ऑटो सेक्टर में मंदी से झारखंड बेहाल, टाटा मोटर्स में हजारों की गई नौकरी

कंपनी ने मासिक उत्पादन में लगभग 2,500-3000 यूनिट की कटौती की है, जो पहले  10,000- 12,000 यूनिट थी.

नई दिल्ली: जमशेदपुर टाटा स्टील और टाटा मोटर्स का घर है, जिसका आर्थिक गतिविधियों में बहुत बड़ा योगदान रहा है. जमशेदपुर के इमली चौक पर वीकडेज़ में 200 से ज्यादा मजदूर अपनी दिहाड़ी के इंतजार में खड़े देखे जा सकते हैं. तीन महीने पहले चीजे अलग थीं, अब ऐसी भीड़ इमली चौक पर नहीं देखने को मिलेगी. काम करने के लिए लोग तो बहुत हैं, लेकिन काम ही नहीं है

जमशेदपुर से लगभग 30 किलोमीटर दूर सरायकेला और राजनगर जैसी जगहों पर ऑटो सहायक इकाइयां की भीड़ देखने को मिलती थी, जो अब दैनिक मजदूर की भीड़ में दिहाड़ी के इंतजार में खड़े दिखते हैं. पिछले कुछ महीनों में ऑटोमोबाइल उद्योग में मांग की कमी की वजह से कम लेबर की जरूरत है.

यह प्लांट ग्रामीण क्षेत्रों के मजदूरों को इंडस्ट्रियल और निर्माण कार्यों में नौकरी करने का मौका देता है. वर्षा आधारित झारखंड में कृषि का भी कोई विकल्प नहीं. यहां तक कि मनरेगा के तहत प्रति दिन 171 रुपये विश्वसनीय नहीं है, योजना में देर से भुगतान चक्र और कार्यान्वयन मुद्दे भी सामने आए हैं.

जमशेदपुर में टाटा मोटर्स भारी वाहन का निर्माण करने के लिए जाना जाता है. टाटा मोटर्स लगभग 10,000 लेबर को रखती है, जिसमें आधे से ज्यादा कॉन्ट्रेक्ट पर होते हैं. सूत्रों के अनुसार, कंपनी ने मासिक उत्पादन में लगभग 2,500-3000 यूनिट की कटौती की है, जो पहले  10,000- 12,000 यूनिट थी.

SCCI(सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री)का मानना है कि MSME (मिनीस्ट्री ऑफ माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइज)  सेगमेंट को पिछले पांच महीनों में लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. जिस वजह से कंपनी ने यह फैसला लिया है. ऑटोमोबाइल बॉडी बनाने वाली कंपनी के मालिक भालोटिया ने कहा कि पिछले चार-पांच महीनों में उन्हें “करोड़ों रुपये” का नुकसान हुआ है. उन्होंने बताया कि सिर्फ कुशल लेबर को ही नौकरी पर रखा जाएगा.

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