प्रशांत किशोर ने लालू यादव के दावे को बताया झूठा, कहा- मैं बोल दूंगा तो शर्मिंदा हो जाएंगे

लालू ने लिखा है कि 'नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी जदयू के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर को पांच बार अलग-अलग मौकों पर अपना दूत बनाकर उनके पास भेजा. प्रशांत ने हर बार नीतीश की 'धर्मनिरपेक्ष' धड़े में वापसी पर लालू को राजी करने की कोशिश की.'

नई दिल्ली: जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के दावे को बेबुनियाद बताया है. लालू ने दावा किया है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार महागठबंधन में वापस आना चाहते थे, लेकिन उन्होंने मना कर दिया.

प्रशांत किशोर ने ट्वीट किया, लालूजी का ये दावा बेबुनियाद है. ये कुछ और नहीं बल्कि अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए एक ऐसे नेता का कमजोर प्रयास है जिसके सबसे अच्छे दिन पीछे छूट गए हैं. हां, मैंने जदयू ज्वाइन करने से पहले कई बार लालूजी से मुलाकात की थी लेकिन ऐसी कोई बात नहीं हुई थी. अगर मुझसे ये पूछा जाए कि लालूजी से क्या बात हुई तो इससे उन्हें शर्मिंदगी होगी.”

तेजस्वी यादव ने अपने पिता लालू यादव के दावे का समर्थन किया है. तेजस्वी ने कहा, “मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कहता हूं, नीतीश कुमार ने हमारे साथ वापस आने के लिए कई प्रयास किए. इसके लिए उन्होंने कई तरीके अपनाए. और उन्होंने ऐसा एनडीए में जाने के 6 महीने के अंदर ही किया.”


लालू ने किताब लिख किया दावा 
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की पुस्तक ‘गोपालगंज टू रायसीना: माई पॉलिटिकल जर्नी’ का जल्द ही लोकार्पण होने वाला है. इस किताब का नलिन वर्मा ने सह-लेखन किया है. रूपा पब्लिकेशन इंडिया द्वारा ये प्रकाशित होगी. लालू ने ये दावे इसी किताब में किए हैं.

लालू ने लिखा है कि ‘नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी जदयू के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर को पांच बार अलग-अलग मौकों पर अपना दूत बनाकर उनके पास भेजा. प्रशांत ने हर बार नीतीश की ‘धर्मनिरपेक्ष’ धड़े में वापसी पर लालू को राजी करने की कोशिश की.’

‘नीतीश पर विश्वास टूट चुका है’
लालू ने लिखा, ‘किशोर यह जताने की कोशिश कर रहे थे कि अगर मैं जदयू को लिखित में समर्थन सुनिश्चित कर दूं तो वह बीजेपी से गठबंधन तोड़कर महागठबंधन में दोबारा शामिल हो जाएंगे. हालांकि, नीतीश को लेकर मेरे मन में कोई कड़वाहट नहीं है, लेकिन मेरा उन पर से विश्वास पूरी तरह हट चुका है.’

लालू लिखते हैं, ‘हालांकि, मुझे नहीं पता कि अगर मैं प्रशांत किशोर का प्रस्ताव स्वीकार कर लेता तो 2015 में महागठबंधन वोट देने वालों और देशभर में बीजेपी के खिलाफ एकजुट हुए अन्य दलों की क्या प्रतिक्रिया होती.’

केसी त्यागी ने भी किया खंडन
बता दें कि जदयू महासचिव केसी त्यागी ने इससे पहले लालू के इस दावे का खंडन किया था. उन्होंने कहा था, ‘पार्टी के शीर्ष नेता होने के तौर पर मैं यह कहना चाहता हूं कि नीतीश ने 2017 में राजद से अलग होने के बाद दोबारा कभी वापस नहीं जाना चाहते थे. यदि ऐसी कोई इच्छा होती तो यह पार्टी की आंतरिक बातचीत में जरूर होती.