सोमवार को बताया कि बागमती ढेंग, सोनाखान, डूबाधार, कनसार और बेनीबाद में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, वहीं कमला बलान नदी जयनगर व झंझारपुर में तथा महानंदा ढेंगराघाट व झावा में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है.

आपदा प्रबंधन विभाग का दावा है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य जारी है. राहत और बचाव के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 26 टीमें लगाई गई हैं. आपदा प्रबंधन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में 196 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं.

मुजफ्फरपुर जिले में बागमती के उफानाने से कटरा व औराई में बाढ़ ने भयावह रूप ले लिया है. दो हजार से अधिक घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है. पूर्वी चंपारण के नए इलाकों में पानी तेजी से प्रवेश कर रहा है. सुपौल में भी नए क्षेत्रों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है.

बाढ़ से सीतामढ़ी के गांवों की स्थिति और बदतर हो गई है. सीतामढ़ी के कई गांवों के बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि अभी तक राहत और बचाव कार्य शुरू नहीं किया गया है. शिवहर में भी बाढ़ से लोगों का बुरा हाल है. कई शहरी इलाकों में भी पानी घुस चुका है. अररिया और किशनगंज में भी बाढ़ का पानी नए क्षेत्रों में फैल रहा है.

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