देह व्यापारियों के शिकंजे से बचकर भागी लड़की, महिला आयोग ने दर्ज कराई FIR

देह व्यापार का विरोध करने पर लड़कियों के शरीर पर ब्लेड से घाव किए गए और कई दिनों तक भूखा रखा गया.

एक 16 वर्षीय लड़की रस्सी काटकर देह व्यापारियों के शिकंजे से भाग निकली. उसने एक महिला को सारी घटना बताई. महिला ने 181 पर फोन किया. इसके बाद दिल्ली महिला आयोग ने मामले में FIR दर्ज कराई.

महिला आयोग का कहना है कि लड़की को तस्करी कर असम से लाया गया था और यहां पर वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर किया जा रहा था. लड़की के माता-पिता की कई साल पहले मृत्यु हो गई थी और वह अपनी दो बहनों के साथ असम में रह रही थी. नौ महीने पहले, लड़की की बड़ी बहन को जानने वाले एक व्यक्ति ने उन्हें एक कप बनाने वाली कंपनी में अच्छी तनख्वाह की नौकरी दिलाने का वादा किया और उन्हें दिल्ली आने का लालच दिया.

इसके बाद तीनों बहनें दिल्ली आ गयीं और उसी व्यक्ति और उसकी पत्नी के साथ उसके घर पर रहने लगीं. 3 दिन बाद  लड़कियों को बताया गया कि उन्हें दिल्ली में वेश्यावृति करनी पड़ेगी और कई आदमियों के साथ सोना पड़ेगा. जब उन्होंने विरोध किया तो उनके शरीर पर ब्लेड मारे गए और उन्हें कई दिनों तक खाना नहीं दिया गया. जल्द ही वहां लोगों ने आना शुरू कर दिया और उनके साथ बार-बार बलात्कार किया और उन्हें वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर किया गया.

महिला आयोग का कहना है कि लड़कियों को उसी घर में रहने वाली 20 और नाबालिग लड़कियों के साथ रखा गया था. 19 अगस्त को एक बहन ने देखा उस घर का में गेट खुला हुआ था और उसने कुछ दूसरी लड़कियों के साथ भागने का  प्रयास किया, मगर असफल रही. आरोपियों ने उन्हें पकड़ लिया और रस्सी से बांध दिया. यह लड़की किसी तरह रस्सी काट कर आरोपी को धक्का देकर भागने में सफल रही.  उस आदमी ने उसे रोकने की बहुत कोशिश की. उस आदमी ने लड़की का सड़क पर काफी पीछा किया, लेकिन वह किसी तरह भागने में  कामयाब रही.

वह भागकर सुबह 6 बजे बादली रेलवे स्टेशन पहुंची, जहां उसकी मुलाकात शैली (बदला हुआ नाम) नाम की महिला से हुई. उसने रोते हुए शैली से मदद मांगी. शैली उसे अपने घर ले गई और दिल्ली महिला आयोग की 181 हेल्पलाइन पर फ़ोन किया. आयोग की टीम शैली के घर गयी और लड़की से मिली. आयोग की टीम ने उससे उस घर के बारे में पता करने की कोशिश की जिस स्थान पर उसे बंधक बना कर रखा हुआ था. इसके बाद आयोग की टीम उसे लेकर बादली रेलवे स्टेशन के पास के इलाके में गई ताकि उसे उस जगह की पहचान कराई जा सके जहां उसे बंधक बनाकर रखा गया था. मगर वह कुछ भी याद नहीं कर पा रही थी क्योंकि उसे ज्यादातर समय नशे में रखा जाता था.

दिल्ली महिला आयोग की टीम मामले में FIR दर्ज करने के लिए नरेला इंडस्ट्रियल एरिया थाने गयी. मगर पुलिस ने शुरू में इस मामले में FIR दर्ज करने के लिए मना कर दिया. जब आयोग की टीम ने 100 नंबर पर फ़ोन किया और शिकायत की कि पुलिस मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं कर रही है, उसके बाद पुलिस ने आईपीसी की धारा 370 A और 344 के तहत FIR दर्ज की.

लड़की ने बताया कि उसे और उसकी बहनों को 20 लड़कियों के साथ एक घर में बंदी बनाकर रखा गया था और दो लड़कियों ने घर में आत्महत्या भी कर ली थी. लड़कियों में से ज्यादातर 14-15 वर्ष की साल की नाबालिग थीं. उन्हें 24 घंटे में केवल एक बार भोजन दिया जाता था और उसमें भी उनको कुछ नशीला पदार्थ मिला कर दिया जाता था, जिससे वे बेहोश हो जाते थे. जब उनको होश आता  था, तब उनको  अपने शरीर और प्राइवेट पार्ट्स में दर्द महसूस होता था. उन्हें बंद कमरों में रखा गया था और उन्हें एक-दूसरे से बात करने की भी अनुमति नहीं थी.

एक लड़की तो बच गई है लेकिन कई बाकी लड़कियों के साथ उसकी बहनें अभी तक बंधक बनाई हुई हैं. लड़की को आश्रय गृह में भेज दिया गया है. मगर दूसरी लड़कियों को बचाया जाना बाकी है.

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