अंबानी, महिंद्रा नहीं उनके सीईओ पर है चीन की नजर, कॉर्पोरेट जिहाद की ओर बढ़ रहा ड्रैगन

चीन की निगरानी में रिलायंस इडस्ट्री (Reliance Industries ) के मुखिया मुकेश अंबानी ( Mukesh Ambani ) नहीं बल्कि रिलायंस ब्रांड के सीटीओ (चीफ टेक्निकल ऑफिसर) पी के थॉमस हैं.
China spying, अंबानी, महिंद्रा नहीं उनके सीईओ पर है चीन की नजर, कॉर्पोरेट जिहाद की ओर बढ़ रहा ड्रैगन

चीन भारत के करीब 10,000 लोगों पर निगरानी कर रहा है. इंडियन एक्सप्रेस की ये रिपोर्ट जब सामने आई तब से राजनीति से लेकर बिजनेस जगत में यह चर्चा का विषय हुआ है. इस रिपोर्ट के मुताबिक पीएम मोदी से सोनिया गांधी तक चीन की निगरानी में हैं तो वहीं भारतीय उद्योग जगत की बड़ी कंपनियां रिलायंस, महिंद्रा से लेकर कई स्टार्टअप्स कंपनियों पर भी चीन की नजर है. लेकिन इसमें सबसे खास बात है कि चीन की निगरानी में रिलायंस इडस्ट्री के मुखिया मुकेश अंबानी नहीं बल्कि रिलायंस ब्रांड के सीटीओ (चीफ टेक्निकल ऑफिसर) पी के थॉमस हैं. ठीक इसी तरह चीन महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा की निगरानी नहीं कर रहा बल्कि कंपनी के सीएफओ अनिश शाह का डाटा खंगाल रहा है. यहां यह बात रोचक है कि राजनीति के क्षेत्र में चीन सीधे मुखिया की निगरानी कर रहा है जबकि उद्योग जगत की कहानी थोड़ी अलग है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.

किन किन हो रही है निगरानी

चीन की नजर केवल रिलायंस और महिद्रा तक ही नहीं टिकी है, बल्कि यहां भी फेहरिश्त लंबी है. जिसमें अजीम प्रेमजी ग्रुप की कंपनी प्रेमजी इन्वेस्ट के सीएफओ, मार्गेन स्टैनली के कंट्री हेड विनीत शेखसरिया, जोमैटो के सीईओ दीपेंदर गोयल, स्विगी के सीईओ नंदन रेड्डी, नायका की सीईओ फाल्गुनी नायर, उबर इंडिया हेड पवन वैश जैसे मान शामिल है.

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कारपोरेट जिहाज की ओर बढ़ रहा चीन

अगर आपको याद हो की गुड़गांव के मनेसर प्लांट में कुछ साल में मेगा हड़ताल की गई थी. दरअसल हड़ताल का मकसद ही होता कि काम रुक जाए. लेकिन इस हड़ताल ने मैनेजमेंट के साथ साथ कंपनी के डाटा माइनिंग प्रोसेस को भी पूरी तरह से ठप कर दिया है. कुछ ऐसा ही काम अब चीन करना चाह रहा है. बाजार के जानकार बताते हैं कि दरअसल चीन सीईओ, सीटीओ, सीएफओ, कंट्री हेड को इसलिए टारगेट कर रहा है क्योंकि कंपनी के फाइनेंशियल्स, ऑडिट रिपोर्ट से लेकर तमाम अहम दस्तावेज इन लोगों के पास ही होते है. अगर चीन इनके डाटा निकालने में कामयाब हो गया समझिए कि 80 फीसदी काम हो गया. अजय केडिया के मुताबिक चीन कार्पोरेट इंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहा है और कंपनी के ऊंचे ओहदों पर बैठे लोगों की डाटा माइनिंग से डैगन काफी कुछ हासिल कर सकता है.

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डिजिटल पर है खास नजर

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट को ध्यान से पढ़े तो चीन हर सेक्टर की डिजिटल कंपनियों पर फोकस कर रहा है.

  • मेडिकल के क्षेत्र में चीन सिप्ला की डिजिटल कंपनी वेल्दी थेरेप्यूटिक्स पर नजर रख रहा है
  • शिक्षा के क्षेत्र में चीन की नजर बायजूस, अड्डा 247, ओलिवबोर्ड जैसे लर्निगं एप्स पर है.
  • पेमेंट एप्स में चीन पाइन लैब्स, पेटीएम, रोजरपे, फोनपे जैसी कंपनियों पर निगरानी कर रहा है.
  • डिलिवरी एप्स की बात करें तो यहां चीन की नजर जोमैटो, स्विगी, फूड फांडा के साथ साथ सुपरमार्केट स्टोर बिगबॉस्केट, डेली बाजार जैसी कंपनियों पर है.
  • अरबन ट्रांसपोर्ट एप्स में रेपिडो, सिटीफ्लो, यूलू जैसी कंपनियों के डाटा पर चीन ने नजर बनाई हुई है.

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