निर्भया के मुजरिमों को फांसी पर लटकाने के लिए तैयार बैठा हूं, देश के सबसे बड़े जल्‍लाद ने कहा

पवन कुमार अपने खानदान से चौथी पीढ़ी के जल्लाद हैं और 20 साल की उम्र से फांसी देते आ रहे हैं.

“निर्भया और हैदराबाद की डॉक्टर जैसे रूह कंपा देने वाले कांड घर बैठे नहीं रुक सकते. इसके लिए बहुत जरूरी है कि जितनी जल्दी हो सके निर्भया के मुजरिमों को फांसी पर लटका दो. डॉक्टर के हत्यारों को जल्दी से मुजरिम करार दिलवा दीजिए. हिंदुस्तान में निर्भया कांड खुद बंद हो जाएंगे. जब तक ऐसे जालिमों को मौत के घाट नहीं उतारा जाएगा तब तक बाकी बचे हुए ऐसे क्रूर इंसानों में भय कैसे पैदा होगा?”

ये कहना है देश के सबसे बड़े जल्लाद पवन का. जल्लाद का पुश्तैनी काम करने वाले पवन ने आईएएनएस से फोन पर बात करते हुए अपने मन का गुबार निकाला. उन्होंने कहा ‘अगर निर्भया के हत्यारों को सरकार लटका चुकी होती तो शायद हैदराबाद की मासूम बेमौत मरने से बच गई होती. इन हत्यारों को पालकर रखा क्यों जा रहा है? इनका इलाज जब तक आनन-फानन नहीं होगा तब तक मुसीबतें समाज में बरकरार रहेंगी.’

Hangman Pawan Kumar is waiting to hang Nirbhaya case culprits, निर्भया के मुजरिमों को फांसी पर लटकाने के लिए तैयार बैठा हूं, देश के सबसे बड़े जल्‍लाद ने कहा

निर्भया के मुजरिमों को फांसी देने के लिए बैठा हूं तैयार

पवन ने बातचीत में कहा ‘मैं एकदम तैयार बैठा हूं. निर्भया के मुजरिमों का डेथ वारंट मिले और मैं तिहाड़ जेल पहुंचूं. मुझे मुजरिमों को फांसी पर टांगने के लिए महज दो से तीन दिन का वक्त चाहिए. मैं खानदानी जल्लाद हूं, इसमें मुझे शर्म नहीं लगती. मेरे परदादा लक्ष्मण, दादा कालू राम और पिता मम्मू जल्लाद थे. मतलब जल्लादी के इस खानदानी पेशे में मैं अब चौथी पीढ़ी का इकलौता जल्लाद हूं.’

एक फांसी का दाम 25 हजार

पवन बताते हैं कि उन्होंने पहली फांसी दादा कालू राम जल्लाद के साथ पटियाला सेंट्रल जेल में दो भाइयों को दी थी. दादा के साथ अब तक पांच खूंखार मुजरिमों को फांसी देने वाले पवन के मुताबिक पहली फांसी देने के वक्त उनकी उम्र 20-22 साल थी जो अब 58 साल की हो चुकी है. पवन के मुताबिक उनका परिवार उत्तर प्रदेश सरकार से मिलने वाले पांच हजार रुपयों पर जैसे-तैसे पल रहा है. मेरठ जेल से हर महीने ये रुपए मिल जाते हैं.

पवन कहते हैं ‘पहले सस्ते जमाने में फांसी लगाने के औने पौने दाम दादा कालूराम को मिला करता था. आजकल एक फांसी लगाने का दाम 25 हजार रुपए है. हालांकि इन 25 हजार से जिंदगी नहीं कटनी फिर भी खुशी इस बात की होती है कि समाज के नासूर को अपने हाथों से खत्म किया.’

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दिल्ली जेल के महानिदेशक संदीप गोयल ने बताया ‘ऐसा नहीं है कि फांसी पर लटकाने के लिए कोई विशेष अधिकृत होता है. जेल प्रशासन और राज्य सरकार पर होता है कि वह जिसे इस काम के लिए कानूनी रूप से बेहतर समझे उससे ये काम करवा ले. बस इस काम में(फांसी देने में) समझदारी और सावधानी सबसे महत्वपूर्ण होती है.’

तिहाड़ जेल के पूर्व जेलर और बाद में कानूनी सलाहकार के पद से 2016 में रिटायर हो चुके सुनील गुप्ता ने बताया कि ’35 साल की नौकरी में मेरे सामने 8 लोगों को तिहाड़ जेल में फांसी पर लटकाया गया. इनमें रंगा बिल्ला, इंदिरा गांधी के हत्यारे सतवंत-केहर सिंह, कश्मीरी आतंकी मकबूल बट, विद्या जैन के हत्यारे दो भाई जगतार सिंह-करतार सिंह, संसद हमले का आरोपी अफजल गुरु शामिल थे. किसी को फांसी पर लटकाने में कोई दिक्कत नहीं आई. हां, इस काम के लिए विशेषज्ञ तो होना चाहिए क्योंकि इसमें अदालत के बेहद संवेदनशील हुक्म की तामील की जानी होती है. इस हुक्म के तामील होने में चूक बेहद खतरनाक साबित हो सकती है.’

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