चमकी के कहर से पलायन कर गए इस गांव के लोग, अब तक 7 बच्चों की मौत

चमकी बुखार का खौफ इस कदर कायम है कि इस गांव में सिर्फ मवेशी और कुछ लाचार बुजुर्ग ही रह गए हैं.

वैशाली के हरिवंशपुर गांव में चमकी बुखार से सात बच्चो की मौत हो गई है. अब आलम ये है कि खौफजदा पूरा गांव पलायन कर गया है.सब अपने अपने बच्चों को लेकर सुरक्षित जिलों में चले गए हैं. पूरे गांव में सन्नाटा पसरा है.

अब चमकी बुखार का खौफ इस कदर कायम है कि इस गांव में सिर्फ मवेशी और कुछ लाचार बुजुर्ग ही रह गए हैं.

इस गांव के हर घर के दरवाजे पर नीम की कुछ टहनियां टंगा रखी हैं जो बता रही हैं कि बीमारी फैलने पर लोगों ने पहले टोटका किया होगा. इस पूरे गांव में एक लकवाग्रस्त और एक मानसिक रूप से बीमार बुजुर्ग ही शेष रह गए हैं.

गांव के निवासी चतुरी सहनी चार बच्चो के पिता हैं, इनके दो बेटे चमकी बुखार की भेंट चढ़ चुके है. शेष दो बेटे अपनी मां के साथ नानी के घर चले गए हैं. चतुरी सहनी अपने सूने आंगन में आज भी दो बेटों को खोने का मातम मना रहे है. लेकिन गांव के सारे मवेशी इन्हीं के भरोसे हैं.

जिस गांव ने सात बच्चो को खोया है वहां चारों तरफ गरीबी और भुखमरी का साम्राज्य है. गांव में तीन सरकारी नल तो लगे हैं लेकिन सब सूख चुके हैं. पानी की एक बूंद भी मयस्सर नहीं है. आंगनबाड़ी से लेकर जन वितरण प्रणाली भी यहां तक पहुंचने के पहले ही दम तोड़ चुके हैं.