GST मामला: केंद्र सरकार ने 20 राज्यों को 68825 करोड़ रुपये उधार लेने की इजाजत दी

वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) के व्यय विभाग ने 20 राज्यों को बाजार से 68,825 करोड़ रुपये उधार लेने की अनुमति दे दी है. केंद्र की तरह से दिए दो विकल्पों में से जो राज पहला ऑप्शन चुनेंगे उन्हें अतिरिक्त कर्ज लेने का मौका मिलेगा.

केंद्र सरकार ने 20 राज्यों को आमदनी की कमी को पूरा करने के लिए मंगलवार 68,825 करोड़ रुपये उधार लेने की इजाजत दे दी है. इससे पहले सोमवार को हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में राज्यों के GST कलेक्शन में होने वाले नुकसान की भरपाई को लेकर चल रहे गतिरोध को दूर करने के लिए सर्वसम्मति नहीं बन पाई थी. इसके एक दिन बाद केंद्र का ये फैसला आया है. केंद्र सरकार ने रेवेन्यु शॉर्टफॉल के अलावा लग्जरी और गैर- जरूरी अहितकर वस्तुओं पर लगाए जा रहे जीएसटी सेस को 2022 के बाद भी जारी रखने का प्रस्ताव दिया है. इससे राज्यों को कर्ज चुकाने में मदद मिलेगी.

बता दें चालू वित्त वर्ष में अनुमान लगाया जा रहा है कि जीएसटी कलेक्शन में 2.35 लाख करोड़ रुपये की कमी आई है. वहीं रिपोर्ट्स की मानें तो राज्यों पर पिछले 3 साल में 39% तक आंतरिक कर्ज बढ़ा है.

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सरकार ने एक ऑफिशियल बयान में कहा कि वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने मंगलवार को 20 राज्यों को बाजार से 68,825 करोड़ रुपये उधार लेने की अनुमति दे दी है. केंद्र की तरह से दिए दो विकल्पों में से जो राज पहला ऑप्शन चुनेंगे उन्हें अतिरिक्त कर्ज लेने का मौका मिलेगा.

केंद्र ने राज्यों के सामने उधार लेने के लिए रखे दो विकल्प

बता दें कि केंद्र ने पिछले महीने राज्यों के सामने दो विकल्प रखे थे. पहले विकल्प के हिसाब से राज्य आरबीआई (RBI) की स्पेशल विंडो से 97,000 करोड़ की उधारी ले सकती है और दूसरे विकल्प के मुताबिक राज्य बाजार से 2.35 करोड़ का फंड लेकर भी नुकसान की भरपाई कर सकते हैं. वहीं 13 राज्यों में से 12 ने आरबीआई (RBI) के विशेष विंडो से उधार लेने का विकल्प चुना है. यह राज्य आंध्र प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मेघालय, सिक्किम, त्रिपुरा, यूपी, उत्तराखंड और ओडिशा शामिल हैं, हालांकि मणिपुर ने अभी तक बाजार से उधार लेने का विकल्प चुना है. वहीं गैर बीजेपी शासित रज्य केंद्र के इन विकल्पों से सहमत नहीं हैं.

27 अगस्त, 2020 को जीएसटी परिषद की 41 वीं बैठक में इस बात पर भी चर्चा की गई कि मौजूदा आर्थिक सिनेरियो में यह संभव नहीं है कि कर की दरों को बढ़ाया जाए या मुआवजे की कमी को पूरा करने के लिए दर को तर्क संगत बनाया जाए. हालांकि उधार लेना इस चुनौती को दूर करने का एक विकल्प हो सकता है. बता दें कि केंद्र सरकार ने राज्यों से वादा किया था कि जीएसटी के राजस्व में होने वाली कमी की भरपाई केंद्र करेगी लेकिन अब राज्यों से कहा जा रहा है कि वह उधार लेकर इस कमी को पूरा करे.

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