नीतीश कुमार और बीजेपी के बीच शुरू हुई सियासी ‘रामलीला’

बिहार में बाढ़ को लेकर जिस प्रकार से बीजेपी नीतीश कुमार को निशाना बना रही है, उससे स्‍पष्‍ट है कि बीजेपी इस बार नीतीश कुमार के दबाव में आने वाली नहीं है.
bihar assembly elections 2020, नीतीश कुमार और बीजेपी के बीच शुरू हुई सियासी ‘रामलीला’

नई दिल्‍ली: क्‍या बिहार एनडीए में सबकुछ ठीक है? कहीं ऐसा तो नहीं कि 2020 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और जेडीयू अलग रास्‍ते पर जाने की तैयारी में हैं? बिहार में बाढ़ को लेकर जिस प्रकार से बीजेपी नीतीश कुमार को निशाना बना रही है, उससे स्‍पष्‍ट है कि बीजेपी इस बार नीतीश कुमार के दबाव में आने वाली नहीं है.

बिहार में बाढ़ से मरने वालों की संख्‍या 70 के पार हो गई है. 27 से 30 सितंबर के बीच हुई मूसलाधार बारिश के चलते राजधानी पटना सहित 15 जिलों में सैलाब आ गया. 1975 के बाद पहली बार पटना में लोगों ने ऐसी बाढ़ देखी. कुछ लोगों का तो यहां तक कहना है कि 75 की बाढ़ में भी इतना बुरा हाल नहीं हुआ था.

ऐसे में मीडिया और विपक्ष के साथ नीतीश कुमार के साथ सरकार में शामिल बीजेपी भी मुखर हो गई है. इसी क्रम अमें ताजा बयान गिरिराज सिंह का आया है, जिन्‍होंने रामलीला बंद करने के नीतीश कुमार के फैसले को अनुचित ठहराया है.

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने दरभंगा जिले के एक पंडाल में मां दुर्गा के दर्शन के बाद कहा, ‘देश अदृश्य शक्ति से चलता है. वह अदृश्य शक्ति देवी दुर्गा, कृष्ण और अन्य देवी देवता का है और इस शक्ति का महत्त्व समाज में भी स्वीकार है.’

बिहार सरकार द्वारा पटना में रामलीला बंद करने पर गिरिराज सिंह ने बिहार सरकार के फैसले को अनुचित बताते हुए कहा कि यह फैसला सरकार ने कैसे ले लिया, उनकी समझ से परे है. उन्होंने नीतश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा की हिंदू धर्म को खत्म करने का यह प्रयास है, जबकि रामलीला होने से राम के चरित्र का वर्णन होता है. राम के चरित्र से समाज के हर धर्म को सिख मिलती है. समाज के सभी को इसे अपनाना चाहिए.

यह पहला बार नहीं है जब गिरिराज सिंह ने हिंदुत्‍व के मुद्दे पर नीतीश कुमार को घेरा हो. इससे पहले भी नीतीश कुमार और बीजेपी के बीच बयानों के तीर चल चुके हैं.

बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय जायसवाल ने भी बाढ़ को लेकर नीतीश कुमार पर निशाना साधा. उन्होंने मंगलवार को लिखा- बाढ़ से जो तबाही हुई है, उसके लिए नीतीश कुमार और उनकी सरकार जिम्मेदार है. राज्य सरकार की लापरवाही की वजह से पटना में इस तरह के भयावह हालात बने हैं. उन्होंने कहा, ‘मैं पटना में बने हालात को लेकर तीन दिन से परेशान हूं. बिहार सरकार को चाहिए कि वह अगले दस दिनों में हालात का जायजा लें और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करें.’

खुद सुशील कुमार मोदी भी बाढ़ के मसले पर नीतीश कुमार को घेरते दिखे. मतलब एकदम स्‍पष्‍ट है कि बिहार में सरकार की नाकामी को लेकर बीजेपी ठीकरा सीधे नीतीश कुमार पर फोड़ रही है. दूसरी ओर नीतीश कुमार भी भड़के हुए हैं, वह कह रहे हैं- ‘मैं प्रचार नहीं कराता है काम करता हूं.’

नीतीश कुमार और बीजेपी के बीच 2013 से छत्‍तीस का आंकड़ा चल रहा है. नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्‍मीदवार घोषित जाने के बाद नीतीश कुमार एनडीए से अलग हो गए थे. इसके बाद 2014 लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व में बीजेपी को प्रचंड जीत मिली थी. हालांकि, 2015 बिहार विधनसभा चुनाव में लालू यादव और कांग्रेस के साथ गठबंधन करके नीतीश कुमार ने बिहार में मोदी का रथ रोक दिया था, लेकिन महागठबंधन के साथ नीतीश कुमार का साथ लंबा नहीं चला और उन्‍होंने एनडीए में वापसी कर ली.

नीतीश कुमार की एनडीए में वापसी तो हुई, लेकिन इस बार दोनों ही तरफ से सम्‍मान का भाव पहले जैसा नहीं दिखा. नतीजा यह हुआ कि नीतीश कुमार और अमित शाह को 2019 लोकसभा से पहले सीट बंटवारे को लेकर लंबी बैठकें करनी पड़ीं. नीतीश कुमार बराबरी पर अड़ थे और बीजेपी उस समय जदयू के अलग जाने का जोखिम नहीं उठाना चाहती थी, लेकिन 2019 लोकसभा चुनावों के नतीजों ने ब्रैंड मोदी और बड़ा बना दिया. ऐसे में यह तय दिख रहा है कि नीतीश कुमार के लिए आगे की राह एनडीए में आसान नहीं होगी.

इस बार नीतीश कुमार के पास बीजेपी से शर्तें मनवाने की ताकत नहीं है. बीजेपी में एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो बिहार में अकेले चुनाव लड़ने की वकालत कर रहा है. जिस प्रकार से बाढ़ और रामलीला समेत विभिन्‍न मुद्दों पर बीजेपी और जेडीयू में टकराव हो रहा है, उससे स्‍पष्‍ट है कि बीजेपी जल्‍द नीतीश कुमार के खिलाफ ‘ऑल आउट वॉर’ पर जा सकती है. सीधे शब्‍दों में कहें तो बीजेपी बिहार में एकला चलो की नीति पर चल पड़ी है.

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