iPhone की बजाय पैकेट से निकले साबुन, उपभोक्ता कोर्ट ने दिलवाए एक लाख रुपए

मार्च 2017 में मोहाली के एक इंजीनियर ने स्नैपडील से आईफोन ऑर्डर किया था, पैकेट से निकले थे पांच साबुन.
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चंडीगढ़: मोहाली कंज्यूमर फोरम ने एक इलेक्ट्रॉन्क्स सप्लायर, कोरियर कंपनी और स्नैपडील को एक सिविल इंजीनियर को एक लाख रुपए देने का निर्देश दिया है. मोहाली के 36 वर्षीय परवीन कुमार शर्मा ने कंप्लेन की थी कि उन्होंने स्नैपडील से एप्पल आईफोन 7 प्लस ऑर्डर किया था. फोन की बजाय पैकेट में 5 साबुन निकले थे.

परवीन शर्मा ने अपनी शिकायत में लिखा था कि उन्होंने 4 मार्च 2017 को आईफोन 7 प्लस ऑर्डर किया था. स्नैपडील की तरफ से मैसेज आया कि 12 मार्च तक डिलिवरी हो जाएगी. ‘पीयूष फैशन’ के पास से डिस्पैच होकर ब्लू डार्ट कोरियर कंपनी के पास पहुंचा ऑर्डर 6 मार्च को शर्मा के दिए गए पते पर पहुंच गया.

शर्मा के मुताबिक वो डिलिवरी रिसीव करने के समय घर पर नहीं थे इसलिए घर के केयर टेकर ने पैकेट रिसीव कर लिया. शर्मा ने पैकेट खोला तो उसमें आईफोन की बजाय 5 साबुन की टिकिया निकलीं. शर्मा का कहना है कि उन्होंने स्नैपडील की हेल्पलाइन पर फोन किया. 13 मार्च को कोरियर कंपनी की तरफ से दो लोग जांच करने आए और बताया कि डिलिवरी बॉय की गलती नहीं है, पैकेट डिलिवरी के समय सील पैक था.

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इसके बाद परवीन शर्मा ने स्नैपडील को दो ईमेल लिखे लेकिन कोई एक्शन नहीं लिखा गया, उल्टे उनका अकाउंट स्नैपडील से हटा दिया गया. थक हारकर 19 जून को शर्मा ने मोहाली कंज्यूमर फोरम में शिकायत कर दी. शिकायत के जवाब में स्नैपडील की तरफ से कहा गया कि फोन की बजाय साबुन मिलने की कहानी शर्मा ने रची है. वो एक इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफार्म है. जहां बुकिंग के बाद जिम्मेदारी शुरू होकर डिलिवरी के बाद खत्म हो जाती हैं.

ब्लू डार्ट और पीयूष फैशन की तरफ से कोई जवाब नहीं आया था. सोमवार को फोरम ने सुनवाई के बाद फैसला सुना दिया. फोरम की तरफ से कहा गया कि इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलजी ऐक्ट और नियम व शर्तों का फायदा उठाकर स्नैपडील जिम्मेदारी से बचना चाहती है. आईफोन के पैकेट पर या बिल पर कहीं भी फोन का IMER नंबर नहीं था. इसी से साफ पता चलता है कि सही प्रॉडक्ट की चिंता किसी ने नहीं की. इसके बाद फोरम ने तीनों से फोन के 81 हजार 799 रुपए 8 परसेंट ब्याज के साथ अदा करने को कहा. साथ ही 10 हजार रुपए नुकसान की भरपाई और कानूनी कार्रवाई पर हुए खर्च पर अतिरिक्त 10 हजार रुपए देने का आदेश दिया.

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