अमेरिका ने क्‍यों किया भारत को विकासशील देशों की लिस्ट से बाहर? जानें फैसले का क्या पड़ेगा हम पर असर

अमेरिका ने कहा है कि चूंकि भारत, ब्राजील, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और अर्जेंटीना जैसे देश G20 समूह का हिस्‍सा हैं, इसलिए उन्‍हें विकसित देशों की सूची में रखा जा सकता है.

अमेरिका ने भारत को ‘विकसित अर्थव्‍यवस्‍था’ मान लिया है. यूनाइटेड स्‍टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव्‍स’ (USTR) ऑफिस ने भारत को यह दर्जा दिया है. यानी अब विकासशील देशों को मिलने वाली अमेरिकी मदद भारत को नहीं मिल सकेगी. साथ ही उसके जनरलाइज्‍ड सिस्‍टम ऑफ प्रिफरेंसेज (GSP) स्‍कीम का फायदा भी हम नहीं उठा सकेंगे.

अमेरिका के इस कदम का हमारी अर्थव्‍यवस्‍था और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर कैसा असर होगा, उसे समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि यह फै‍सला आखिर लिया क्‍यों गया.

क्‍या है अमेरिका का तर्क?

USTR किसी देश के आर्थिक विकास का लेवल दो बातों से तय करता है – पर कैपिटा ग्रॉस नेशनल इनकम (GNI) और वर्ल्‍ड ट्रेड में उस देश का शेयर. अमेरिका के मुताबिक, एक विकासशील देश का GNI 12,375 डॉलर से कम होना चाहिए. वर्ल्‍ड बैंक का डेटा बताता है कि भारत का GNI इस लिमिट से कम ही है.

इसके अलावा ग्‍लोबल ट्रेड में उस देश हिस्‍सा 0.5 पर्सेंट से कम होना चाहिए. भारत बहुत पहले ही यह शर्त पार कर चुका है. 2017 के आंकड़े बताते हैं कि एक्‍सपोर्ट्स में भारत का शेयर 2.1 पर्सेंट और इम्‍पोर्ट्स के ग्‍लोबल ट्रेड में उसका हिस्‍सा 2.6 पर्सेंट था.

USTR ने यह भी कहा है कि चूंकि भारत, ब्राजील, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और अर्जेंटीना जैसे देश G20 समूह का हिस्‍सा हैं, इसलिए उन्‍हें विकसित देशों की सूची में रखा जा सकता है.

छूट खत्‍म होने से कुछ सेक्‍टर्स को नुकसान

GSP वो सिस्‍टम है जिसके जरिए अमेरिका दूसरे देशों के एक्‍सपोर्टर्स को टैरिफ-फ्री एक्‍सेस देता है. साल 2018 में अमेरिका ने भारत को GSP में बरकरार रखने या ना रखने के लिए रिव्‍यू शुरू किया. इसकी रिपोर्ट के आधार पर, राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने फैसला किया क‍ि 5 जून 2019 से भारत को GSP के तहत मिलने वाले फायदे बंद हो जाएंगे.

भारत इस स्‍कीम का सबसे बड़ा लाभार्थी था. USTR के डेटा के अनुसार, भारत को 2018 में GSP के तहत 260 मिलियन डॉलर की छूट दी गई थी. जब अमेरिका ने GSP का लाभ देना बंद किया तो भले ही भारत के अमेरिका के साथ ट्रेड पर बेहद कम असर पड़ा हो, मगर कुछ खास सेक्‍टर्स जैसे – लेदर, फार्मास्‍यूटिकल्‍स, केमिकल्‍स, जूलरी और एग्रीकल्‍चरल प्रोडक्‍ट्स की लागत बढ़ी है. इन सेक्‍टर्स में कॉम्‍प्‍टीशन भी बढ़ा है.

अगस्‍त 2019 में ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (TPCI) ने एक रिपोर्ट में कहा कि जो प्रोडक्‍ट्स पहले GSP के तहत आते थे, उनका एक्‍सपोर्ट 32 फीसदी बढ़ा है. यूएस इंटरनेशनल ट्रेड कमीशन के आंकड़ों के अनुसार, जून 2019 में भारत ने 65.7 करोड़ डॉलर मूल्य के ऐसे प्रोडक्‍ट्स का एक्‍सपोर्ट किया. पिछले साल जून में यह आंकड़ा 49.57 करोड़ डॉलर था.

किस प्रोडक्‍ट ग्रुप पर कैसा असर?

ऑब्‍जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) का एक एनालिसिस बताता है कि GSP दर्जा खत्‍म होने का कैसा असर होगा. इसके मुताबिक, ऑर्गेनिक केमिकल्‍स, स्‍टील एंड आयरन प्रोडक्‍ट्स, प्‍लास्टिक प्रोडक्‍ट्स, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, लेदर एंड ट्रेवल गुड्स, मेटल प्रोडक्‍ट्स पर अमेरिकी फैसले का नेगेटिव असर होगा. न्‍यूक्लियर मशीनरी एंड पार्ट्स, व्‍हीकल्‍स, रबड़, फर्नीचर, एल्‍युमिनियम प्रोडक्‍ट्स पर अमेरिका के इस फैसले का मिनिमम या न्‍यूट्रल असर होगा.

ह्यूमन डेवलपमेंट के बहुत से इंडिकेटर्स यह दिखाते हैं कि भारत अब भी एक ‘विकासशील देश’ है और ‘विकसित देश’ बनने के लिए उसे अभी लंबा सफर तय करना है. भारत के लिए चुनौती डोमेस्टिक सेक्‍टर्स के लिए नए एक्‍सपोर्ट्स मार्केट्स को खोजना है.

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