टाटा-मिस्‍त्री विवाद : NCLAT के आदेश पर रोक, SC ने सायरस को नोटिस जारी कर पूछे सवाल

18 दिसंबर 2019 को NCLAT ने अपने आदेश में साइरस मिस्त्री को टाटा समूह के कार्यकारी चेयरमैन पद पर फिर से बहाल किए जाने का आदेश दिया था.

टाटा संस और सायरस मिस्त्री विवाद मामले में टाटा संस को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है. याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के फैसले पर रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NCLAT के आदेश में बुनियादी कमी है. हमने NCLAT के न्यायिक रवैये को देखा तो लगा कि इसमें बुनियादी कमी थी.

18 दिसंबर 2019 को NCLAT ने अपने आदेश में साइरस मिस्त्री को टाटा समूह के कार्यकारी चेयरमैन पद पर फिर से बहाल किए जाने का आदेश दिया था. इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में टाटा संस की ओर से चुनौती दी गई थी. जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाते हुए साइरस मिस्त्री को नोटिस जारी किया है.

बता दें, सायरस मिस्त्री टाटा संस के छठे चेयरमैन थे. रतन टाटा के 2012 में रिटायर होने पर सायरस मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन के रुप में नियुक्त किया गया.  लेकिन 2016 में साइरस मिस्त्री को टाटा समूह के चेयरमैन पद और कंपनियों के निदेशक मंडलों  से हटा दिया गया.

फिर दो महीने, बाद मिस्त्री ने टाटा संस के इस फैसले को NCLT की मुंबई बेंच में चुनौती दी थी. लेकिन NCLT ने जुलाई 2018 में मिस्त्री के दावे को रद्द कर दिया. इसके बाद मिस्त्री ने खुद NCLT के फैसले को NCLAT में चुनौती दी. 18 दिसंबर 2019 को NCLAT ने सुनवाई करते हुए साइरस मिस्त्री को टाटा समूह के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में एक बार फिर नियुक्त करने का आदेश दिया. साथ ही फैसले में कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति को अवैध करार दिया था.

टाटा संस अपना पक्ष रखते हुए लगातार ये दावे करता रहा कि बोर्ड उनके प्रति विश्वास खो चुका है. मिस्त्री ने जानबूझकर और कंपनी को नुकसान पहुंचाने की नीयत से संवेदनशील जानकारी लीक की. इसकी वजह से ग्रुप की मार्केट वैल्यू में बड़ा नुकसान हुआ.

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