‘यक़ीन हो तो कोई रास्ता निकलता है’, निर्मला सीतारमण ने जो शेर कहा, पढ़ें वो पूरी ग़ज़ल

सीतारमण ने अपने भाषण में मंज़ूर हाशमी का एक शेर सुनाया. उन्‍होंने कहा, 'यक़ीन हो तो कोई रास्ता निकलता है, हवा की ओट भी ले कर चराग़ जलता है'.

नई दिल्‍ली: वित्‍तमंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में आम बजट 2019-20 पेश कर रही हैं. अपने बजट भाषण की शुरुआत में उन्‍होंने नरेंद्र मोदी सरकार को मिले बहुमत का जिक्र किया, फिर अपने सरकार की उपलब्धियां गिनाईं. सीतारमण ने अपने भाषण में मंज़ूर हाशमी का एक शेर भी सुनाया. उन्‍होंने कहा, ‘यक़ीन हो तो कोई रास्ता निकलता है, हवा की ओट भी ले कर चराग़ जलता है’.

वित्‍तमंत्री ने जो शेर सुनाया, वह मंज़ूर हाशमी की एक ग़ज़ल का हिस्‍सा है. पूरी ग़ज़ल कुछ इस तरह है.

यक़ीन हो तो कोई रास्ता निकलता है, हवा की ओट भी ले कर चराग़ जलता है
सफ़र में अब के ये तुम थे कि ख़ुश-गुमानी थी, यही लगा कि कोई साथ साथ चलता है
ग़िलाफ़-ए-गुल में कभी चाँदनी के पर्दे में, सुना है भेस बदल कर भी वो निकलता है
लिखूँ वो नाम तो काग़ज़ पे फूल खिलते हैं, करूँ ख़याल तो पैकर किसी का ढलता है
रवाँ-दवाँ है उधर ही तमाम ख़ल्क़-ए-ख़ुदा, वो ख़ुश-ख़िराम जिधर सैर को निकलता है
उम्मीद ओ यास की रुत आती जाती रहती है, मगर यक़ीन का मौसम नहीं बदलता है

सीतारमण को शुक्रवार को बजट पेश करने से पहले पारंपरिक लाल रंग के ब्रीफकेस के बजाय लाल रंग के कपड़े में लिपटे बजट दस्तावेज के साथ देखा गया. कपड़े के ऊपर अशोक स्तंभ बना था. मुख्य आर्थिक सलाहकार के. सुब्रमण्यम ने कहा कि यह पश्चिमी प्रथा की गुलामी का प्रस्थान है. प्रत्येक भारतीय व्यापारी अपने व्यापार का हिसाब रखने के लिए पारंपरिक रूप से बहीखाता रखता है, यह लाल कपड़ा उसका प्रतीक है.

सीतारमण को लाल रंग के कपड़े में लिपटे बजट के दस्तावेज लाते हुए देखा गया था जो पीले और लाल धागे से बंधा हुआ था. इससे पहले सभी वित्तमंत्रियों को लाल रंग के सूटकेस में बजट पेश करते हुए देखा गया था.

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