‘शराब बरामद हुई तो 10 साल तक पोस्टिंग नहीं मिलेगी’, पुलिस पर सख्‍त हुए नीतीश कुमार

सीएम ने कहा कि शराबबंदी के चलते बिहार में सामाजिक परिवर्तन आया है. इससे महिलाओं-बच्‍चों को राहत मिली है.

पटना: बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने शराबबंदी को लेकर सख्‍त रुख अपनाया है. उन्‍होंने पुलिस को निर्देश दिए हैं कि हर थाने से लिखित में लिया जाए कि उनके यहां अवैध शराब का धंधा नहीं चल रहा. सीएम ने कहा है कि अगर इसके बाद भी किसी थानाक्षेत्र से शराब बरामद होती है तो वहां के पुलिसवालों को थाने में अगले 10 साल तक पोस्टिंग नहीं मिलेगी.

मद्य निषेद, उत्‍पाद और निबंधन विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्‍यमंत्री ने यह निर्देश दिए. नीतीश ने कहा कि ‘हम लोग शराबबंदी के लिए प्रतिबद्ध हैं. उनके मुताबिक, सिर्फ रूटीन चेकिंग से शराब का धंधा नहीं रुकेगा, बल्कि इसके लिए और गहराई में जाकर धंधेबाजों पर कार्रवाई करनी होगी. सीएम ने निर्देश दिए कि शराबबंदी के लिए पुलिस, आबकारी और क्राइम ब्रांच के अधिकारी मिलकर काम करें.

धंधा मंदा तो हुआ पर बंद नहीं

बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू होने के बाद शराब का धंधा मंदा तो जरूर पड़ा है पर सख्ती के बावजूद पूरी तरह बंद नहीं हुआ है. पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों पर गौर करें तो बिहार में अप्रैल 2016 से लागू पूर्ण शराबबंदी के बाद नवंबर 2018 तक राज्य में शराब का सेवन करते 1.34 लाख से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है जबकि 39.62 लाख लीटर से ज्यादा शराब की बरामदगी की गई है. शराबबंदी के बाद इस मामले में लिप्‍त पाए जाने पर 33 पुलिसकर्मियों की सेवा भी बर्खास्त कर दी गई है.

गैर सरकारी संस्था ‘जन की बात’ ने भी हाल में कराए एक सर्वेक्षण रिपोर्ट में दावा किया है कि सरकार और कानून प्रवर्तन प्राधिकारी शराबबंदी कानून को लागू कराने में पूरी तरह विफल रहे है. संस्था का दावा है कि सर्वेक्षण में 65 प्रतिशत से ज्यादा लोगों का मानना है कि राज्य सरकार शराबबंदी कानून को को लागू करने में विफल रही है जबकि 12.44 प्रतिशत लोग शराबबंदी को ही गलत मानते हैं.

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