जब महात्मा गांधी जैसे दिखने वाले बुजुर्ग को GRP ने ट्रेन से निकाला तो याद आ गए बापू

उत्तर प्रदेश के इटावा रेलवे स्टेशन का है, जहां  पर गुरुवार को बाबा रामअवध दास को GRP कर्मियों ने शताब्दी ट्रेन में चढ़ने से रोक दिया.

इटावा: “मैं हैरान हूँ. ऐसा लगता है जैसे हम अभी भी ब्रिटिश युग में रह रहे हैं. मेरे पास टिकट था इसके बाद भी GRP के जवान और कोच अटेंडेंट ने मुझे ट्रेन में प्रवेश करने से मना कर दिया क्योंकि मैंने अलग तरह से कपड़े पहने थे. मैं उनके व्यवहार से दुखी और व्यथित हूँ.” ये कहना है उस बुजुर्ग का जिसका कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने महात्मा गांधी की तरह लिबास पहने हुए थे.

दरअसल, मामला उत्तर प्रदेश के इटावा रेलवे स्टेशन का है, जहां  पर गुरुवार को बाबा रामअवध दास को GRP कर्मियों ने शताब्दी ट्रेन में चढ़ने से रोक दिया. इस घटना के बाद बाबा दास ने कहा कि उन्हें ट्रेन में इसलिए नहीं चढ़ने दिया क्योंकि उन्होंने ‘अलग तरह से कपड़े पहने थे’. हालांकि, उन्होंने उत्तर मध्य रेलवे (NCR) को लिखित शिकायत में इसका जिक्र नहीं किया कि उनकी ड्रेस के कारण उन्हें अंदर जाने से रोका गया.

बाबा राम अवध दास बाराबंकी के निवासी हैं और इटावा से गाजियाबाद जा रहे थे. बाबा दास ने कहा कि वह इस बात पर जोर देते रहे कि उनके पास एक कन्फर्म टिकट है, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. वे कहते रहे कि बाबा तुम गलत ट्रेन में चढ़ गए हो. ‘ आपकी ट्रेन कानपुर में है और अगले कुछ घंटों में इटावा पहुंचेगी.

घटना की सूचना इटावा स्टेशन पर दी गई जहाँ से राम अवध दास, जिनके पीएनआर नं. 2164371556 था और जिनके पास C2 कोच में एक कन्फर्म सीट (नं 71) थी, दास के पास इटावा से गाजियाबाद तक का आरक्षण था, जहाँ वे अपने अनुयायियों को देखने जा रहे थे.

बाबा अवध दास के अनुयायी सुजाता दुबे ने कहा, “बाबा हर बरसात के मौसम में धार्मिक आयोजन करने के लिए इटावा में हमारे निवास पर आते हैं. वह गाजियाबाद के लिए शताब्दी में सवार होने वाले थे.” उन्होंने कहा कि बाबा दास मूल रूप से बाराबंकी जिले के हैं. लिखित शिकायत में बाबा ने जीआरपी कर्मियों और एक परिचारक को ट्रेन में नहीं चढ़ने देने के लिए दोषी ठहराया.

सात जून 1893 को प्रीटोरिया जाने के लिए ट्रेन पर चढ़े। गांधी जी के पास ट्रेन का फस्‍ट क्‍लास का टिकट था। प्रथम श्रेणी का टिकट होने के बावजूद उन्‍हें कोच में अपमानित होना पड़ा। ट्रेन जब पीटरमारिट्जबर्ग पहुंचने वाली थी तो उन्हें थर्ड क्लास वाले डिब्बे में जाने के लिए कहा गया। लेकिन गांधी जी ने इनकार कर दिया तो उन्हें जबरदस्ती पीटरमारिट्जबर्ग स्टेशन पर ट्रेन से धक्का देकर उतार दिया गया था। गांधी जी के समान को ट्रेन के बाहर फेंक दिया गया। ट्रेन के पायदान पर बैठकर उन्‍होंने अपना सफर पूरा किया। इस घटना से गांधी जी काफी आहत हुए थे। बता दें कि उस वक्‍त फर्स्ट क्लास कंपार्टमेंट में सिर्फ गोरे लोग ही सफर कर सकते थे।