लाखों जवानों की अनसुनी कहानियां दिखाएगी ‘बंकर’, सन्‍न कर देगा सैनिकों का मेंटल ट्रॉमा

इस फिल्म को कई फिल्म समारोहों में प्रदर्शित किया गया है और व्यापक रूप से इसे सराहना भी मिली है. 'बंकर' के 95 फीसदी हिस्से की शूटिंग रिकॉर्ड पांच दिनों में 12 फीट वाले आठ बंकरों में की गई है.
Movie Bunker Release Date, लाखों जवानों की अनसुनी कहानियां दिखाएगी ‘बंकर’, सन्‍न कर देगा सैनिकों का मेंटल ट्रॉमा

हर सैनिक के पास बताने के लिए एक कहानी है, लेकिन उसे अपनी भावनाओं पर लगाम लगाकर रखना होता है. बहुत जल्द रिलीज़ होने जा रही भारत की पहली एंटी-वॉर फिल्म ‘बंकर’, जिसका उद्देश्य लाखों सैनिकों की अनसुनी कहानियों को जन-जन तक पहुंचाना है.

निर्देशक जुगल राजा की ‘बंकर’ लेफ्टिनेंट विक्रम सिंह (अभिनेता अभिजीत सिंह द्वारा अभिनीत) की एक ऐसी कहानी बताती है, जो जम्मू-कश्मीर के एलओसी स्थित पुंछ में एक गुप्त बंकर में एक घातक चोट के साथ जीवित बचे थे. युद्धविराम उल्लंघन के दौरान मोर्टार शेल के कारण वे घायल हुए थे. इस फिल्म को कई फिल्म समारोहों में प्रदर्शित किया गया है और व्यापक रूप से इसे सराहना भी मिली है.

फिल्म का मुनाफा शहीदों की पत्नियों को समर्पित

एक परोपकारी कदम के तहत फिल्म के निर्माताओं ने हमारे सशस्त्र बलों को श्रद्धांजलि के रूप में भारत के वीर और आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन को मुनाफे की कमाई का सौ फीसदी दान देने की घोषणा की है

Movie Bunker Release Date, लाखों जवानों की अनसुनी कहानियां दिखाएगी ‘बंकर’, सन्‍न कर देगा सैनिकों का मेंटल ट्रॉमा

‘बंकर’ के 95 फीसदी हिस्से की शूटिंग रिकॉर्ड पांच दिनों में 12 फीट वाले आठ बंकरों में की गई है. एक सैनिक के लिए ‘बंकर’ को एक सुरक्षित जगह के रूप में प्रयोग किया जाता है, जो हमेशा परिवार से दूर रहने और देश के प्रति कर्तव्य के विचार के साथ सीमा पर तैनात हैं. ऐसे में यह निश्चित रूप से आपके अंदर देशभक्ति की भावना पैदा करेगा.

हर साल 100 सैनिक करते हैं आत्महत्या

सैनिकों के 96 फीसदी मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा करने या किसी भी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को स्वीकार करने से देश को बड़ा कलंक लगता है, लेकिन सच तो यह है कि भारत में लगभग वन मिलियन सैनिक हैं और 2003 के बाद से हर साल करीब सौ सैनिकों ने आत्महत्या की है. फिल्म में मेंटल हेल्थ, आर्मी परिवारों के बीच इंटर-पर्सनल रिलेशनशिप और एक सैनिक और उनके परिवार के बीच सीमा पार होने की अंतिम कीमत का भुगतान करने जैसे महत्वपूर्ण एवं तनावपूर्ण मुद्दे इस फिल्म में शामिल हैं.

लेखक-निर्देशक जुगल राजा बताते हैं, ‘बॉलीवुड में करियर बनाने में रजनीकांत और मणिरत्नम जैसे दिग्गज मेरे प्ररेणास्त्रोत रहे हैं. ‘बंकर’ प्रतिष्ठित फिल्म ‘रोजा’ के लिए मेरा ट्रिब्यूट है. ‘बंकर’ के साथ मैंने एक एंटी-वॉर फिल्म बनाने की कोशिश की है, जो आज की पूरी तरह से अशांत दुनिया के हिसाब से बेहद प्रासंगिक है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘फिल्म एक आर्मी जवान के जीवन के भावनात्मक भाग को सामने लाती है. इसमें कई सैन्य अधिकारियों के जीवन के उदाहरण हैं और हमारे देश की सेवा करने वाली लाखों आत्माओं की जीवनी को दर्शाया गया है.’

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रियल घटनाओं से प्रेरित हैं फिल्म

लीड एक्टर अभिजीत सिंह ने फिल्म को लेकर बात करते हुए कहा, ‘मैंने फिल्म के लिए तैयारी करते हुए एक सख्त अनुशासन का पालन किया. विक्रम सिंह का चरित्र हर दूसरे सैनिक की तरह है, जिससे कोई भी रिलेट कर सकता है. उनके पास भी एक वैसा ही पल था, जैसा कि विंग कमांडर अभिनंदन के साथ घटी घटना के दौरान गुजरा था.’

अपने दैनिक अनुभव के बारे में अभिजीत सिंह ने कहा, ‘‘बंकर’ की शूटिंग 2018 में विंग कमांडर अभिनंदन की घटना से करीब तीन महीने पहले पूरी हुई थी. जब मैंने पहली बार विंग कमांडर अभिनंदन की तस्वीरों को इंटरनेट पर देखा, तो यह एक दर्पण में खुद को देखने जैसा था.’

फिल्म में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता गायिका रेखा भारद्वाज ने ‘लौट के घर जाना है’ बहुत ही सुदर तरीके से गाया है. यह एक पीसफुल गाना है, जो कहानी का अभिन्न अंग है.
यह फिल्म 17 जनवरी, 2020 को रिलीज़ होगी.

 

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