मुजफ्फरपुर में AES का कहर: बच्‍चों को सही इलाज मिले, जारी है टीवी9 भारतवर्ष की मुहिम

जिले में अब तक 130 से ज्‍यादा बच्‍चों को भर्ती कराया गया है.

बिहार के मुजफ्फरपुर में एक्‍यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) या ‘चमकी बुखार’ से मरने वाले बच्‍चों की संख्‍या 69 तक पहुंच गई है. श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज (SKMCH) में 6 बच्चों की मौत के बाद स्थिति और गंभीर होती जा रही है. शनिवार को दिल्ली से आई केंद्रीय टीम लौट गई. यह टीम ट्रीटमेंट ऑफ प्रोटोकॉल थमा कर दिल्ली कूच कर गयी. मासूम बच्‍चों को अस्‍पताल में समुचित इलाज मिल सके, इसके लिए टीवी9 भारतवर्ष की मुहिम लगातार जारी है.

दूसरी तरफ पटना AIMS से सात सदस्यीय टीम डॉक्टर लोकेश के नेतृत्व में सरकार के निर्देश पर इलाज में मदद करने के लिए यहां पहुंच गई है. आज दोपहर तक 19 नए मरीज की भर्ती की गई है. बढ़ते गर्मी और उमस के साथ बच्चों की हालत बिगड़ती जा रही है. अस्पताल में मरीजों का आना जारी है.

PHOTOS: चमकी बुखार के चलते अपनों को खोने का दर्द, बिलखते परिजन

बिहार राज्य स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने 15 जून को मुजफ्फरपुर के SKMCH का दौरा किया.उन्होंने कहा कि हम सभी इस दुख की घड़ी से अवगत है. वर्तमान में आपातकाल जैसी स्थिति बनी हुई है. हम सभी इसको फेस कर रहे है. अभी तक कुल 69 बच्चों की मौत हो गई है. वहीं काफी संख्या में बच्चों का इलाज चल रहा है. हम सभी इससे मर्माहत हैं. अधिकांश मामले में बच्चों में खून की कमी पाई गई है.

वहीं पिछले कुछ दिनों से गर्मी काफी ज्यादा है. कुपोषित बच्चे इसका ज्यादा शिकार हो रहे है. संजय कुमार ने बताया कि बच्चों को धूप से बचना चाहिए. प्रतिदिन कम से कम दो बार नहाना चाहिए. बच्चों को खाली पेट नही रखना चाहिए. समय समय पर बच्चों को ORS का घोल देते रहना चाहिए. बिहार के 12 जिलों में AES का प्रकोप काफी ज्यादा है.

आज मुजफ्फरपुर में 44 डिग्री तापमान की वजह से उमस के कारण और स्थिति बिगड़ती जा रही है. SKMCH के अधीक्षक सुनील शाही ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि मौसम के कारण स्थिति और गंभीर होती जा रही है. एक बेड पर 2-2बच्चे शिफ्ट है. परिजन परेशान हैं.

मुजफ्फरपुर के SKMCH में अपने बच्चों को खो चुकी मांओं की दहाड़ सुन किसी भी व्यक्ति का कलेजा फट जा रहा है. खो चुके बच्चों की मांएं दहाड़ मार कर रो रही हैं, तो उनके पिता और परिजन उन्हें ढांढस बंधा रहे हैं.

SKMCH में चिकित्सकों एवं स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों की 24 घंटे ड्यूटी लगाई गई है. मुजफ्फरपुर के डीएम का कहना है कि कक्षा 8 तक के स्‍कूल 22 जून तक बंद कर दिए गए हैं.

क्‍या हैं बीमारी के लक्षण

15 वर्ष तक की उम्र के बच्चे इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं. इस कारण मरने वालों में अधिकांश की आयु एक से सात वर्ष के बीच है. इस बीमारी का शिकार आमतौर पर गरीब परिवार के बच्चे होते हैं. चिकित्सकों के मुताबिक, इस बीमारी का मुख्य लक्षण तेज बुखार, उल्टी-दस्त, बेहोशी और शरीर के अंगों में रह-रहकर कंपन (चमकी) होना है.

अधिकांश बच्चों में हाइपोग्लाइसीमिया यानी अचानक शुगर की कमी और कुछ बच्चों के शरीर में सोडियम (नमक) की मात्रा भी कम पाई जा रही है. एईएस के संदिग्ध मरीजों का इलाज शुरू करने से पहले चिकित्सक उसकी जांच कराते हैं. ब्लड शुगर, सोडियम, पोटाशियम की जांच के बाद ही उसका इलाज शुरू किया जाता है.

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उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी व वैशाली में बीमारी का प्रभाव दिखता है. इस साल अब तक SKMCH में जो मरीज आ रहे हैं, वे मुजफ्फरपुर और आसपास के हैं.

टीवी9 भारतवर्ष ने गुरुवार को अस्पताल में अव्यवस्थाओं और सरकार के इंतजाम को लोकर स्पेशल कवरेज की जिसमें बदइंतजामी का अंबार मिला. टीवी9 भारतवर्ष ने अपनी स्पेशल कवरेज को जारी रखा और बदलाव न हो जाने तक मुहिम चलाई. शुक्रवार को टीवी9 भारतवर्ष की मुहिम रंग लाई.

बिहार सरकार के स्वास्थ मंत्री मंगल पांडेय ने SKMCH अस्पताल पहुंचे. वह स्वास्थ विभाग से संबधित लोगों के साथ बैठक भी कर रहे हैं. शुक्रवार को टीवी9 भारतवर्ष के संवाददाता ने फिर से अस्पताल के प्रबंधन पर कवरेज की जिसमें हालात बदले नजर आए.

पिछले दस साल से ही राज्य के मुजफ्फरपुर और अन्य जिलों में इंसेफेलाइटिस अपना कहर ढ़ाता रहा है. आंकड़ों की बात करें तो इन दस सालों में अब तक राज्य में इंसेफेलाइटिस से करीब 400 बच्चों की मौत हो चुकी है. साल 2012 में सबसे ज्यादा 120 मौतें हुई थीं.

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