कहां गुम हैं गमगीन तेजस्वी यादव? लालू के जन्मदिन पर भी नहीं दिखे

चुनावी नतीजे आने के बाद से बिहार में कई ज्वलंत मुद्दे निकल कर सामने आए हैं लेकिन विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ही गायब हैं.

tejashwi

पटना. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे व बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी प्रसाद यादव लोकसभा चुनावों में अपनी पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद से ‘गायब’ चल रहे हैं. 28 मई को अपनी मां और पूर्व सीएम राबड़ी देवी के 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास पर लोकसभा चुनाव नतीजों को लेकर हुई समीक्षा बैठक में उपस्थिति के बाद से तेजस्वी लगातार ‘लापता’ हैं. तेजस्वी कहां हैं ये किसी को नहीं पता.

बिहार में सरकार से बाहर होने के बाद से तेजस्वी लगातार सरकार के खिलाफ मजबूत विपक्ष बनकर मुद्दे उठाते रहे थे. लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद से वह ज्वलंत मुद्दों पर भी कहीं बोलते हुए नहीं दिख रहे हैं. बिहार के मुजफ्फरपुर में हो रहे बच्चों की मौत पर भी तेजस्वी ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

इसके साथ ही तेजस्वी परिवार के दो बड़े कार्यक्रमों में भी शामिल नहीं हुए हैं. 2 जून को राबड़ी देवी द्वारा दी गई इफ्तार पार्टी से वह नदारद रहे थे. इसके बाद वह 11 जून को पिता लालू प्रसाद के 72वें जन्मदिन पर भी वह कहीं नहीं दिखे. लालू के जन्मदिन को पार्टी कार्यकर्ता ‘अवतरण दिवस’ के रूप में मनाते हैं और इस मौके पर तेजस्वी की गैरमौजूदगी से  पार्टी नेता भी हैरान थे.

पार्टी के एक नेता ने बताया, “हमें बताया गया था कि तेजस्वी दिल्ली में हैं, लेकिन उन्होंने 10 जून को पार्टी के विधायक और लालू जी के करीबी भोला यादव की बेटी की शादी में शिरकत नहीं की. हालांकि मीसा भारती मौजूद थीं. दिल्ली पार्टी कार्यालय में मनाए गए लालू जी के 72 वें जन्मदिन पर भी तेजस्वी गायब थे. इस अवसर पर भी मीसा जी उपस्थित थीं.”

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तेजस्वी के एक सहयोगी ने जानकारी दी कि तेजस्वी पिछले दो हफ़्तों से दिल्ली में ही थे, लेकिन वह अभी शहर से बाहर गए हुए हैं और कुछ दिनों में वापस आ जाएंगे. संयोग से, तेजस्वी को लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के कारण पार्टी के अंदर ही विरोध झेलना पड़ रहा है. राजद के गायघाट के विधायक महेश्वर यादव ने चुनाव के बाद तेजस्वी के इस्तीफे की मांग की थी. साथ ही बिहार के पूर्व सीएम और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा प्रमुख जीतन राम मांझी ने 30 मई को तेजस्वी को बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए महागठबंधन के नेता के रूप में स्वीकार करने से इनकार कर दिया था.

लोकसभा चुनाव में राजद, कांग्रेस, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा, आरएलएसपी और वीआईपी सहित पांच सहयोगियों में से केवल कांग्रेस ही बिहार की 40 में से एक सीट जीतने में सफल रही थी.

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