सुनवाई न होने पर गैंगरेप पीड़िता ने लगाई आग, स्वाति मालीवाल ने लिखा CM योगी को पत्र

पुलिस ने जब FIR दर्ज नहीं की तो पीड़ित लड़की ने आत्मदाह करने की कोशिश की, जिसमें वह 80 प्रतिशत तक जल गई. अभी दिल्ली में उसका इलाज चल रहा है.
hapur gangrape, सुनवाई न होने पर गैंगरेप पीड़िता ने लगाई आग, स्वाति मालीवाल ने लिखा CM योगी को पत्र

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के हापुड़ में हुए गैंगरेप की पीड़ित लड़की ने दिल्ली महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराई. उत्तर प्रदेश पुलिस से कई बार शिकायत करने के बावजूद पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज नही की थी. इस वजह से पीड़िता बहुत प्रताड़ित महसूस कर रही थी. पुलिस के इस असंवेदनशील और शर्मनाक रवैये की वजह से पीड़ित लड़की ने आत्मदाह करने की कोशिश की, जिसमें वह 80 प्रतिशत तक जल गई और अभी दिल्ली में उसका इलाज चल रहा है.

पीड़िता ने बताया कि 14 साल की उम्र में 2009 में उसकी शादी हापुड़ में हुई थी. एक साल में ही वह उसे छोड़कर चला गया. उसके बाद 2010 में उसके पिता और चाची ने उसको हापुड़ में ही एक आदमी को 10000 रुपये में बेच दिया. उस आदमी ने कई लोगों से पैसे उधार ले रखे थे, इसलिए वह पीड़िता को घरों में काम करने के लिए भेजता था. वहां उसका शोषण और गैंगरेप किया गया. पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसके साथ 16 लोगों ने दुष्कर्म किया.

पीड़ित महिला ने टीवी9 भारतवर्ष को बताया कि उसने स्थानीय पुलिस और हापुड़ के पुलिस अधीक्षक से संपर्क किया मगर पुलिस ने अभियुक्तों पर कार्रवाई करना तो दूर, उसकी एफआईआर तक लिखने से मना कर दिया. इसके बाद उसके पास आरोपियों के धमकी भरे फोन आने लगे. इससे परेशान होकर महिला ने आत्मदाह का प्रयास किया. पूरे मामले की शिकायत 181 हेल्पलाइन पर हुई तब दिल्ली महिला आयोग सक्रिय हो गया.

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है और उनसे इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने और अभियुक्तों को तुरंत गिरफ्तार करवाने के लिए कहा है. साथ ही दिल्ली महिला आयोग ने मुख्यमंत्री से पीड़िता को उचित मुआवज़ा देने और उसका पुनर्वास करने का अनुरोध किया है. इस पत्र के बाद अब जाकर एफआईआर दर्ज हुई है.

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा कि यह बहुत ही शर्मनाक है कि उत्तर प्रदेश की पुलिस ने इतनी गंभीर घटना पर इतने गैर जिम्मेदाराना तरीके से काम किया. असहाय अवस्था मे जब उसकी न्याय मिलने की सारी उम्मीद टूट गयी, तब उसने 28 अप्रैल को आत्मदाह करने का प्रयास किया. उसको एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती किया गया जहां से उसको दिल्ली रेफर कर दिया गया.

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