लोन मोरेटोरियम: 3 नवंबर तक ईएमआई न चुकाने पर खाता एनपीए घोषित नहीं, 5 अक्टूबर को अगली सुनवाई

सुनवाई के दौरान काउंसिल ( Council ) ने कहा कि इस मामले को जल्द से जल्द सुनवाई के लिए लिस्ट करना चाहिए. हालांकि कोर्ट ( Court ) ने साफ कर दिया है कि 3 नवंबर तक खातों को एनपीए घोषित न किया जाए.

Supreme Court
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लोन मोरेटोरियम पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई अब 5 अक्टूबर तक के लिए बढ़ा दी गई है. केंद्र सरकार ने आज सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट और समय मांगा है. सरकार ने कोर्ट में कहा कि वह आरबीआई के साथ मिलकर जल्द ही इसका समाधान निकालेगी. इससे पहले 10 सितंबर की सुनवाई को भी टाला जा चुका है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार एफिडेविट रखने के लिए केंद्र 1 अक्टूबर तक का समय दिया है. हालांकि कोर्ट ने साफ कर दिया है कि 3 नवंबर तक खातों को एनपीए घोषित न किया जाए.

5 अक्टूबर तक के लिए स्थगित हुआ मामला

सुनवाई के दौरान काउंसिल ने कहा कि इस मामले को जल्द से जल्द सुनवाई के लिए लिस्ट करना चाहिए. इसके बाद जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने इस मामले को सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दिया.  सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने  सुप्रीम कोर्ट  से समय मांगते हुए कहा, ‘यह थोड़ा जटिल मसला है. कई आर्थिक मामले सामने आ रहे हैं. हम आरबीआई से इस मामले पर बातचीत कर रहे हैं.’

3 नवबंर तक खाते एनपीए घोषित नहीं

3 सितंबर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि लोन का भुगतान नहीं करने वाले बैंक खातों को 2 महीने तक एनपीए घोषित न किया  जाए. आज सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि बैंक खातों को 2 महीने तक एनपीए घोषित नहीं करने का आदेश जारी रहेगा. मतलब अब अगर आप किसी कारणनश  3 नवंबर तक लोन का भुगतान नहीं कर पाते हैं तो आपका खाता एनपीए घोषित नहीं.

10 सितंबर को भी टली थी सुनवाई

लोन मोरेटोरियम मामले की सुनवाई इससे पहले 10 सितंबर को भी चल गई थी. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया था. कि बार बार सुनवाई नहीं टाली जाएगी. आज सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अगली बार फाइनल प्लान के साथ ही आएं. दरअसल राजीव महर्षि की अध्यक्षता वाली एक्सपर्ट कमेटी ब्याज पर ब्याज में छूट नहीं देने की सिफारिश कर सकती है. माना जा रहा है कि इस कमेटी की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट के फैसले में अहम भूमिका निभा सकती है. अगर ऐसा होता है उन तमाम लोगों को झटका लगेगा जो इस उम्मीद में है कि उनके लोन पर ब्याज के उपर लगने वाले ब्याज से राहत मिलेगी.

 

 

 

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