व्यंग्य: पानी में फंसे सरकार तो आई आवाज ‘ठीके तो है नीतीश कुमार’

सुशील कुमार की वो तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं जिनमें उन्हें एनडीआरएफ बाढ़ से रेस्क्यू करती दिख रही है. साथ ही लोग सवाल भी पूछ रहे हैं.

बिहार में बाढ़ का कहर जारी है. लोगों के घरों में पानी भरा है.पटना और आस-पास के इलाकों में लोगों के ग्राउंड फ्लोर तक पानी में डूब गए हैं. इस सबके बीच बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी का वो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें एनडीआरएफ उन्हें रेस्क्यू करके पानी से बाहर ला रही है. पटना के राजेंद्र नगर स्थित सुशील मोदी का घर भी पानी में डूब गया और चार दिन बाद एनडीआरएफ ने उनके परिवार को वहां से निकाला.

वायरल हो रही इन तस्वीरों और वीडियोज़ में एक चीज़ कॉमन है. सभी सुशील मोदी की इस स्थिति को देखते हुए उनकी राजनीति और विकास के दावों का मजाक बना रहे हैं. कोई इसे ‘ऊपर वाले की लाठी’ कह रहा है तो कोई स्मार्ट सिटी का पता पूछ रहा है. बहुत से लोग ‘ठीके तो है नीतीश कुमार’ का नारा लगा रहे हैं.

लोग नीतीश कुमार से सवाल कर रहे हैं कि उनका 15 साल का सुशासन कहां है? उन्होंने जो विकास गंगा बहाई है वो खतरे के निशान से ऊपर बह रही गंगा को रोक क्यों नहीं पाई? उन लोगों से सवाल करना चाहिए कि आप बाढ़ से सवाल क्यों नहीं करते? पानी से क्यों नहीं पूछते कि बिहार में नीतीश कुमार और सुशील मोदी के रहते हुए हिम्मत कैसे हुई इतनी भारी मात्रा में घुसने की?

रिपोर्ट्स के मुताबिक हर साल बिहार के इन इलाकों में बाढ़ आती है, जलभराव होता है, लेकिन इंतजाम नहीं होगा. प्रशासन की तरफ से सिर्फ 33 बोट समूची त्रासदी से निपटने के लिए काम पर लगाई गई हैं. इतना बड़ा प्रदेश और 33 बोट! देश को सबसे ज्यादा आईएएस देने वाले प्रदेश का ऐसा बुरा हाल. यहां आम जनता की छोड़ो, विकास का दावा करने वाला उपमुख्यमंत्री सुरक्षित नहीं है. इससे बड़ी विडंबना क्या होगी. एग्जिट पोल वाले लोग चाहें तो बता सकते हैं कि अगर बिहार में इस वक्त चुनाव हो जाएं तो किसको बहुमत मिल सकता है?

बिहार में बहार है, इस बात से किसे इंकार है लेकिन बहार का ओवर डोज किसी भी स्टेट के लिए बेकार है. सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह की बातें बना रहे हैं. बिहार की जनता हर तरह से लाचार है. अगर बिहार से बाहर जाए, मेहनत करे तो भी बदनामी. कोई मनसे वाला आकर दुकान उलट देता है, पीट देता है. अगर घर में रहकर रिक्शॉ चलाए तो बाढ़ आकर डुबा देती है. जिम्मेदार लोग क्या करेंगे, वो तो खुद फंसे हुए हैं.

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