हैदराबाद गैंगरेप-मर्डर केस के चारों आरोपी एनकाउंटर में ढेर, क्राइम सीन रीक्रिएट कराने ले गई थी पुलिस

पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, रात के 3.30 बजे करीब घटनास्थल पर चारों ने क्राइम सीन रीक्रिएट करते समय पुलिस पर हमला कर दिया था.

हैदराबाद से एक बड़ी खबर सामने आई है. यहां वेटरनरी डॉक्टर दिशा (बदला हुआ नाम) के साथ गैंगरेप और फिर हत्या करने के चारों आरोपियों की पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई है.

जानकारी के मुताबिक, एनएच-44 पर पुलिस एनकाउंटर में चारों आरोपियों को मार गिराया गया है. बताया जा रहा है कि पुलिस आरोपियों को घटनास्थल पर क्राइम सीन रिक्रिएट करने के लिए लेकर गई थी.

पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, रात के 3.30 बजे करीब घटनास्थल पर चारों ने क्राइम सीन रीक्रिएट करते समय पुलिस पर हमला कर दिया था. पुलिस पर हमला कर आरोपी भागने की कोशिश करने लगे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें मार गिराया.

शादनगर कोर्ट ने पुलिस को बुधवार को ही आरोपियों की 7 दिन की कस्टडी को मंजूरी दी थी. तेलंगाना पुलिस की विशेष टीम दिशा के हत्या के आरोपियों को अपनी कस्टडी में लेकर पूछताछ शुरू कर चुकी थी.

बताया जा रहा है कि सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने आरोपियों को घटनास्थल पर ले जाकर (जहां पर दिशा के साथ सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद हत्या की गई) सीन को रीक्रिएट किया, इस दौरान पुलिस को कई अहम सबूत हाथ लगे. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस को दिशा का फोन भी मिल गया है.

चारों को पुलिस ने 29 नवंबर को गिरफ्तार किया था और अगले दिन शादनगर की एक अदालत ने उन्हें 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. बाद में उन्हें हैदराबाद के चेरलापल्ली जेल में भेज दिया गया. एक अदालत ने बुधवार को आरोपियों को सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था. माना जा रहा है कि पुलिस ने आरोपियों को गुरुवार को हिरासत में ले लिया था. यह गोपनीय ढंग से किया गया था क्योंकि पुलिस को लोगों के संभावित विरोध के कारण कानून और व्यवस्था की समस्या खड़ी होने की आशंका थी.

30 नवंबर को शादनगर पुलिस स्टेशन के बाहर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया गया जब आरोपियों को अदालत में ले जाया जा रहा था. सैकड़ों लोगों ने मांग की कि आरोपियों को उन्हें सौंप दिया जाए. अपराधियों को तत्काल मौत की सजा देने की मांग के साथ निर्मम दुष्कर्म और हत्या को लेकर देश भर में विरोध की लहर देखने को मिली. पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए हैं. कई लोगों ने आरोपियों को सार्वजनिक रूप से फांसी दिए जाने की मांग की थी. तेलंगाना सरकार ने 4 दिसंबर को जल्द सुनवाई के लिए महबूबनगर में एक फास्ट-ट्रैक कोर्ट की स्थापना की थी.

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