चमकी बुखार से हुई बच्चों की मौतों पर नीतीश सरकार ने SC से मांगी माफी, हलफनामे में चौंकाने वाले खुलासे

बिहार के मुजफ्फरपुर में एक्‍यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) या ‘चमकी बुखार’ से मरने वाले बच्‍चों की संख्‍या 150 तक पहुंच गई है. श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज (SKMCH) में बच्चों की मौत के बाद स्थिति और गंभीर होती जा रही है.
नीतीश सरकार, चमकी बुखार से हुई बच्चों की मौतों पर नीतीश सरकार ने SC से मांगी माफी, हलफनामे में चौंकाने वाले खुलासे

पटना: बिहार में इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम वायरस से हुई बच्चों की मौतों पर नीतीश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चौंकाने वाला हलफनामा दायर किया है. गौरतलब है कि बिहार में अब तक 150 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई. अकेले मुजफ्फरपुर के SKMCH मेडिकल कॉलेज में 100 से बच्चों की जान जा चुकी है.

नीतीश सरकार, चमकी बुखार से हुई बच्चों की मौतों पर नीतीश सरकार ने SC से मांगी माफी, हलफनामे में चौंकाने वाले खुलासे

प्वाइंटर में जानिए हलफनामें में क्या कहा नीतीश सरकार ने

1- राज्य स्वास्थ्य विभाग में सभी स्तरों पर कम से कम 50% पद है रिक्त पड़े हैं.

2- स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों की 47% कमी है और 71 फीसदी नर्सों के पद खाली है.

3- नीतीश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे में देश की सर्वोच्च अदालत से माफी मांगी है.

4- मानक मानदंडों के अनुसार राज्य में उपलब्ध मानव संसाधनों में है कमी.

5- हलफनामे में बताया गया कि इस पूरे मामले में व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री की नजर थी.

6- बिहार में जानलेवा एईएस बीमारी को नियंत्रित करने और इसका इलाज करने के तरीकों को खोजने के लिए सीएम सक्रिय रूप से लगे हुए हैं.

बिहार के मुजफ्फरपुर में एक्‍यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) या ‘चमकी बुखार’ से मरने वाले बच्‍चों की संख्‍या 150 तक पहुंच गई है. श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज (SKMCH) में बच्चों की मौत के बाद स्थिति और गंभीर होती जा रही है.

धानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राज्‍यसभा को संबोधित किया. अपने भाषण में उन्होंने बिहार में हो रही बच्चों की मौत पर दुख जताया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार में इंसेफ्लाइटिस (चमकी बुखार) से हुई 150 से अधिक मासूमों की मौत को शर्म की बात कहा. पीएम के मुताबिक आज भी बुखार से बच्चों की मौत होना भारत की बड़ी असफलता है.

पीएम मोदी ने कहा, “बिहार में इस तरह से बच्चों की मौत होना हमारे लिए ‘दुख और शर्म’ की बात है. आज भी बुखार से बच्चों का मरना देश की 7 दशक की विफलताओं में से एक है. हमें मिलकर इन विफलताओं से निपटने का उपाय खोजना होगा.”

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