जूस बढ़ा सकती है बच्चों की परेशानी, पढ़िए क्या कहते हैं सेहत के एक्सपर्ट

फलों का ताज़ा जूस हो या फिर डिब्बाबंद, दोनों में शुगर और कैलरी की अत्यधिक मात्रा होती है.

नई दिल्ली: जंक फूड खाने से आपकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है, यह सभी जानते हैं. लेकिन जूस भी आपकी सेहत पर बुरा असर डालता है क्या कभी ऐसा सुना है आपने? शहर के लोग भाग-दौड़ भरी ज़िंदगी में ख़ुद को फिट रखने के लिए मौसमी जूस का सेवन करते हैं. इससे शरीर को पोषक तत्व तो मिलता ही है साथ ही पानी की कमी भी दूर हो जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं शिशुओं और छोटे बच्चों को फ्रूट जूस बिल्कुल नहीं देना चाहिए. फिर चाहे वह फ्रेश जूस हो या फिर पैक्ड.

आइडियल एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) के न्यूट्रिशन चैप्टर द्वारा बनाए गए राष्ट्रीय सलाहकार समूह यानी नैशनल कंसल्टेटिव ग्रुप ने हाल ही में फास्ट ऐंड जंक फूड्स, शुगर स्वीटन्ड बेवरेजेस और एनर्जी ड्रिंक्स को लेकर ताजा दिशानिर्देश जारी किए हैं. निर्देश के मुताबिक शिशुओं व छोटे बच्चों को फ्रूट जूस देने के बजाय मौसमी फल खिलाना चाहिए.

एक्सपर्ट ने सलाह दी है कि अगर बच्चों को फ्रूट जूस या फ्रूट ड्रिंक्स देतें हैं तो 2 से 5 साल के बच्चों के लिए उसकी मात्रा प्रति दिन 125ml यानी आधी कप होनी चाहिए. जबकि 5 साल से अधिक आयु वाले बच्चों को एक कप यानी प्रति दिन 250 ml के हिसाब से फ्रूट जूस देना चाहिए.

राम मनोहर लोहिया अस्पताल में सीनियर पीडिऐट्रिशन डॉ. हेमा गुप्ता मित्तल ने कहा, ‘बच्चों को मात्रानुसार और फ्रेश फ्रूट जूस देना चाहिए. फलों का ताज़ा जूस हो या फिर डिब्बाबंद, दोनों में शुगर और कैलरी की अत्यधिक मात्रा होती है. वहीं फल मांसपेशियों के विकास में मदद करते हैं और डेंटल हेल्थ के लिए भी जरूरी हैं.’

दरअसल फलों में शुगर के साथ फाइबर भी होता है जो पाचन में काफी मदद करता है. जबकि सीधे जूस लेने में अधिक शुगर का ख़तरा रहता है.

आईएपी के निर्देशानुसार 5 साल से कम उम्र के बच्चों को कार्बोनेटेड ड्रिंक्स/कैफीनयुक्त ड्रिंक्स जैसे कि चाय और कॉफी से बिल्कुल दूर रहना चाहिए. वहीं 5 से 9 साल के स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए चाय या कॉफी की मात्रा प्रति दिन आधा कप रहनी चाहिए, जबकि 10 से 18 साल के बच्चों के लिए प्रति दिन 1 कप. हालांकि इस दौरान बच्चे को कैफीनयुक्त अन्य कोई चीज न देनी चाहिए.

आईएपी की गाइ़डलाइन के मुताबिक इन खाद्य पदार्थों और ड्रिंक्स का सीधा संबंध हाई बॉडी मास इंडेक्स से होता है और बच्चों में हृदय संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसके अलावा कैफीनयुक्त ड्रिंक्स पीने से नींद आने में दिक्कत होने लगती है. भारतीय बच्चों में फास्ट फूड और शुगर स्वीटन्ड बेवरेजेस की खपत में वृद्धि को देखते हुए ये दिशानिर्देश काफी महत्वपूर्ण है.