शरजील इमाम को पटना में एक दबंग पार्षद ने दी थी पनाह, सरेंडर से पहले पुलिस ने दबोचा

शरजील के मोबाइल का अंतिम लोकेशन पटना के दीघा रोड का मिला था. उसका मंगलवार की शाम तक जहानाबाद कोर्ट में आत्मसमर्पण कर देने का इरादा था.

भड़काऊ भाषण देने के आरोपी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) छात्र शरजील इमाम के बारे में बेहद चौंकाने वाली जानकारी मिली है. 26 जनवरी को दिल्ली में FIR दर्ज होने के बाद शरजील को अपनी गिरफ्तारी का अंदेशा हो गया था. गिरफ्तारी से बचने के लिए शरजील पटना आ गया था. पटना में उसे एक दबंग वार्ड पार्षद ने पनाह दी थी. सोमवार की रात शरजील ने पटना के उसी वार्ड पार्षद के ठिकाने पर बिताई.

25 जनवरी की रात, शरजील के मोबाइल का अंतिम लोकेशन भी पटना के दीघा रोड का मिला था. जब पटना में छापेमारी हुई तो उसके बाद पार्षद भी डर गया और यह तय हुआ कि शरजील जहानाबाद कोर्ट में आत्मसमर्पण कर देगा. वार्ड पार्षद ने ही मंगलवार सुबह अपने खास नुमाइंदे के साथ शरजील के गांव, काको जाने का इंतजाम किया था.

शरजील उसकी सफेद रंग की क्रेटा कार से वापस काको तक गया था. इस बीच शरजील के दो सहयोगी, जिन्हें उसका वकील बताया जा रहा है, जहानाबाद पहुंच चुके थे. इन सभी का मंगलवार की शाम तक जहानाबाद कोर्ट में आत्मसमर्पण कर देने का इरादा था. लेकिन पुलिस को इस बात की भनक लग गई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.

क्‍यों साथ रही वो क्रेटा?

पटना से जिस क्रेटा कार में शरजील अपने गांव तक पहुंचा था, उस क्रेटा कार को चलाने वाला पार्षद का खास सहयोगी मोनू श्रीवास्तव था. मोनू पूरे वक्त थाने में मौजूद रहा. वही उस कार को काको थाना से जहानाबाद कोर्ट और फिर कोर्ट से पटना भी चलाकर लाया था. अब सवाल उठता है कि आखिर दिल्ली पुलिस शरजील के साथ पार्षद के नुमाइंदे को लेकर क्‍यों आई जबकि उसके पास दो और गाड़‍ियां थीं?

शरजील की तलाश में कई जिलों में दबिश डाली जा रही थी. शरजील के खिलाफ अरुणाचल प्रदेश, असम, उत्तर प्रदेश और दिल्ली पुलिस ने देशद्रोह सहित कई धाराओं में केस दर्ज किए थे. तभी से शरजील फरार चल रहा था.

ये भी पढ़ें

BJP सांसद दिलीप घोष ने कहा, ‘शाहीनबाग में कोई प्रदर्शनकारी मर क्यों नहीं रहा, अमृत पी लिया क्या?’