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स्पेशल सेल की जांच में बड़ा खुलासा, एक ‘रजिस्टर’ से खुलेंगे दिल्ली दंगों के राज!

दिल्ली पुलिस (Delhi Police) सूत्रों के मुताबिक, इसी रजिस्टर में दंगाइयों का पूरा बहीखाता दर्ज है. यानी कहां-कहां किन-किन लोगों को कब दंगों (Delhi Riots) की फंडिंग की गई. जांच में पहले ही साफ था कि जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी के एक मेंबर मिरान हैदर के खाते में विदेशों से फंड आया था.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 2:18 pm, Mon, 6 July 20
Delhi riots
केस में अथर खान का भी नाम है

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की जांच में खुलासा हुआ है कि दिल्ली दंगों के लेकर एक रजिस्टर बनाया गया था, जिसमें दंगों से जुड़ी एक-एक साजिश को लिखा गया था. जैसा लिखा गया, ठीक उसी तरह दंगों को अंजाम दिया गया.

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दिल्ली पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इसी रजिस्टर में दंगाइयों का पूरा बहीखाता दर्ज है. यानी कहां-कहां किन-किन लोगों को कब दंगों की फंडिंग की गई. जांच में पहले ही साफ था कि जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी के एक मेंबर मिरान हैदर के खाते में विदेशों से फंड आया था. ये पैसा ओमान और यूके के एकाउंट से आया था, जिसकी अभी तफ्तीश चल रही है. हालांकि, ढाई लाख रुपये कैश भी घर से बरामद किया गया था.

हैंडराइटिंग की जांच के लिए FSL लैब भेजा गया रजिस्टर

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दंगों की जांच में नया मोड़ उस वक़्त आया जब मिरान हैदर के घर से एक रजिस्टर बरामद हुआ. इसी रजिस्टर में जनवरी से लेकर दंगों तक कहां-कहां किन-किन एकाउंट में पैसा भेजा गया, किन-किन लोगों को कैश दिया गया ये सब डिटेल्स लिखी हुई है. रजिस्टर में ये भी लिखा है कि दंगों से पहले यानी जनवरी 2020 में उसके एकाउंट में 5 लाख रुपये आये. लिहाजा, अब इस रजिस्टर को हैंडराइटिंग की जांच के लिए FSL लैब भेजा गया है.

एंटी CAA प्रदर्शन के साथ जुड़े दंगों के तार

सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान ये भी पता चला था कि दिल्ली दंगों की पटकथा उसी वक्त लिख दी गयी थी जब एंटी CAA प्रोटेस्ट शुरू हुआ था. इसकी शुरुआत 13 से 15 दिसम्बर 2019 को जामिया इलाके से हुई थी. दिसम्बर में जामिया हिंसा के ठीक बाद ‘जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी’ नाम का संगठन बनाया गया था.

व्हाट्स एप पर भी बनाये गए जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी में जामिया के स्टूडेंट, आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन, स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन, मुस्लिम स्टूडेंट फोरम, जामिया स्टूडेंट फोरम जैसे कई संगठनों के स्टूडेंट्स शामिल थे.

जांच में ये भी खुलासा हुआ था कि जामिया कॉर्डिनशन कमेटी को PFI समेत कई संगठनों से फंडिंग मिल रही थी. हालांकि जामिया हिंसा के बाद जामिया यूनिवर्सिटी ने साफ कह दिया था कि जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी यूनिवर्सिटी की कोई ऑफिसियल बॉडी नहीं है.

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