लूटघर : 2012 में बुक किया फ्लैट, 88 लाख रुपए बिल्डर को देने के बाद भी नहीं मिला अपना घर

बिल्डरों (Builders) से ठगे जाने के बाद होम बायर्स सरकारी दफ्तरों (Government office) के चक्कर काटने को मजबूर हैं. उनकी शिकायत सुनने वाला कोई नहीं है.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 10:21 pm, Thu, 17 September 20
प्रतीकात्मक फोटो

‘लूटघर’ (Lootghar) में हम आपको ऐसे होम बायर्स (Home Buyers) की कहानी बताते हैं, जिन्होंने अपने घर के सपने को पूरा करने के लिए अपनी उम्रभर की जमापूंजी बिल्डर को सौंप दी लेकिन जालसाज बिल्डर ने उन्हें घर के बदले धोखा दिया. दर्शक/पाठक खुद मेल करके अपनी कहानी हमसे साझा करते हैं.

गुड़गांव के मनीष वार्ष्णेय ने हमें एक फर्जीवाड़े की खबर दी है. उनके मुताबिक उन्होंने 2012 में एसोटेक ब्लिथ प्रोजेक्ट में 3 BHK का फ्लैट बुक किया. गुड़गांव के इस प्रोजेक्ट में कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक चार साल के अंदर यानी 2016 तक मकान का पजेशन मिलना था. अब तक वो करीब 90 फीसदी अमाउंट यानी 88 लाख रुपए बिल्डर को दे चुके हैं लेकिन मकान नहीं मिला.

चक्कर काटने को मजबूर

गाजियाबाद से सौरभ कुमार की शिकायत है कि उन्होंने ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सुपरटेक इकोविलेज-1 में 2014 में फ्लैट बुक किया था. 2017 में मकान मिलना था. 2018 तक घर नहीं मिला तो यूपी रेरा का दरवाजा खटखटाया. पिछले साल सितंबर में यूपी रेरा ने बिल्डर को फरवरी 2020 तक मकान तैयार करने या पैसा रिफंड करने का आदेश दिया. 20 लाख रुपए रिफंड मिलना था. मार्च से लगातार वो सुपरटेक और रेरा के चक्कर काट रहे हैं लेकिन रिफंड नहीं मिला. इन शिकायतों से साफ है कि तमाम सरकारी उपाय सफेद हाथी की तरह हैं जिनके पास फरियाद लगाने और ना लगाने में कोई फर्क नहीं.

अगर आप भी किसी बिल्डर की जालसाजी का शिकार हुए हैं या फिर आप भी सालों से अपने सपनों के घर को पाने का इंतजार कर रहे है या आपके पास किसी तरह का कोई सुझाव है तो आप हमें lootghar@tv9.com पर ईमेल कर सकते हैं. अगर कोई बिल्डर भी अपना पक्ष रखना चाहता है तो वो भी दिए गए मेल पर अपनी बात लिख सकता है.