कठुआ केस में 6 दोषियों को सज़ा, इनके समर्थन में तिरंगा यात्रा निकालने वालों को कब मिलेगी?

कठुआ केस में 6 लोगों को सज़ा सुनाई गई है, एक को बरी किया गया है. सवाल अब इनके समर्थन में तिरंगा यात्रा निकालने वालों से है.

जम्‍मू-कश्‍मीर के कठुआ में 8 साल की बच्‍ची से रेप के बाद हत्‍या के मामले में पठानकोट की विशेष अदालत ने सजा सुना दी है. दीपक खजुरिया, प्रवेश राम और सांझी राम को 25 साल जेल यानी उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. आनंद दत्ता, तिलकराज और सुरेंद्र को 5 साल जेल और 50 हजार रुपए जुर्माने की सज़ा दी गई है.. अदालत ने विशाल जंगोत्रा नाम के एक आरोपी को बरी कर दिया है. इस मामले की सुनवाई 3 जून को पूरी हो गई थी.

चार्जशीट के मुताबिक, 10 जनवरी 2018 को अगवा की गई बच्‍ची को गांव के एक मंदिर में बंधक बनाकर रखा गया था. यहां उसके साथ दुष्‍कर्म हुआ. चार दिन बाद उसकी हत्‍या कर दी गई. घटना जब सामने आई तो देशभर में आक्रोश फैल गया था.

ये आक्रोश बहुत प्रभावी शब्द है. ये जिस तरफ फैलता है, हवाओं का रुख उधर को बदल जाता है. जरूरी नहीं है कि आक्रोश हमेशा सच और इंसाफ के साथ हो. ये संयोग नहीं दुर्योग की बात है कि इसी वक्त देश में एक और आक्रोश है अलीगढ़ की घटना को लेकर. वहां ढाई साल की एक बच्ची को, जो ठीक से बोल भी नहीं पाती रही होगी, उसके साथ क्रूरता की सारी हदें पार करके मौत के घाट उतार दिया गया.

वहां दो तरह के आक्रोश हैं. एक आक्रोश उनका है जो दोषियों को सज़ा दिलाना चाहते हैं और चाहते हैं कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों. दूसरा आक्रोश उनका है जो दोषियों को सज़ा दिलाना चाहते हैं क्योंकि उनका धर्म अलग है. इस घटना के बाद से उत्तर प्रदेश में ही चार बलात्कार होने की खबरें आई हैं. लेकिन वहां कहीं भी कोई हिंदूवादी संगठन नहीं गया इंसाफ की मांग करने के लिए.

कमाल की बात है कि यही हिंदू संगठन कठुआ मामले में अपराधियों के समर्थन में तिरंगा यात्रा निकाल रहे थे. क्योंकि तब पीड़िता दूसरे धर्म की थी और अपराधी उस धर्म के जिसकी ये राजनीति करते हैं. ये दोहरे मापदंड का नया पैमाना है जिसकी ऊंचाई को पहुंचना शायद ही किसी के लिए संभव हो पाए.

जम्‍मू-कश्‍मीर की तत्कालीन बीजेपी-पीडीपी गठबंधन की सरकार में इस कठुआ को लेकर खूब खींचतान हुई थी. उस रैली में भाग लेने वाले सरकार में मंत्री रहे चौधरी लाल सिंह और चंद्र प्रकाश गंगा को मंत्रि मंडल से हटा दिया गया था. कठुआ से विधायक राजीव जसरोटिया भी उस रैली में शामिल था जिसे मंत्री बना दिया गया था.

विश्व हिंदू परिषद की नेता साध्वी प्राची अलीगढ़ जा रही थीं जहां प्रशासन ने रोक दिया. एसपी ने कहा कि ये माहौल खराब करने जा रही थीं और ऐसे सब लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. जिस विश्व हिंदू परिषद की ये नेता हैं उसने जम्‍मू-कश्‍मीर की उस तिरंगा यात्रा का समर्थन किया था. इतनी गणित समझाने का मतलब सिर्फ एक ही है. बस इतना समझिए कि जम्‍मू-कश्‍मीर में जो लोग दोषियों को सज़ा से बचाने के लिए तिरंगे का इस्तेमाल कर रहे थे वही अलीगढ़ में न्याय के पुरोधा बने हुए हैं. अब जिन अपराधियों को सजा मिल चुकी है तो क्या उन्हें भी सजा मिलेगी जिन्होंने तिरंगे का अपमान किया था?

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