आदिवासी न होने के बावजूद अजीत जोगी ने IAS से लेकर राजनीति में लिया फायदा, अब FIR दर्ज

उच्‍चस्‍तरीय जांच समिति ने तीन दिन पहले रिपोर्ट दी थी कि अजीत जोगी असल में आदिवासी नहीं है. वह सिविल सर्विसेज से लेकर अपने राजनीतिक कॅरिअर में आदिवासी होने का लाभ लेते रहे.

छत्‍तीसगढ़ के पूर्व सीएम अजीत जोगी के खिलाफ बिलासपुर में एफआईआर दर्ज की गई है. छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस प्रमुख पर अपनी जाति को लेकर झूठा दावा करने का आरोप है. एक उच्‍चस्‍तरीय जांच समिति ने तीन दिन पहले रिपोर्ट दी थी कि अजीत जोगी असल में आदिवासी नहीं है. स्‍क्रूटनी कमेटी ने 23 अगस्‍त को जोगी के दावे को निरस्‍त कर दिया था.

जोगी सिविल सर्विसेज से लेकर अपने राजनीतिक कॅरिअर में आदिवासी होने का लाभ लेते रहे. उनके खिलाफ सिविल लाइंस थाने में मुकदमा संख्‍या 559/19 पंजीकृत किया गया है. जिलाअधिकारी की ओर से तहसीलदार ने अजीत जोगी के खिलाफ FIR दर्ज कराई है.

पूर्व सीएम पर सामाजिक प्रास्थिति प्रमाणीकरण अधिनियम की धारा 10 (1) लगाई गई है. यह ग़ैरज़मानती धारा है जिसमें अधिकतम दो वर्ष की सजा और अधिकतम बीस हजार रुपए के जुर्माने का प्रावधान है.

जोगी ने रिपोर्ट आने के बाद कहा था कि वह इस मामले को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में ले जाएंगे. गुरुवार को जोगी ने हाई कोर्ट में रिट भी दाखिल की है.

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