लूटघर: लोन की EMI तक हो गईं पूरी, लेकिन अब तक नहीं मिला मकान

सवाल ये कि सरकार और अदालतें मिल कर जो संस्थाएं बनाती हैं, वो क्या कर रही हैं? एक तरफ तो लोगों को बायर लूट ले गए और दूसरी ओर अफसरों की फौज भी देश के टैक्स का पैसा लूट रही है.

प्रतीकात्मक फोटो

हमारी ये स्पेशल सीरीज अब रंग लाने लगी है. लोग अपने हक के लिए आवाज उठाने लगे हैं, लेकिन हमारा सवाल अभी बाकी है. सवाल ये कि सरकार और अदालतें मिल कर जो संस्थाएं बनाती हैं, वो क्या कर रही हैं? एक तरफ तो लोगों को बायर लूट ले गए और दूसरी ओर अफसरों की फौज भी देश के टैक्स का पैसा लूट रही है. फिलहाल आगे बढ़ते हैं. इस पर बाद में विस्तार से चर्चा करेंगे.

जैसा कि हम रोज बता रहे हैं लूटघर सीरीज देखने के बाद हमारे पास कई दर्शकों के मेल और मैसेज आ रहे हैं.

कानपुर से हमारी दर्शक विभा वर्मा ने बताया कि 2010 में उन्होंने शहर के नवशील धाम फेज-2 में एक मकान बुक किया. एलआईसी से 15 लाख लोन और सेविंग्स मिलाकर पेमेंट की. मकान 2014 में मिलना था. आज वो पूरा लोन चुका चुकी हैं, लेकिन उन्हें घर का पजेशन नहीं मिला. विभा के मुताबिक बिल्डर राजीव भारतिया पहले तो 3-4 महीने का वक्त मांगता रहा पर अब फोन भी नहीं उठाता.

गुजरात के वडोदरा से पंकज गुप्ता की शिकायत है कि उन्होंने 2017 में 13 लाख रुपए एडवांस देकर श्रीराज असोसिएट्स के एक प्रोजेक्ट में एक फ्लैट बुक किया, लेकिन बिल्डर ने तमाम आश्वासनों के बावजूद फ्लैट का कंस्ट्रक्शन शुरू नहीं किया. हार कर उन्होंने गुजरात RERA में इसकी शिकायत की. रेरा ने रिफंड का ऑर्डर दिया. बिल्डर ने इसके बाद चेक तो दिए, लेकिन सारे चेक बैंक में बाउंस हो गए. फिर रेरा की सलाह पर उन्होंने कोर्ट का रुख किया. अब जाकर उन्हें पता चला है कि बिल्डर ऐसे ही कई ग्राहकों को चूना लगा चुका है.

बिल्डर ने नहीं होने दी रजिस्ट्री

बिल्डर के लूट की पूरी कहानी जानने से पहले गाजियाबाद के गार्डेनिया ग्लैमर फेज-2 के हाल के बार में जान लीजिए. बिल्डिंग जर्जर हो रही हो. रखरखाव खस्ताहाल हो, तो वहां रहने वाले लोगों का दर्द आप आसानी से समझ सकते हैं. उस पर आलम ये है कि जिस मकान में लोग सालों से रह रहे हों. बिल्डर ने उसकी रजिस्ट्री तक नहीं होने दी. स्वीमिंग पुल, जिम और क्लब का वादा तो बस कागजातों तक सिमट कर रह गया.

पेशे से कंसल्टेंट शैलेन्द्र त्यागी बताते हैं- 308 फ्लैट का ये प्रोजेक्ट 2010 में शुरू हुआ. 2011 में उन्होंने 44 लाख देकर फ्लैट बुक कराया, तो बिल्डर ने 2012 में मकान देने का वादा किया. समय पर घर नहीं मिला, तो लोग धरना प्रदर्शन पर उतर आए. 2014 में घर तो मिल गया, लेकिन 6 साल बाद भी मकान का मालिकाना हक नहीं मिला. डीएम से लेकर सीएम तक को चिट्ठी लिखी. कुछ नहीं हुआ. हारकर 2019 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया… अब वहीं से न्याय की उम्मीद है.

भारत तिब्बत सीमा पुलिस से रिटायरस वीरेंद्र कुमार राव ने तो मकान के लिए अपनी पूरी जिंदगी की जमा पूंजी लगा दी थी, लेकिन तब क्या पता था कि रहने को छत तो मिल जाएगी, लेकिन उसे अपना कहने का हक नहीं मिलेगा.

शिवालिक होम्स-2 में आज भी पसरा है सन्नाटा

अब कॉस्मॉस इंफ्रास्टेट के शिवालिक होम्स-2 प्रोजेक्ट के बारे में जानिए. ग्रेटर नोएडा के जिस हाउसिंग प्रोजेक्ट में देरी के खिलाफ बायर्स ने पिछले साल हंगामा खड़ा कर दिया. वहां आज भी सब कुछ ठप्प पड़ा है. जून 2017 से यहां सन्नाटा पसरा है.

मल्टीनेशनल नेशनल कंपनी में काम करने वाले आशीष वर्मा ने 2015 में यहां एक फ्लैट बुक कराया था. अपने माता-पिता को तोहफे में घर देने का सपना देखा था. 39 लाख रुपये के फ्लैट के लिए बिल्डर को शर्तों के मुताबिक, 15 लाख दिए 36 महीनों में फ्लैट देने का भरोसा मिला, लेकिन 2017 के बाद बिल्डर ने कोई जवाब नहीं दिया. दिल्ली में घर का किराया भरते हैं. साथ में बैंक की EMI भी चलती जा रही है.

प्राइवेट बैंक में काम करने वाले अनूप शर्मा के फ्लैट की कीमत करीब 30 लाख रुपये थी. करीब 40 फीसदी रकम बिल्डर को दे दी. होम बायर्स ने मिलकर यूपी रेरा से न्याय की गुहार लगाई. जनवरी 2020 में रिकवरी सर्टिफिकेट का ऑर्डर आया, लेकिन वो ऑर्डर भी नोएडा के डीएम ऑफिस में पेंडिंग पड़ा है न तो मकान का काम आगे बढ़ा न ही पैसे वापस मिले.

कहीं गार्ड ने रोका, तो कहीं अधिकारियों ने बोलने से किया इनकार

गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा के इन प्रोजेक्ट्स में मकान खरीदने वाले लोगों की शिकायतें सुनने के बाद TV9 भारतवर्ष की टीम ने दोनों बिल्डर और उनके अधिकारियों से मिलकर उनका पक्ष जानने की कोशिश की, तो कहीं गार्ड ने रोक दिया, तो कहीं अधिकारियों ने बात करने से मना कर दिया.

अगर आपके साथ भी किसी बिल्डर ने धोखाधड़ी की है, तो आप अपनी धोखाधड़ी की कहानी का एक वीडियो बनाइए और हमारे वॉट्सऐप नंबर पर भेज दीजिए या फिर ईमेल पर हमें संक्षेप में ठगी की घटना बताइए, ताकि सरकार की नींद खुले और जालसाज बेनकाब हो सकें.

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