लोन मोरेटोरियम मामला: फिर नहीं मिल सकी राहत, अगली सुनवाई 2 नवंबर को

लोन मोरेटोरियम मामले में SC ने कहा कि NPA के वर्गीकरण पर रोक लगाने का आदेश पहले ही पारित कर दिया है, राजकोषीय नीति के बिना प्रस्तावों में परिवर्तन नहीं किया जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने लोन मोरेटोरियम मामले पर अगली सुनवाई अब 2 नवंबर तक के लिए टाल दी है. इससे पहले, सुनवाई के दौरान, सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे और जस्टिस भूषण ने मामले में सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया था.

केंद्र सरकार की तरफ से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने बुधवार को सुनवाई टालने की मांग की और कहा कि 3 बज चुके हैं. वहीं जस्टिस भूषण ने कहा, हम जानते हैं आज सुनवाई पूरी नहीं हो पाएगी लेकिन हम SG को आज सुनना चाहते है. वरिष्ठ वकील पी चिदंबरम ने कहा कि हमने कामत कमेटी की सिफारिशों को लेकर नई याचिका दाखिल की है. वरिष्ठ वकील दत्ता ने कहा कि सरकार ने अपने हलफनामे में राहत देने के लिए 8 श्रेणियां बनाई हैं, वहीं दूसरे हलफनामे में कहा है कि आउटर लिमिट 15 नवंबर है.

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इस मामले में SC ने कहा कि NPA के वर्गीकरण पर रोक लगाने का आदेश पहले ही पारित कर दिया है, राजकोषीय नीति के बिना प्रस्तावों में परिवर्तन नहीं किया जा सकता है.

जस्टिस भूषण ने कहा कि आपने 2 करोड़ तक ऋण लेने वाले लोगों का लाभ उठाने का निर्णय पहले ही ले लिया है, इसका कार्यान्वयन करने के बारे में क्या? SC ने कहा कि लोग ऋण पर ऋण लगाने को लेकर परेशान हैं.

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SG ने कहा कि जब भी मामले की सुनवाई होती है, याचिकाकर्ता के दिमाग में जो बात आती है उसपर सवाल करते हैं और हमसे हर बार जवाब की उम्मीद करते हैं. ऋण देने में विविधता है और विभिन्न रूपरेखाओं का पालन करना आवश्यक है. आम आदमी ही चिंतित हैं कि आपने 2 करोड़ तक के उधारकर्ताओं के लिए कोई निर्णय लिया है या नहीं.

साल्वे ने कहा कि RBI का कहना है कि ये किया जाएगा, हर कोई ये कह रहा होगा कि ये किया जाएगा, इसके बारे में कोई सवाल ही नहीं है. जस्टिस भूषण ने कहा कि सरकार एक बार निर्णय ले लेने के बाद सुनवाई में देरी करने की कोई जरूरत नहीं है, हम एक आदेश पारित करेंगे.

जानें क्या है मामला?

दरअसल मोरेटोरियम के जारिए आप अपनी ईएमआई कुछ समय के लिए रोक सकते हैं. कोरोना महामारी के दौरान आर्थिक संकट से जूझ रहे लोगों ने बड़ी संख्या में मार्च से अगस्त तक मोरेटोरियम योजना यानी किश्त टालने के लिए मिली छूट का लाभ लिया था. लेकिन उनकी शिकायत थी कि बैंक बकाया राशि पर अतिरिक्त ब्याज यानी ब्याज के ऊपर ब्याज लगा रहे हैं. जिसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा.

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