छत्तीसगढ़: ”रामवन गमन परिपथ” योजना में सीतामढ़ी-हरचौका और रामगढ़ भी शामिल

वनवास के दौरान भगवान राम ने कोरिया जिले से ही छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया था. भरतपुर तहसील के जनकपुर में स्थित सीतामढ़ी-हरचौका को उनका पहला पड़ाव माना जाता है.
Chhattisgarh CM Bhupesh Baghel, छत्तीसगढ़: ”रामवन गमन परिपथ” योजना में सीतामढ़ी-हरचौका और रामगढ़ भी शामिल

भगवान राम के वनवास काल से संबंधित स्थानों का पर्यटन-तीर्थ के रूप में विकास के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) की महत्वाकांक्षी परियोजना है. इसके लिए राम वन गमन परिपथ तैयार किया जा रहा है. शासन ने राम से संबंधित 75 स्थानों का चयन किया है. पहले चरण में इनमें से 9 स्थानों का सौंदर्यीकरण एवं विकास किया जा रहा है. इसके लिए 137 करोड़ 45 लाख रुपये की कार्ययोजना तैयार की गई है. इस परिपथ में अच्छी सड़कों समेत विभिन्न तरह की नागरिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी.

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जिन स्थानों को पर्यटन-तीर्थ के रूप में विकसित किया जा रहा है, उनमें कोरिया जिले का सीतामढ़ी-हरचौका तथा सरगुजा का रामगढ़ भी शामिल है. इनमें से रामगढ़ की प्रसिद्धि विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के लिए भी है. महाकवि कालिदास ने अपनी कालजयी कृति मेघदूतम् की रचना यहीं पर की थी.

वनवास में भगवान राम ने छत्तीसगढ़ में बिताया था लंबा समय

वनवास के दौरान भगवान राम ने कोरिया जिले से ही छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया था. भरतपुर तहसील के जनकपुर में स्थित सीतामढ़ी-हरचौका को उनका पहला पड़ाव माना जाता है. मवाई नदी के किनारे स्थित सीतामढ़ी-हरचौका की गुफा में 17 कक्ष हैं. इसे सीता की रसोई के नाम से भी जाना जाता है. वहां एक शिलाखंड है जिसे लोग भगवान राम का पद-चिन्ह मानते हैं.

सीता की रसोई और राम-लक्ष्मण की गुफाएं भी संवरेंगी

मवाई नदी तट पर स्थित गुफा को काट कर 17 कक्ष बनाए गए हैं, जिनमें शिवलिंग स्थापित हैं. इसी स्थान को हरचौका (रसोई) के नाम से जाना जाता है. भगवान राम हरचौका से रापा नदी के तट पर स्थित सीतामढ़ी-घाघरा पहुंचे थे. यहां करीब 20 फीट ऊपर 4 कक्षों वाली गुफा है, जिसके बीच में शिवलिंग स्थापित है. आगे की यात्रा में वे घाघरा से निकलकर कोटाडोला होते हुए सरगुजा जिले की रामगढ़ पहाड़ी पहुंचे थे. यह अम्बिकापुर-बिलासपुर मार्ग पर स्थित है. इसे रामगिरि भी कहा जाता है. महाकवि कालिदास के मेघदूतम् में इसी स्थान के दृश्यों का अंकन हुआ है. वनवास के दौरान श्रीराम ने पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ यहां कुछ दिन बिताये थे. इसीलिए वहां स्थित गुफाएं लोक में उन्हीं के नाम से जानी जाती हैं. राम के तापस्वी वेश के कारण एक का नाम जोगीमारा, दूसरे का सीता बेंगरा और एक अन्य का नाम लक्ष्मण गुफा पड़ गया.

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