लूटघर : बिल्डर के जेल जाने के बाद प्रोजेक्ट हुआ सील, 11 साल से है घर का इंतजार

गाजियाबाद (Ghaziabad ) में एक हाउसिंग प्रोजेक्ट के बिल्डर को धोखाधड़ी के चलते गिरफ्तार कर लिया गया. 11 साल से होम बायर्स को घर का इंतजार है क्योंकि हाउसिंग प्रोजेक्ट (Housing Project) सील कर दिया गया है.

फोटो : प्रतीकात्मक

‘लूटघर’ (Lootghar) सीरीज में आज हम आपको बिल्डर की जालसाजी के शिकार ऐसे लोगों की दास्तान बताएंगे, जो पिछले 11 साल से अपने आशियाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं. फर्जीवाड़ा कर फ्लैट बेचने वाले बिल्डर (Builder) को जेल की हवा तो खानी पड़ी लेकिन साथ ही पूरे प्रोजेक्ट को भी सील कर दिया गया.

बायर्स ने कोर्ट में दस्तक दी तो प्रोजेक्ट को एक consortium को सौंप दिया गया है लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक हीलाहवाली में बिल्डिंग बनाने का काम ठप्प पड़ा है. बिल्डर की धोखाधड़ी से बेहाल अल्फा स्टैंप प्रोजेक्ट, गाजियाबाद के JNC Green Woods के इन होम बायर्स को अब सूबे के मुख्यमंत्री का ही आसरा है.

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इन्हें उम्मीद है कि सीएम का आदेश होगा तो सपनों के आशियाने के लिए इनका संघर्ष खत्म हो जाएगा. इन्हें उम्मीद है कि प्रोजेक्ट पर लगा प्रशासन का ताला खुल जाएगा और मकान के लिए 11 सालों से जारी उनका इंतजार खत्म हो जाएगा.

प्रशासनिक पेचीदगियों में फंसे इन होम बायर्स की जिंदगी में दरअसल मुश्किलों का दौर तो उसी दिन शुरू हो गया जब इन्होंने गाजियाबाद के इस प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक किया. आरोप है कि बिल्डर जितेन्द्र तनेजा ने सिर्फ 10 फीसदी रकम देकर यूपी आवास विकास से वसुंधरा में जमीन हासिल की और हाउसिंग प्रोजेक्ट लॉन्च कर 2009 से फ्लैट बेचना शुरू कर दिया.

डिफाल्टर घोषित हुआ बिल्डर

बायर्स के मुताबिक उन्हें भरोसा दिया गया कि 2013-14 में उन्हें फ्लैट का मालिकाना हक दे दिया जाएगा लेकिन आवास विकास ने बाकी रकम ना चुकाने के आरोप में बिल्डर और उसकी कंपनी JNC बिल्डिंग को डिफाल्टर घोषित कर दिया और 2016 में प्रोजेक्ट को सील कर बिल्डर को गिरफ्तार कर लिया गया. तब तक 400 से ज्यादा फ्लैट्स के इस प्रोजेक्ट में बिल्डर करीब 200 परिवारों को अपने जाल में फंसाने में कामयाब हो चुका था.

JNC Green Woods के खरीदारों ने फिर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्युनल का दरवाजा खटखटाया. राहत की सांस तब मिली जब NCLT ने इस साल मार्च में आदेश जारी कर बिल्डिंग से सील हटाने का आदेश दिया.

पिछले महीने हो गई पुख्ता सीलिंग

बायर्स के मुताबिक फिर 4 अगस्त 2020 को कोर्ट ने प्रोजेक्ट के अधूरे काम को पूरा करने की जिम्मेदारी एक कॉन्सॉर्टियम को सौंपा तो नए बिल्डर्स ने प्रोजेक्ट का काम शुरू कर दिया लेकिन फिर NCLT के आदेश के बाद बावजूद अब तक कागजी तौर पर सील प्रोजेक्ट को जिला प्रशासन ने पिछले महीने 24 तारीख को पुख्ता सीलिंग कर दी.

11 सालों से मकान का किराया और बैंक की EMI की दोहरी मार झेल रहे लोगों के अधूरे सपने को पूरा करने का काम NCLT ने गौतम बिल्डर और रैपिड कॉन्ट्रैक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की दो कंपनियों को सौंपा है. नए बिल्डर्स ने भरोसा दिया है प्रोजेक्ट की सीलिंग हटने के 9 महीने के अंदर कम से कम दो टावर का काम पूरा कर लिया जाएगा. फिर बाकी दो टावर भी जल्द हैंडओवर कर दिए जाएंगे.

अब होम बायर्स का भविष्य जहां प्रशासन के फैसले पर टिका है ऐसे में सवाल ये है कि आखिर हमारा सिस्टम बिल्डर को सैंकड़ों लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने की इजाजत ही क्यों देता है? आखिर क्या वजह है कि बार-बार धोखेबाज बिल्डर कानून को झांसा देने में कामयाब हो जाते हैं और होम बायर्स दर-दर भटकने को मजबूर हो जाते हैं.

अगर आप भी किसी बिल्डर की जालसाजी का शिकार हुए हैं या फिर आप भी सालों से अपने सपनों के घर को पाने का इंतजार कर रहे है या आपके पास किसी तरह का कोई सुझाव है तो आप हमें lootghar@tv9.com पर ईमेल कर सकते हैं. अगर कोई बिल्डर भी अपना पक्ष रखना चाहता है तो वो भी दिए गए मेल पर अपनी बात लिख सकता है.

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