मैं सुसाइड के बहुत करीब था, लेकिन उस रात मेरा दोस्त मुझे छोड़ कर नहीं गया-मनोज बाजपेयी

मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee) ने बताया कि मुझे नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से तीन बार रिजेक्ट किया गया. उन्होंने कहा कि मैं सुसाइड (Suicide) के बहुत करीब था लेकिन उस रात मेरा दोस्त मुझे अकेले छोड़ कर नहीं गया.

बॉलीवुड में नेपोटिज्म का मुद्दा एक फिर गरमाया हुआ है. ऐसे में अब मशहूर एक्टर मनोज बाजपेयी ने अपने स्ट्रगल के दिनों के बारे में बताया और कहा कि अपनी जिंदगी के मुश्किल दौर में वो सुसाइड करने तक का मन बना चुके थे.

उन्होंने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि उनसे किस तरह कहा गया कि तुम्हारा फेस एक आइडल हीरो की तरह नहीं है, तुम बड़े पर्दे पर नहीं दिख सकते हो. उन्होंने कहा कि उन दिनों में मेरे पास वडा पाव तक खरीदने के पैसे नहीं थे. इतना ही नहीं स्ट्रगल और परेशानियों को देखकर वो सुसाइड तक करना चाहते थे, लेकिन दोस्तों ने उन्हें उस मुश्किल समय से निकालने में मदद की.

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 9 साल की उम्र में जानते थे कि एक्टिंग में भविष्य

उन्होंने बताया कि 9 साल की उम्र में ही जानते थे कि एक्टिंग ही उनका भविष्य है. मनोज बाजपेयी ने कहा, “मैं एक किसान का बेटा हूं, मैं बिहार के गांव में अपने 5 भाई- बहनों के साथ पला-बढ़ा हूं. हम गांव के स्कूल में जाते थे. हम सादी जिंदगी जीते, लेकिन जब भी शहर आते तो थिएटर जाते. मैं अमिताभ बच्चन का बहुत बड़ा फैन था और उन्हीं की तरह बनना चाहता था. 9 साल की उम्र में मैं जानता था कि एक्टिंग में मेरा भविष्य है”.

हाल ही में मनोज सोनी लिव की फिल्म भोंसले में नजर आए हैं. उन्होंने बताया कि रुपये नहीं होने के कारण अपने पैशन को नहीं पढ़ाई को चुना और दिल्ली शिफ्ट हो गए और दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने लगे. उस समय भी थिएटर के जरिए अपना पैशन फॉलो किया. वहीं उनके गांव के लोगों का कहना था कि ये कुछ नहीं कर सकता है.
नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से तीन बार रिजेक्ट हुए
मनोज बाजपेयी ने बताया कि मुझे नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से तीन बार रिजेक्ट किया गया. उन्होंने कहा कि मैं सुसाइड के बहुत करीब था, लेकिन उस रात मेरा दोस्त मुझे अकेले छोड़ कर नहीं गया. मैंने तब तक मेहनत की जब तक मुझे फिल्म इंडस्ट्री ने एक्सेप्ट नहीं कर लिया. उस साल मैं एक चाय की दुकान पर था जब तिग्मांशू अपनी खटारा स्कूटर के साथ मेरे पास आए. शेखर कपूर मुझे ‘बैंडिट क्वीन’ में कास्ट करना चाहते थे, मुझे लगा मैं तैयार हूं मुंबई जाने के लिए.
पहले शॉट के बाद कहा गया गेटआउट
उन्होंने बताया कि मुंबई शिफ्ट होने के बाद मैं पांच लोगों के साथ एक चॉल में रहता था और काम की तलाश करने लगा, लेकिन मुझे कोई  रोल नहीं मिला. अपने शुरुआती स्ट्रगल के दिनों में बात करते हुए बाजपेयी ने बताया, एक बार एक ऐड एजेंसी ने मेरी फोटो फाड़ दी थी और एक ही दिन में तीन प्रोजेक्ट छिन गए थे. मुझे मेरे पहले शॉट के बाद गेटआउट कर दिया गया था. मैं हीरो के फेस के लिए सही नहीं था और वो सोचते थे कि मैं बड़े पर्दे के लायक नहीं हूं. उस समय किराया भरने तक के रुपये नहीं थे और वड़ा पाव तक मेरे लिए बहुत मंहगा था, लेकिन पेट की भूख से कहीं ज्यादा सफल होने की भूख थी.
4 साल बाद मिला पहला ब्रेक 

मुझे स्ट्रगल करते हुए चार साल हो गए और इसके बाद फिर मुझे महेश भट्ट की सोप ओपेरा ‘स्वाभिमान’ में काम में मिला जो कि दूरदर्शन पर आता था. मुझे एक एपिसोड के 1500 रुपये मिलते थे. वहां से मेरे काम को देख गया और मुझे पहली फिल्म मिली और जल्दी ही मुझे ‘सत्या’ से पहला ब्रेक मिला. उन्होंने कहा कि मेरी मेहनत रंग लायी. उसके बाद मैंने मुंबई में घर खरीदा क्योंकि मैं जानता था कि मुझे यही रहना है. 67 फिल्म करने के बाद आज मैं यहां हूं. यह सब सपने जैसा है जो अब हकीकत में बदल चुका है.

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