लूटघर : बिल्डर से धोखा खाने के बाद होम बायर्स को सुप्रीम कोर्ट से उम्मीदें

होम बायर्स (Home Buyers) को बिल्डर ने ठगा तो सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया. कोर्ट से न्याय तो मिला पर घर के लिए इंतजार अभी जारी है.

प्रतीकात्मक तस्वीर

‘लूटघर’ (Lootghar) सीरीज में आज हम आपको उन होम बायर्स की कहानी बताएंगे, जो नोएडा (Noida) के हार्टबीट सिटी प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक कर पिछले 12 साल से पछता रहे हैं. धोखाधड़ी की हद तो तब हो गई जब सुप्रीम कोर्ट में दो नए बिल्डरों ने दावा कर दिया कि हार्टबीट सिटी प्रोजेक्ट आम्रपाली का प्रोजेक्ट है ही नहीं.

राहत की बात ये है कि अब कोर्ट की निगरानी में प्रोजेक्ट के पूरा होने का रास्ता साफ हो गया है हालांकि होम बायर्स का इंतजार खत्म नहीं हुआ है. नोएडा के सेक्टर 107 में आम्रपाली बिल्डर ने Heartbeat City प्रोजेक्ट 2008 में लॉन्च किया था. आरोप है कि तीन फेज में करीब 2000 फ्लैट बनने थे और 2014-15 तक खरीदारों को उनके आशियाने का मालिकाना हक मिल जाना था लेकिन 12 साल बाद भी यहां सिर्फ कंक्रीट के ढांचे खड़े हैं.

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70 साल के JP पराशर ने रिटायरमेंट से मिले पैसे लगाकर 2011 में करीब 75 लाख रुपए में एक फ्लैट बुक कराया था. लोगों को चिंतामुक्त जीवन का पाठ पढ़ाने वाले पुनीत ने 2008 में 1700 स्क्वॉयर फीट का एक फ्लैट करीब 74 लाख में बुक कराया. आरोप है कि तय समय सीमा तक प्रोजेक्ट का 30% काम भी पूरा नहीं हुआ. फिर धरना-प्रदशर्न का लंबा दौर चला और होम बायर्स ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

न्याय मिला पर इंतजार जारी

बिल्डर की धोखाधड़ी से परेशान होम बायर्स को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान थ्री प्लैटिनम सॉफ्टेक प्राइवेट लिमिटेड और पेबल्स प्रोलीज प्राइवेट लिमिटेड नामकी दो कंपनियों ने हार्टबीट सिटी पर अपना दावा ठोक दिया. हालांकि लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 28 जुलाई को उच्चतम न्यायालय ने साफ कर दिया कि ये प्रोजेक्ट किसी और का नहीं बल्कि आम्रपाली बिल्डर का ही है.

इस मामले की पड़ताल के लिए टीवी 9 भारतवर्ष की टीम जब आम्रपाली बिल्डर के दफ्तर पहुंची तो पता चला कि कॉरपोरेट ऑफिस तो 2 साल पहले ही सील हो चुका है. फिलहाल हार्टबीट सिटी के होम बायर्स के लिए राहत की बात ये है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रोजेक्ट के लिए एक वकील को रिसीवर बनाया है.

उम्मीद लगाए होम बायर्स

प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए नए सिरे से टेंडर निकाले जा रहे हैं. उम्मीद है कि कोर्ट की निगरानी में जल्द ही कंस्ट्रक्शन का काम किसी कॉन्सॉर्टियम को सौंप दिया जाएगा और सालों से हताश-परेशान खरीदार अपनी छत होने का जो सपना देख रहे थे वो पूरा हो जाएगा.

अगर आप भी किसी बिल्डर की जालसाजी का शिकार हुए हैं या फिर आप भी सालों से अपने सपनों के घर को पाने का इंतजार कर रहे है या आपके पास किसी तरह का कोई सुझाव है तो आप हमें lootghar@tv9.com पर ईमेल कर सकते हैं. अगर कोई बिल्डर भी अपना पक्ष रखना चाहता है तो वो भी दिए गए मेल पर अपनी बात लिख सकता है.

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