बैकिंग रेग्युलेशन बिल में संशोधन से आपको ऐसे मिलेगा फायदा, नुकसान का हर्जाना जनता पर नहीं

Banking Regulation Bill, बैकिंग रेग्युलेशन बिल में संशोधन से आपको ऐसे मिलेगा फायदा, नुकसान का हर्जाना जनता पर नहीं

सालों से इतंजार करने वाला बैंकिग रेग्युलेशन बिल (संशोधन) बुधवार को लोकसभा में पास हो गया. दरअसल इस बिल में बैंकिंग रेग्युलेशन एक्ट, 1949 में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया था. अब इस बिल के पास होने के बाद देश के सहकारी बैंक भी भारतीय रिजर्व बैंक ( RBI) की निगरानी में आ गए. अब आरबीआई सहकारी बैंकों को पर नजर रख सकेगा. इस कदम के बाद पीएमसी जैसे घोटालों पर लगाम लगई जा सकेगी. पीएमसी घोटाला सहकारी बैंकों में सबसे चर्चित घोटाला रहा है. इस घोटाले में लाखों निवेशकों की गाढ़ी कमाई के पैसे डूब गए थे. केवल पीएमसी ही नहीं बल्कि देश के कई सहकारी बैंकों में घोटाला हुआ जिसका नुकसान आम जनता को उठाना पड़ा.

आम जनता पर नहीं पड़ेगा नुकसान का भार

बैंकिंग रेग्युलेशन बिल में संशोधन के बाद अब बैंको के साथ अगर कुछ गड़बड़ी होती है तो उस नुकसान का हर्जाना निवेशकों पर नहीं होगा. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि “ इस संशोधन के जरिए हम उन ग्राहकों को सुरक्षित करना चाहते हैं जिन्होंने सहकारी बैकों में पैसा जमा किया है. दरअसल ऐसा पाया गया कि सहकारी बैंक घोटाला करने के बाद पैसा लेकर गायब हो जाते थे और बाद में अपने आप को दिवालिया घोषित कर देते थे. अब ऐसा नहीं हो सकेगा. आरबीआई इस बात की निगरानी करेगी कि निवेशकों का पैसा न डूब सके.

सहकारी बैंकों की मौजूदा हालात

  • देश भर में 1500 से अधिक सहकारी बैंक मौजूद
  • इन बैंकों में 4.85 लाख करोड़ से ज्यादा की पूंजी जमा
  • इन बैंकों के पास 8.6 करोड़ ग्राहक

देश के चर्चित सहकारी बैंक घोटाले

  • पीएमसी घोटाला
  • गुरु राघवेंद्र को-ऑपरेटिव बैंक घोटाला
  • सीकेपी सहकारी बैंक स्कैम
  • पीपुल्स सहकारी बैंक मामला

ऐसे दूर की जाएगी समस्या

देश में सहकारी बैंकों की हालत लगातार खराब होती जा रही है. आरबीआई के निगरानी में आने के बाद डिपॉजिटर्स के साथ बैंक भी सुरक्षित रह सकेंगे. हालांकि इन बैंको पर कुछ दिन का मोरोटोरियम लागू किया जाएगा उसके बाद धीरे धीरे समस्या का निपटान कर दिया जाएगा.

कोरोना के चलते हुई देरी

बैकिंग रेग्युलेशन बिल (संशोधन) को मार्च के बजट सेशन में ही पास करना था लेकिन कोरोना के चलते ऐसा हो न सका. बिल संशोधन से पहले जून में ही एक अध्यादेश भी पास कर दिया गया था जिसके बाद सहरी क्षेत्रों के 1482 और ग्रामीण इलाकों के 58 सहकारी बैकों को आरबीआई की निगरानी में डालने की बात की गई थी. हालांकि इस बिल के पास होने का मतलब ये कतई नहीं है कि आरबीआई इन बैंकों का अधिग्रहण कर लेगी. आरबीआई जैसे दूसरे बैंकों की निगरानी करती है वैसे ही अब सहकारी बैंक भी केंद्रीय बैंक की निगरानी में काम करेंगे.

 

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